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सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भारत की नई रणनीति, 'मेक इन इंडिया' से आगे बढ़कर 'इंजीनियर इन इंडिया' की ओर कदम

नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने और वैश्विक चिप विनिर्माण एवं डिजाइन केंद्र बनने की दिशा में अपने प्रयासों को तेज कर रहा है। इसी उद्देश्य से सरकार ने सेमीकंडक्टर मिशन के दूसरे चरण (सेमीकॉन 2.0) की शुरुआत की है, जिसके लिए लगभग 13 अरब डॉलर (करीब 1.27 लाख करोड़ रुपए) का प्रावधान किया गया है। नई रणनीति का लक्ष्य केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला को विकसित करना और कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी है।

दिस वीक इन एशिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अब बुनियादी विनिर्माण अवसंरचना से आगे बढ़कर डिजाइन, इंजीनियरिंग, परीक्षण, पैकेजिंग और आपूर्ति शृंखला विकास जैसे क्षेत्रों पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। सरकार का मानना है कि देश की बड़ी इंजीनियरिंग प्रतिभा और तकनीकी कौशल भारत को केवल मेक इन इंडिया नहीं बल्कि इंजीनियर इन इंडिया के रूप में स्थापित कर सकते हैं।

सेमीकंडक्टर आधुनिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई)-आधारित प्रणालियां, डेटा सेंटर, चिकित्सा उपकरण और उन्नत कंप्यूटिंग तकनीकों से लेकर लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद में चिप्स की अहम भूमिका होती है। कोविड-19 महामारी के दौरान वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आए व्यवधानों ने यह भी दिखाया कि कुछ सीमित पूर्वी एशियाई देशों पर अत्यधिक निर्भरता कितनी जोखिमपूर्ण हो सकती है। इसी अनुभव के बाद भारत ने घरेलू सेमीकंडक्टर क्षमताओं के निर्माण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका विशाल इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कार्यबल है। यही कारण है कि उद्योग जगत का एक वर्ग मानता है कि भारत केवल चिप निर्माण तक सीमित न रहकर सेमीकंडक्टर डिजाइन और इंजीनियरिंग में वैश्विक नेतृत्व हासिल कर सकता है। यह क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक मूल्यवर्धन वाला है और भारत की मौजूदा प्रतिभा क्षमता के अनुरूप भी है।

अब तक भारत ने छह राज्यों में 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें से माइक्रोन, केनेस सेमीकॉन और सीजी सेमी ने इस वर्ष वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया है। हालांकि इनकी प्रमुख गतिविधियां फिलहाल असेंबली, टेस्टिंग और पैकेजिंग तक केंद्रित हैं, लेकिन इन्हें देश में व्यापक सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र की शुरुआत माना जा रहा है।

इस बीच गुजरात के धोलेरा में टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और ताइवान की पावरचिप सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कॉर्पोरेशन की संयुक्त परियोजना भी तेजी से आगे बढ़ रही है। इस परियोजना से दिसंबर में चिप्स का पहला बैच निकलने की उम्मीद है। यह संयंत्र भारत की चिप निर्माण क्षमता को मजबूत करने और घरेलू आपूर्ति शृंखला विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने हाल ही में नीदरलैंड की अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनी एएसएमएल के साथ 11 अरब डॉलर के समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य उन्नत सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियों के विकास में सहयोग करना है, जिससे ऑटोमोबाइल, एआई, औद्योगिक स्वचालन और उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों की चिप आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

--आईएएनएस

डीबीपी

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बैडमिंटन में भारत का कमाल! सात्विक-चिराग ने रचा इतिहास, चीन की जोड़ी को हराकर पहली बार जीता चाइना मास्टर्स का खिताब

Satwiksairaj Rankireddy and Chirag Shetty : भारत की स्टार शटलर जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने शानदार प्रदर्श के दम पर इतिहास रच दिया है. उन्होंने ऐसा कुछ कर दिया है, जो आज तक कोई भी भारतीय बैडमिंटन जोड़ी नहीं कर पाई है. इन दोनों भारतीय शटलर्स ने मिलकर बीडब्ल्यूएफ सुपर 750 चाइना मास्टर्स में टूर्नामेंट का टाइटल अपने नाम किया है. इन दोनों ने पुरुष डबल्स का खिताब जीतकर देश को खुशी से झूमने का मौका दिया है. 

दरअसल,  सात्विक-चिराग की जोड़ी ने रविवार को बीडब्ल्यूएफ सुपर 750 टूर्नामेंट चाइना मास्टर्स में पुरुष डबल्स का खिताब अपने नाम किया. इस जीत के साथ इन दोनों शटलर्स ने भारत का नाम रोशन कर दिया है. पुरुष डबल्स के फाइनल मुकाबले में सात्विक-चिराग ने चीन के जी तिंग और रेन शियांग यू की जोड़ी को हराया. इन दोनों ने अपने विरोधियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया और 11-21, 21-13, 21-17 से जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया. 

सातिक-चिराग ने रचा इतिहास

 

सात्विक-चिराग की जोड़ी इस टूर्नामेंट में दो बार मुहं की खानी पड़ी है. भारत की इस स्टार जोड़ी को इसी टूर्नामेंट में 2023 और 2025 के फाइनल में हार नसीब हुई थी. इसके साथ ही दो बार सात्विक-चिराक को उपविजेता रहकर भी संतोष करना पड़ा था. वहीं, 2024 में इस जोड़ी को सेमीफाइनल में हार मिली थी और उसका सफर वहीं खत्म हो गया था. 

भारत की स्टार जोड़ी सात्विक-चिराग पिछले महीने नई दिल्ली में हुए बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप में अपना तीसरा मेडल जीतने से चूक गए थे. उन्हें क्वार्टर फाइनल में हारकर टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा गया था. अब बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर पर इस जोड़ी का यह 10वां खिताब है. ये इस साल सात्विक-चिराग का दूसरा सुपर 750 खिताब और कुल मिलाकर उन्होंने चौथा खिताब अपने नाम किया है. 

इसके साथ ही सात्विक-चिराग इस टूर्नामेंट की 2005 में शुरुआत के बाद से इसे जीतने वाले पहले भारतीय बन गए हैं. ये सात्विक और चिराग का 2026 में तीसरा बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर फाइनल था. वो मई में थाईलैंड ओपन में उपविजेता रहे थे और उसी महीने बाद में सिंगापुर ओपन जीता था.

कैसा रहा इस मैच का हाल

इस मुकाबले की बात करें तो, चीन के जी तिंग और रेन शियांग ने शानदार शुरुआत करते हुए 5-0 की बढ़त भारतीय जोड़ी पर बना ली थी. इसके बाद सात्विक और चिराग के खिलाफ चीनी जोड़ी ने पहला गेम 18 मिनट में 21-11 से जीत लिया था. इस मैच के दूसरे गेम में भारतीय जोड़ी ने वापसी करते हुए स्कोर 3-3 और 6-6 से बराबर कर दिया और ब्रेक के समय 11-7 से आगे रहे.

इसके बाद भारतीय जोड़ी ने अपनी बढ़त 17-11 तक पहुंचा दी. भारतीय जोड़ी ने चीनी खिलाड़ियों पर दूसरे गेम में 21-13 से जीत हासिल की. इसके बाद इस मैच का तीसरा गेम भी शानदार रहा. चीनी खिलाड़ी मजबूती से उतरे और 4-0 की बढ़त बना ली. सात्विक-चिराग ने वापसी करते हुए स्कोर 7-7 से बराबर किया और ब्रेक के समय 11-9 की बढ़त बना ली. अंत में भारतीय जोडी ने 21-17 से जीत हासिल की और खिताब अपने नाम किया.

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वनडे में सबसे ज्यादा रन खर्च करने वाले 5 गेंदबाज, 1 के नाम 13000 से ज्यादा रन, विश्व कीर्तिमान 11 साल से बरकरार

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