सोना हाई से 15% तक गिरा: क्या आगे भी आएगी बड़ी गिरावट? ये कहता है इतिहास
सोने की कीमतों में सितंबर की शुरुआत में तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। 24 अगस्त को सोना 1,63,229 रुपए प्रति 10 ग्राम के हालिया हाई पर पहुंचा था। इसके बाद 1 से 3 सितंबर के बीच कीमत करीब 1.52 लाख से 1.59 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के दायरे में आ गई। हालांकि, बाद में कीमतों में कुछ रिकवरी देखने को मिली। ऐसे में सवाल है कि सोने में 10-15% की गिरावट आखिर कितनी असामान्य है?
अगर पिछले करीब साढ़े चार दशक का इतिहास देखें तो ऐसी गिरावट सोने के लिए कोई नई बात नहीं है। फंड्सइंडिया रिसर्च के आंकड़ों के मुताबिक, 1980 से अब तक सोने में एक साल के दौरान औसतन करीब 13% का अधिकतम गिराव यानी इन्ट्रा-ईयर ड्रॉडाउन रहा। यानी साल के दौरान सोना अपने ऊपरी स्तर से औसतन 13% तक नीचे आया है।
गोल्ड में 10-15% की गिरावट कई बार हुई
ड्रॉडाउन का मतलब है किसी एसेट की कीमत का उसके पिछले उच्च स्तर से नीचे आना। उदाहरण के लिए, सोना 1 लाख रुपए तक पहुंचने के बाद 87 हजार रुपए पर आ जाए तो यह 13% का ड्रॉडाउन होगा।
इतिहास में 10-15% की गिरावट कई बार देखने को मिली है। 1984 में सोना 13%, 1985 में 12%, 1993 में 15%, 2004 में 13%, 2007 में 14% और 2009 में 12% तक गिरा। हाल के वर्षों में भी यही ट्रेंड दिखा। 2020 में 15%, 2021 में 13%, 2022 में 15% और 2023 में करीब 10% का ड्रॉडाउन रहा।
सोने में कई बार गिरावट 20% से भी ज्यादा रही
सोने में इससे कहीं बड़ी गिरावट भी देखी गई है। 1980 में सबसे बड़ा 40% का ड्रॉडाउन दर्ज हुआ। 1981 में 25%, 1982 और 1983 में 23-23% और 2006 में 22% की गिरावट आई। 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान सोना 20% तक गिरा, जबकि 2013 में गिरावट 24% रही।
गिरावट के बाद भी साल पॉजिटिव रहा
दिलचस्प बात यह है कि साल के दौरान बड़ी गिरावट के बावजूद सोना अक्सर साल के अंत में फायदे में रहा। FundsIndia के विश्लेषण के मुताबिक, ऐसे वर्षों में 78% बार सोने ने कैलेंडर ईयर पॉजिटिव रिटर्न के साथ खत्म किया।
2008 में सोना 20% गिरा, फिर भी साल का रिटर्न 29% रहा। 2020 में 15% गिरावट के बावजूद सालाना रिटर्न 28% रहा। 2023 में 10% तक गिरने के बाद भी सोने ने साल में 15% का रिटर्न दिया।
इतिहास यह जरूर बताता है कि सोने में करेक्शन सामान्य है। लेकिन इससे यह तय नहीं होता कि मौजूदा गिरावट खत्म हो गई है या 2026 में कीमतें कहां जाएंगी। तेज रैली के बाद कुछ दिनों की बड़ी गिरावट डरावनी लग सकती है, लेकिन लंबी अवधि में सोने का सफर कभी सीधी रेखा में नहीं रहा।
(प्रियंका कुमारी)
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