IMD Weather Alert: देश भर में पहाड़ से मैदान तक बारिश का प्रकोप; अगले 4 दिनों तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट
देश के कई हिस्सों में मानसून का विकराल रूप देखने को मिल रहा है, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और मैदानी इलाकों में नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक लगातार बारिश की स्थिति बनी रहेगी और कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।
12 से अधिक राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने उत्तर भारत और मध्य भारत के कई प्रमुख राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में तेज हवाओं व गर्जना के साथ बारिश का अलर्ट है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने और बेहद जरूरी होने पर ही यात्रा करने की सलाह दी है।
पहाड़ों पर लैंडस्लाइड का कहर, 200 से अधिक सड़कें बंद
लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों समेत 200 से ज्यादा संपर्क मार्ग मलबे के कारण बंद हो चुके हैं। उत्तराखंड में तवाघाट-गुंजी सड़क बंद होने से व्यास घाटी का संपर्क पूरी तरह कट गया है, जिससे स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बिहार में उफनाईं नदियां, सोन बैराज के सभी 69 गेट खोले गए
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों और बिहार के मैदानी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश से राज्य की नदियां उफान पर हैं। जलस्तर के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए रोहतास जिले के इंद्रपुरी स्थित सोन बैराज के सभी 69 फाटकों को खोल दिया गया है। इससे निचले और तटीय इलाकों में पानी भरने का खतरा बढ़ गया है, जिसके चलते जिला प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है।
प्रशासनिक अलर्ट और राहत-बचाव कार्य तेज
बारिश और बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को तैनात कर दिया गया है। बंद पड़ी सड़कों से मलबा हटाकर यातायात बहाल करने का काम जारी है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रभावित क्षेत्रों के निवासियों को जलभराव वाले स्थानों से दूर रहने और सतर्कता बरतने की अपील की है।
Allahabad HC Decision: राहुल गांधी की नागरिकता को चुनौती देने वाली याचिका खारिज; इलाहाबाद HC की लखनऊ पीठ का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने अधिवक्ता अशोक पांडे और रजनीश कुमार सिंह द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई की।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी (उर्फ राहुल विंसी) ब्रिटेन के नागरिक हैं और उन्होंने भारतीय नागरिकता खो दी है, इसलिए वे रायबरेली से लोकसभा सांसद के रूप में पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं।
ब्रिटेन की कंपनी बैकऑप्स का दिया था हवाला, नहीं दे सके दस्तावेज
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता-इन-पर्सन रजनीश कुमार सिंह ने तर्क दिया कि राहुल गांधी ने साल 2003 में ब्रिटेन के 'कंपनीज हाउस' (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज) में 'M/s Backops Limited' नाम की कंपनी दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने खुद को ब्रिटिश नागरिक और निदेशक बताया था। हालांकि, जब पीठ ने इस दावे से जुड़ा कोई भी आधिकारिक रिकॉर्ड या यूके रजिस्ट्रार का दस्तावेज पेश करने को कहा, तो याचिकाकर्ता एक भी कागज नहीं दिखा सके।
कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का पत्र सबूत के रूप में नाकाफी
याचिकाकर्ताओं की तरफ से सबूत के तौर पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का एक कथित प्रमाण पत्र पेश किया गया, जो 'राउल विंसी' नाम के व्यक्ति की पढ़ाई से संबंधित था। पीठ ने इस पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह दस्तावेज ब्रिटिश नागरिकता के गंभीर आरोपों को किसी भी रूप में सिद्ध नहीं करता है।
बार-बार एक जैसी याचिकाएं लाने पर कोर्ट सख्त, वापस ली गई अर्जी
अदालत ने याद दिलाया कि वर्ष 2015 और 2019 में भी इन्हीं याचिकाकर्ताओं द्वारा समान मुद्दों पर याचिकाएं दाखिल की गई थीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 9(2) के तहत नागरिकता से जुड़े किसी भी विवाद का निपटारा करने का वैधानिक अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। सबूत न होने और कोर्ट के रुख को देखते हुए याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार करते हुए मामले को खारिज कर दिया।
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