Earthquake in Tibet: तिब्बत में 5.0 तीव्रता का भूकंप, नेपाल बॉर्डर पर दहशत; बाढ़ में अब तक 1280 की मौत
Earthquake in Tibet: नेपाल-तिब्बत सीमा के पास गुरुवार को 5 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र तिब्बत में जमीन से महज 10 किलोमीटर की गहराई पर था। इसका केंद्र नेपाल सीमा से करीब 55 किलोमीटर और उत्तराखंड के जोशीमठ से लगभग 128 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित था। कम गहराई पर आने के कारण भूकंप के झटके सतह तक अपेक्षाकृत तेजी से पहुंच सकते हैं और ऐसे भूकंप अधिक नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, शुरुआती जानकारी के अनुसार भूकंप से फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान या लोगों के घायल होने की खबर नहीं है।
यह भूकंप ऐसे वक्त आया है, जब तिब्बत और नेपाल हाल ही में भीषण बाढ़ और भूस्खलन की त्रासदी से जूझ चुके हैं। 26 अगस्त को आई प्राकृतिक आपदा ने दोनों क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई थी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक कुल 1,280 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें नेपाल में 1,259 और तिब्बत में 21 लोगों की जान गई है। ऐसे में तिब्बत में आए ताजा भूकंप ने क्षेत्र में एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
EQ of M: 5.0, On: 03/09/2026 13:46:38 IST, Lat: 31.479 N, Long: 80.370 E, Depth: 14 Km, Location: Tibet.
— National Center for Seismology (@NCS_Earthquake) September 3, 2026
For more information Download the BhooKamp App https://t.co/5gCOtjdtw0 @DrJitendraSingh @OfficeOfDrJS @tummalasrini @GSuresh_NCS @ndmaindia pic.twitter.com/zwrE8sNscC
नेपाल में हालिया बाढ़ की तबाही के बाद आया भूंकप
यह भूकंपीय झटका ऐसे समय में आया है जब नेपाल देश पहले से ही एक भीषण प्राकृतिक त्रासदी से जूझ रहा है। कुछ ही दिन पहले नेपाल में हिमनद टूटने (Glacial Collapse) के कारण आए अचानक विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक बाढ़) ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें 1,200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इस त्रासदी के जख्म अभी हरे ही थे कि तिब्बत सीमा के पास आए इस नए भूकंप ने स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों की चिंता और अधिक बढ़ा दी है। पर्वतीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए सीमाई इलाकों में सुरक्षा और राहत कार्यों पर दबाव काफी बढ़ गया है।
भूकंप के दौरान क्या करें और क्या न करें?
भूकंप जैसी अचानक आने वाली आपदाओं के वक्त घबराने के बजाय सूझबूझ से काम लेना बेहद जरूरी है। सही समय पर उठाए गए कदम आपकी और आपके परिवार की जान बचा सकते हैं:
क्या करें:
- ड्रॉप, कवर और होल्ड ऑन: झटके महसूस होते ही तुरंत जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं (Drop), किसी मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे छिप जाएं (Cover) और उसके पैरों को मजबूती से पकड़ लें (Hold)।
- घर के अंदर ही सुरक्षित रहें: जब तक कंपन पूरी तरह बंद न हो, घर या इमारत के अंदर ही सुरक्षित कोने में सिर को ढंककर बैठें। बाहर भागने की हड़बड़ी में चोट लगने का खतरा अधिक होता है।
- खुले मैदान में जाएं (यदि बाहर हैं): अगर आप पहले से खुले में हैं, तो ऊंची इमारतों, पेड़ों, बिजली के खंभों और ओवरब्रिज से दूर किसी सुरक्षित मैदान में चले जाएं।
- सीढ़ियों का प्रयोग करें: बहुमंजिला इमारत में होने पर बाहर निकलने के लिए केवल सीढ़ियों का इस्तेमाल करें, भूलकर भी लिफ्ट का उपयोग न करें।
क्या न करें:
- घबराएं नहीं: पैनिक या भगदड़ बिल्कुल न मचाएं, क्योंकि इससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।
- बाल्कनी या शीशों के पास न खड़े हों: झटकों के दौरान कांच की खिड़कियों, भारी अलमारियों, झूमर और घर की बालकनी से दूर रहें।
- माचिस या बिजली के स्विच का इस्तेमाल न करें: भूकंप के बाद गैस लीक होने का अंदेशा रहता है, इसलिए आग न जलाएं और न ही बिजली के उपकरणों या स्विच को ऑन-ऑफ करें।
- अफवाहें न फैलाएं: सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की भ्रामक या डरावनी झूठी खबरें साझा करने से बचें।
Strait of Hormuz: ईरान युद्ध के बीच अमेरिका का बड़ा ऑपरेशन, 40 जहाजों को निकाला; 1.8 करोड़ बैरल तेल की हुई आवाजाही
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर दुनिया के केंद्र में है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार को यहां एक बड़े एस्कॉर्ट ऑपरेशन को अंजाम दिया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, करीब 40 वाणिज्यिक जहाजों को सैन्य सुरक्षा के बीच इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से गुजारा गया।
इन जहाजों के जरिए लगभग 18 मिलियन बैरल यानी करीब 1.8 करोड़ बैरल कच्चे तेल की आवाजाही हुई। युद्ध शुरू होने से पहले इस रास्ते से हर दिन करीब 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता था।
जहाजों की सुरक्षा के लिए कई स्तर पर तैनाती
इस ऑपरेशन में अमेरिकी सेना ने सिर्फ नौसैनिक ताकत पर निर्भर नहीं किया। जहाजों की सुरक्षा के लिए हवाई, समुद्री और अंतरिक्ष आधारित संसाधनों का इस्तेमाल किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना का उद्देश्य एक तरफ कॉमर्शियल जहाजों को ड्रोन हमलों से बचाना था, वहीं दूसरी ओर ईरान की उस सैन्य क्षमता को कमजोर करना भी था, जिससे वह समुद्री यातायात को निशाना बना सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी बताया कि एस्कॉर्ट ऑपरेशन के दौरान ईरान की ओर से इस्तेमाल किए जा सकने वाले एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों को निष्क्रिय किया गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर क्यों है इतनी नजर?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव या जहाजों की आवाजाही में रुकावट वैश्विक ऊर्जा बाजार पर सीधा असर डाल सकती है।
इसी वजह से अमेरिका ने अपनी मौजूदा युद्ध रणनीति में इस समुद्री मार्ग को खास महत्व दिया है। अमेरिकी रणनीति में जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले, व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा और ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक दबाव शामिल है।
अमेरिका ने करीब 60 सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को अमेरिकी सेना ने होर्मुज के आसपास करीब 60 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, रडार स्टेशन, समुद्री सैन्य संसाधन, माइन बिछाने की क्षमता और संचार केंद्र शामिल थे।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमता को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर सकता है। इसलिए अमेरिकी सेना आने वाले समय में भी इस इलाके में सैन्य कार्रवाई जारी रख सकती है।
ट्रंप बोले- अब जहाजों को नहीं देख सकता ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ओवल ऑफिस में मीडिया से बातचीत के दौरान ताजा हमलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई सिर्फ ईरानी रडार सिस्टम तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखने की ईरान की क्षमता को कम करना भी था। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के पास जहाजों को ट्रैक करने के लिए पहले जैसी रडार क्षमता नहीं बची है।
तेल बाजार पर बढ़ रहा दबाव
होर्मुज में लगातार बने सैन्य तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है। समुद्री रास्ते की सुरक्षा को लेकर बनी चिंता के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी दबाव है।
ऊर्जा कंपनियां सैन्य सुरक्षा मिलने के बावजूद इस रास्ते से जहाज भेजने को जोखिम भरा मान रही हैं। तेल की कीमतों में तेजी और अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर भी पड़ रहा है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप का नया रुख
इस बीच ट्रंप ने ईरान के अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को लेकर भी संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि इस सामग्री को जमीन के अंदर ही छोड़कर सैटेलाइट के जरिए उसकी निगरानी की जा सकती है।
यह रुख उनके पहले के बयानों से कुछ अलग माना जा रहा है, जब उन्होंने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम को सुरक्षित करना संघर्ष की प्रमुख प्राथमिकताओं में बताया था।
आगे भी जारी रह सकता है सैन्य दबाव
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से विकसित करने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता यही है कि इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर लंबे समय तक तनाव बना रहा तो इसका असर कच्चे तेल की आपूर्ति, ईंधन की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर कितना पड़ता है।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
Haribhoomi





