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Bihar Flood: Patna में Ganga का जलस्तर रिकॉर्ड स्तर पार, 12 जिलों में 22 लाख लोग प्रभावित

(तस्वीरों के साथ) पटना, छह सितंबर बिहार और पड़ोसी राज्य झारखंड में भारी बारिश के बाद नदियों में बढ़े जलस्तर से बिहार के 12 जिलों में 22 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। पटना में रविवार को गंगा नदी का जलस्तर बाढ़ के उच्चतम स्तर को पार कर गया, जिसके बाद अधिकारियों ने अलर्ट जारी किया है। मध्य पूर्व रेलवे ने एक अधिसूचना जारी कर कहा कि पटना-गया खंड पर पुनपुन और परसा बाजार स्टेशनों को जोड़ने वाली पुल संख्या 21 पर जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाने के कारण कुछ रेलगाड़ियों को रद्द कर दिया गया है या फिर उनका मार्ग बदला गया है।

अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए अभी अलग-अलग जिलों में कुल 190 सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है और प्रभावित इलाकों से लोगों को निकालने और आवाजाही में मदद के लिए 1,429 नावों की सेवा ली जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा, अलग-अलग जिलों में राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की 27 और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 10 टीम तैनात की गई हैं। अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर ‘बाढ़ के उच्चतम स्तर’ (एचएफएल) से ऊपर चला गया है।

डब्ल्यूआरडी के मुताबिक, पटना के गांधी घाट पर रविवार सुबह छह बजे गंगा का जलस्तर 50.57 मीटर था, जो 21 अगस्त 2016 को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम जलस्तर 50.52 मीटर से 0.05 मीटर अधिक है। बयान के मुताबिक, ‘‘पटना जिले के पंडारक में सुबह छह बजे गंगा नदी का जलस्तर 43.92 मीटर था, जो 16 अगस्त 2021 को दर्ज किए गए पिछले उच्चतम जलस्तर 43.73 मीटर से 0.19 मीटर अधिक है।’’ अधिकारियों ने बताया कि राज्य में गंडक नदी डुमरियाघाट और हाजीपुर में, कोसी नदी बलतारा और कुरसेला में, बूढ़ी गंडक नदी खगड़िया में, गंगा नदी बक्सर, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव एवं मुंगेर में, पुनपुन नदी श्रीपालपुर में, घाघरा नदी दरौली में और बागमती नदी बेनीबाद में खतरे के निशान के ऊपर बह रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह स्थिति राज्य और पड़ोसी राज्य झारखंड में हुई भारी बारिश के कारण उत्पन्न हुई है।

उन्होंने बताया कि सितंबर में अब तक राज्य में 69.1 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 55 प्रतिशत अधिक है। अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के बाद पटना के गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर उच्च बाढ़ स्तर से ऊपर चला गया है, जिससे अगले एक से तीन दिनों में राज्य की राजधानी में हाथीदह और अन्य स्टेशनों पर असर पड़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि कई नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय और अरवल में लगभग 22.42 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।

जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) की ओर से जारी नवीनतम परामर्श के मुताबिक, हाथीदह में गंगा का जलस्तर अपने पिछले एचएफएल को पार कर सकता है। इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर और कटिहार जिलों में सतर्कता बढ़ा दी गई है। परामर्श में कहा गया, ‘‘अधिकारियों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सतर्क रहें और जरूरत के हिसाब से सावधानी बरतते हुए जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील जगहों और निचले इलाकों पर नियमित नजर रखें।’’ इसमें कहा गया, ‘‘अभियंताओं से बाढ़ से निपटने से संबंधित संसाधन और मशीनरी तैयार रखने को कहा गया है।

प्रभावित इलाकों के लोगों को सलाह दी गई है कि वे नदी के पास न जाएं और सतर्क रहें।’’ स्थानीय प्रशासन से कहा गया है कि वे नावों के संचालन पर नजर रखें, क्षमता से अधिक लोगों को नावों पर सवार नहीं होने दें और लोगों को हालात के बारे में जानकारी देते रहें। स्थानीय मौसम विज्ञान कार्यालय के अधिकारी ने अगले दो दिनों के दौरान राज्य में कई जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश और कुछ जगहों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। इस बीच, विपक्ष ने बिहार में आई बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की मांग की है।

बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार का 76 प्रतिशत इलाका बाढ़ से प्रभावित है और 19 जिलों के 20 लाख लोग इसकी चपेट में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर की गई पोस्ट में कहा, “बीस लाख से अधिक लोग इस आपदा में फंसे हुए हैं, पशुपालकों के मवेशी पानी में डूबकर बह गए हैं। सार्वजनिक ढांचे को भारी नुकसान हुआ है।

हजारों करोड़ के जान-माल की क्षति हुई है।” तेजस्वी ने आरोप लगाया, “दिवालिया हो चुकी बिहार सरकार बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने में उदासीन है।” राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, “केंद्र सरकार बिहार की विनाशकारी बाढ़ को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करते हुए तत्काल बेहाल बिहार की मदद के लिए पांच हजार करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता राशि प्रदान करें तथा बाढ़ राहत एवं बचाव कार्यों के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर का सहयोग सुनिश्चित करे।” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अनुरोध किया कि वह अविलंब बिहार का दौरा कर यथास्थिति का सर्वेक्षण कर तत्काल राहत पहुंचाएं।

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Manoj Jarange के अनशन स्थल पर भीड़ बढ़ने से Jalna में तनाव, OBC गुट से हटने की अपील

जालना, छह सितंबर महाराष्ट्र के जालना जिले में मराठा आरक्षण नेता मनोज जरांगे के आंदोलन स्थल पर रविवार को बड़ी संख्या में समर्थकों के पहुंचने के बाद पुलिस ने पास में विरोध प्रदर्शन कर रहे ओबीसी कार्यकर्ताओं के एक समूह से किसी दूसरी जगह जाने का आग्रह किया। इससे पहले दिन में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के कार्यकर्ताओं ने जरांगे के प्रदर्शन स्थल से कुछ मीटर की दूरी पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। ओबीसी कार्यकर्ताओं की हड़ताल अंतरवाली सराटी गांव में जरांगे के अनिश्चितकालीन अनशन के नौवें दिन शुरू हुई।

बताया जा रहा है कि मराठा समुदाय को ओबीसी का दर्जा देने की मांग को लेकर जरांगे ने चिकित्सा सहायता, पानी और नसों के जरिए दिए जाने वाले तरल पदार्थ (आईवी फ्लूइड) लेने से इनकार कर दिया है, जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई है। जरांगे मराठा समुदाय को ओबीसी वर्ग में आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांगों में हैदराबाद गजट और सतारा गजट के रिकॉर्ड लागू करना तथा पात्र मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी करना शामिल है।

कुनबी एक पारंपरिक कृषि समुदाय है, जिसे आधिकारिक रूप से ओबीसी वर्ग में शामिल किया गया है। इसके कारण उन्हें शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है। ओबीसी कार्यकर्ताओं मंगेश ससाने, विट्ठल तालेकर, सतीश कुलाल और बाबासाहेब बातुले ने अंतरवाली सराटी गांव के सोनिया नगर में भूख हड़ताल शुरू की।

उन्होंने कहा कि उनके आंदोलन का उद्देश्य ओबीसी समुदाय के संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण की रक्षा करना है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ससाने ने आरोप लगाया कि जरांगे आंदोलन के जरिए राज्य सरकार पर दबाव बनाया जा रहा है और इससे ओबीसी समुदाय के आरक्षण पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई है। उन्होंने कहा, “अब तक मराठा समुदाय के लोगों को करीब 22 लाख जाति प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं।

मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड हर संभव मदद कर रहे हैं। हम अपने अधिकारों और हिस्से की रक्षा के लिए संवैधानिक तरीके से विरोध कर रहे हैं।” ससाने ने कुनबी रिकॉर्ड के आधार पर मराठाओं को जाति प्रमाणपत्र जारी करने में मदद के लिए राज्य सरकार द्वारा नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के फैसले पर सवाल उठाया और इसे गैरकानूनी बताया। उन्होंने कहा कि पहले जारी किए गए कई मराठा जाति प्रमाणपत्र जांच के बाद जाति सत्यापन समितियों ने खारिज कर दिए थे।

ससाने ने आरोप लगाया, जरांगे सवाल उठा रहे हैं कि सत्यापन समितियों ने इन प्रमाणपत्रों को क्यों खारिज किया। कुछ मंत्री मराठाओं को ओबीसी श्रेणी में शामिल कराने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने सरकार पर एक समुदाय को विशेष लाभ देने का आरोप लगाया।

ओबीसी प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण के मुद्दे पर कथित रूप से आत्महत्या करने वाले समुदाय के युवाओं के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की भी मांग की। जरांगे के प्रदर्शन स्थल पर भीड़ बढ़ने के बाद पुलिस ने ओबीसी कार्यकर्ताओं से किसी दूसरी जगह जाने को कहा। ससाने ने कहा, हमने पहले भी इसी जगह पर प्रदर्शन किया था और तब कोई टकराव नहीं हुआ था।

अब पुलिस ने किसी भी टकराव से बचने के लिए हमें दूसरी जगह विरोध प्रदर्शन करने को कहा है। हम नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वे निजी भूमि पर आंदोलन कर रहे हैं।

इससे पहले मराठा समुदाय के सदस्यों ने अंतरवाली सराटी गांव के पास सोलापुर-धुले राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया, जिससे वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने हस्तक्षेप कर यातायात बहाल करा दिया। इस बीच, जालना की जिलाधिकारी अशिमा मित्तल ने जरांगे के प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए अंबड तहसील के अंतरवाली सराटी में सभी थोक देशी शराब और भारत में बनी विदेशी शराब की दुकानों को चार दिन के लिए बंद करने का आदेश दिया है।

जिला प्रशासन ने आशंका जताई कि शराब की दुकानों के चलते कोई अप्रिय घटना हो सकती है या सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है। इससे पहले जरांगे ने चेतावनी दी थी कि अगर सरकार उनकी मांगें पूरी नहीं करती करेगी तो वह आंदोलन तेज करने के लिए मुंबई तक मार्च करेंगे। दोनों प्रदर्शन स्थल पास-पास होने के मद्देनजर पुलिस ने इलाके में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि ओबीसी और मराठा प्रदर्शनकारियों के बीच किसी भी टकराव को रोका जा सके।

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वनडे में सबसे ज्यादा रन खर्च करने वाले 5 गेंदबाज, 1 के नाम 13000 से ज्यादा रन, विश्व कीर्तिमान 11 साल से बरकरार

5 bowlers most runs concedes in ODI: वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन लुटाने वाले गेंदबाजों की लिस्ट किसी नाकामी की नहीं, बल्कि उनके लंबे और शानदार करियर की गवाही देती है. इस लिस्ट में 13,632 रनों के साथ पाकिस्तान के शाहिद अफरीदी टॉप पर हैं. उनके बाद मुथैया मुरलीधरन, सनथ जयसूर्या, वासिम अकरम और चमिंडा वास जैसे दिग्गज शामिल हैं. सबसे ज्यादा रन देने के बावजूद इन खिलाड़ियों ने अपनी टीम के लिए सैकड़ों विकेट चटकाकर खुद को वनडे इतिहास के महानतम मैच-विजेताओं के रूप में स्थापित किया. Mon, 7 Sep 2026 07:01:02 +0530

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