2029 तक भारत को नशामुक्त बनाएंगे: गृह मंत्री अमित शाह ने किया बड़ा ऐलान, तैयार होंगे 1 लाख 'नशामुक्ति मित्र'
India drug free 2029: केंद्र की मोदी सरकार ने देश को पूरी तरह से नशामुक्त बनाने के लिए वर्ष 2029 का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जिस तरह सरकार ने देश से नक्सलवाद और आतंकवाद के खतरे को खत्म करने के लिए काम किया है, ठीक उसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'विकसित भारत' के सपने को साकार करने के वास्ते देश को नशामुक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए सरकार एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS) और 'माई भारत' (My Bharat) प्लेटफार्मों के माध्यम से एक लाख 'नशामुक्ति मित्रों' (Drug-free India Ambassadors) को प्रशिक्षित करेगी। इसके अलावा, शिक्षा मंत्रालय, युवा मामले और खेल मंत्रालय तथा शैक्षणिक संस्थानों ने मिलकर यह दृढ़ संकल्प लिया है कि सभी शैक्षणिक परिसरों को नशामुक्त बनाया जाएगा।
मार्च 2027 तक हर राज्य में एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स का होगा गठन
एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, गृह मंत्री ने कहा कि क्षमता निर्माण और समन्वय के लिए 100% केंद्रीय सहायता दी जाएगी। हम देश के हर राज्य में मार्च 27 तक पूरी तरह सुसज्जित एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTFs) की स्थापना करेंगे।
We are resolved to build a drug-free India. Addressing a press conference in Goa, on control of narcotics. https://t.co/4NR4XwmhjS
— Amit Shah (@AmitShah) September 6, 2026
गृह मंत्रालय यह सुनिश्चित करने के लिए उचित व्यवस्था करेगा कि फॉरेंसिक रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर उपलब्ध हो जाएं। इसके अलावा, हमने समयबद्ध तरीके से लागू किए जाने वाले पच्चीस से अधिक घटकों और कार्रवाई बिंदुओं को भी तय किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि इस तीन वर्षीय 'नशामुक्त भारत' अभियान में हमें पूरे देश का भरपूर सहयोग मिलेगा।
इस मिशन को सफल बनाने के लिए गृह मंत्रालय और सभी राज्य सरकारें मिलकर काम कर रही हैं। हमारे रोडमैप और विजन डॉक्यूमेंट के चार मुख्य स्तंभ हैं- पहला: खुफिया और ऑपरेशन आधारित प्रवर्तन; दूसरा: प्रीकर्सर रसायनों और सिंथेटिक ड्रग्स पर नियंत्रण; तीसरा: मांग और नुकसान को कम करना; तथा चौथा: क्षमता निर्माण और समन्वय।
100 अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट और 100 भगोड़ों को वापस लाने का लक्ष्य
सरकार ने 100 अंतरराष्ट्रीय और अंतर-राज्यीय नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने तथा नशीली दवाओं के मामलों से जुड़े 100 भगोड़ों को देश वापस लाने का भी महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रीय नीति, खुफिया फ्यूजन, बड़े कार्टेल की जांच और राज्यों के साथ इनपुट साझा करने पर बनी मजबूत नींव का लाभ उठाकर गृह मंत्रालय और एनसीबी (NCB) प्रवर्तन प्रयासों को और तेज करेंगे।
राज्य पुलिस, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स और जिला पुलिस मिलकर सरगनाओं के डोजियर तैयार करेंगे, फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज पर तालमेल बिठाएंगे और व्यावसायिक मात्रा में ड्रग्स से जुड़े हर मामले की वित्तीय जांच करेंगे। इस अवैध कारोबार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वित्तीय ट्रेल की जांच और एयरपोर्ट्स पर सख्त निगरानी
नशामुक्ति के इस अभियान के तहत सरकार ने ड्रग माफियाओं को वापस लाने और उनके वित्तीय लेन-देन (फाइनेंशियल ट्रेल) का पता लगाने के लिए सीबीआई (CBI), ईडी (ED) और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी है।
गृह मंत्री ने कहा कि हम हवाई अड्डों और कार्गो टर्मिनलों पर जोखिम-आधारित प्रोफाइलिंग स्कैनर तैनात करके निगरानी अभियानों को और अधिक धार देंगे।
उन्होंने आगे कहा कि प्रीकर्सर रसायनों और सिंथेटिक ड्रग्स के उत्पादन में शामिल अवैध प्रयोगशालाओं को नष्ट करने में हमें अब तक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। हमने अगले तीन वर्षों में ऐसी 100 प्रयोगशालाओं को ध्वस्त करने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में राजस्व विभाग, केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो, जीएसटीएन (GSTN) और आबकारी विभाग मिलकर सख्त कार्रवाई को अंजाम देंगे।
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