Satya Niketan में पांच मंजिला PG इमारत गिरी, 1 की मौत और कई फंसे
नयी दिल्ली, छह सितंबर दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार अपराह्न छात्रों के ‘पीजी’ के तौर पर इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत ढह गई, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि कई लोग अभी भी मलबे में फंसे हुए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यह इलाका दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के ‘साउथ कैंपस’ के प्रमुख हिस्से के पास स्थित है और यहां की संकरी एवं भीड़भाड़ वाली गलियों में कई छात्रावास तथा भोजनालय हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत करीब 20 साल पुरानी थी और घटना के समय, अपराह्न करीब 1.30 बजे, बेसमेंट में निर्माण कार्य जारी था। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सूत्रों ने बताया कि अस्पताल में लाए गए चार घायलों में से दो की हालत अब भी गंभीर है, जबकि एक को मृत अवस्था में लाया गया था। एक बचावकर्मी को भी अस्पताल लाया गया था, जिसे उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि स्थानीय पुलिसकर्मी, दमकल विभाग, ‘कैट’ एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं मौके पर मौजूद हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीम भी घटनास्थल पर पहुंच गई है और बचाव एवं राहत अभियान जारी है। पुलिस ने एक बयान में बताया कि अपराह्न 1.34 बजे साउथ कैंपस थाने में नानकपुरा गुरुद्वारे के पास एक इमारत ढहने के संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) को सूचना मिली।
बयान में कहा गया, ‘‘मलबे में फंसे या घायल लोगों की सटीक संख्या फिलहाल ज्ञात नहीं है। अब तक कुछ लोगों को मलबे से निकाला गया गया है। पुष्टि होने पर आगे की जानकारी साझा की जाएगी।’’ पुलिस ने बताया कि उन्होंने इमारत के मालिक की पहचान कर ली है और उसे पकड़ने के लिए कई टीम गठित की गई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, ढही हुई इमारत को ‘हॉस्टल डेज’ के नाम से जाना जाता था। घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने अनुमान जताया कि 20 से अधिक लोग मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं, हालांकि इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, एक स्थानीय निवासी ने कहा, ‘‘हॉस्टल हमेशा भरा रहता था।
इसलिए मलबे में अब भी कई लोग फंसे हो सकते हैं। गलियां काफी संकरी और भीड़भाड़ वाली हैं, इसलिए बचाव वाहनों के लिए घटनास्थल पर जल्दी पहुंचना मुश्किल था।।’’ स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने तत्काल बचाव कार्य में मदद शुरू कर दी और मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए हाथों तथा उपलब्ध औजारों से मलबा हटाया। इस संबंध में एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि अगर यह घटना किसी कार्यदिवस पर हुई होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी, क्योंकि आसपास के कई छात्र घर गए हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यहां बहुत कम लोग थे।’’ दिल्ली पुलिस के साथ काम करने वाले स्थानीय निवासी राजेन छेत्री ने बताया कि इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। छेत्री ने कहा, ‘‘यहां रहने वाले ज्यादातर छात्र केरलम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं और मुख्य रूप से मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में पढ़ते हैं। वे प्रति बिस्तर करीब 12,000 रुपये किराया दे रहे थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले 20 वर्षों से यहां रह रहा हूं।
बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था, जहां पानी जमा होने लगा था। नींव भी बेहद कमजोर थी।’’ उन्होंने बताया कि करीब 13 लोगों को बचाया जा चुका है। दिल्ली में शुक्रवार से लगातार बारिश हो रही है।
पिछले 20-22 वर्षों से इलाके में रह रहीं प्रियंका ने कहा, ‘‘यहां इमारतें पांच-छह मंजिल तक बनाई जा रही हैं। कई मकानों को लड़कों के पीजी (पेइंग गेस्ट) में तब्दील कर दिया गया है और मालिक कहीं और चले गए हैं। वे बस संपत्तियों को पीजी का नाम दे देते हैं, किराया ऑनलाइन लेते हैं और इलाके में वापस आकर यह तक नहीं देखते कि स्थिति क्या है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो इमारत ढही है, वह 20 साल से अधिक पुरानी है और इतने वर्षों में मैंने यहां कोई रखरखाव का काम होते नहीं देखा।
पूरा सत्य निकेतन पीजी से भरा हुआ है। मुश्किल से 30 प्रतिशत मकान मालिक ही यहां रहते हैं।’’ प्रियंका ने कहा, ‘‘यहां नालियां और सीवर तक खुले हैं। इमारत के अंदर कई छात्र फंसे हुए थे।
बारिश हो रही थी, इसलिए ज्यादातर छात्र अपने कमरों में थे, जबकि सप्ताहांत के कारण कुछ छात्र घर चले गए थे।’’ पुलिस स्थानीय लोगों और मौके पर मौजूद लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील कर रही है, क्योंकि भीड़ के कारण बचाव कार्य में बाधा आ रही है। एंबुलेंस की आवाजाही सुचारू रखने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक अनिल शर्मा घटनास्थल पर पहुंचे और बताया कि अभी भी लोग मलबे में फंसे हुए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें अंदर फंसे लोगों के फोन भी आ रहे हैं। टीम लगातार अंदर फंसे लोगों के संपर्क में है।
Amit Shah बोले, 2029 तक भारत को Drug Free बनाने का ब्लूप्रिंट तैयार
(फाइल फोटो के साथ) पणजी, छह सितंबर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य है कि नशा-मुक्त युवा शक्ति 2047 में ‘विकसित भारत’ का नेतृत्व करे तथा इस सिलसिले में केंद्र सरकार ने 2029 तक भारत को नशा-मुक्त बनाने के लिए एक प्रारूप तैयार किया है। शाह ने कहा कि विकसित भारत का सपना साकार करने के लिए मोदी सरकार देश को नशा-मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, ठीक वैसे ही जैसे उसने नक्सलवाद और आतंकवाद की समस्या को खत्म करने के लिए काम किया है। उन्होंने कहा कि 2029 तक ‘मादक पदार्थ मुक्त भारत’ के लक्ष्य के तहत केंद्र ने नशीले पदार्थों की तस्करी से लेकर वित्तपोषण एवं पीड़ितों के पुनर्वास तक समूचे मादक पदार्थ नेटवर्क को ध्वस्त करने की समन्वित राष्ट्रव्यापी रणनीति अपनाई है।
शाह ने यहां मादक पदार्थ पर एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करने के बाद प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य है कि नशा-मुक्त युवा शक्ति 2047 में विकसित भारत का नेतृत्व करे।’’ इस बैठक में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, गृह मंत्रालय के अधिकारी एवं राज्य सरकार के सरकारी शामिल हुए। गृह मंत्री ने कहा, ‘‘2014 से पहले मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई अधिकतर छोटी इकाइयों द्वारा और अलग-थलग रहकर लड़ी जाती थीं। एजेंसियां अक्सर छोटे-मोटे आरोपियों को पकड़कर ही संतुष्ट हो जाती थीं।
हमारी सरकार इस लड़ाई को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से प्राथमिकता बना रही है।’’ शाह ने कहा, ‘‘सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खास तौर पर मादक पदार्थ कार्यबल (एएनटीएफ) बनाए गए और स्थानीय पुलिस को राष्ट्रीय रणनीति से जोड़ा गया है।’’ उन्होंने कहा कि 2019 में एक संयुक्त समन्वय समिति भी बनाई गई थी, ताकि केंद्रीय एजेंसियां और राज्य सरकार मिलकर बड़े मादक पदार्थ नेटवर्क, उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्क आदि के खिलाफ संयुक्त निर्णय ले सकें। शाह ने कहा कि सरकार राजनीतिक इच्छाशक्ति, आपसी तालमेल के साथ कानून लागू करने और मादक पदार्थों की लत को रोकने एवं पीड़ितों के पुनर्वास के उपायों के जरिए ‘नशा-मुक्त भारत 2029’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यकाल में, आतंकवाद में कमी आने के बाद जम्मू-कश्मीर प्रगति और विकास की राह पर है तथा वहां आतंकवाद धीरे-धीरे खत्म होने के करीब है।
शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से अलगाववाद की भावना कम हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को बेहतर और मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। जिन लोगों ने तिरुपति से पशुपति तक ‘लाल’ (माओवादी) गलियारा बनाने का सपना देखा था, उन्होंने हथियार डाल दिए हैं और मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं।’’ पूर्वोत्तर का ज़िक्र करते हुए शाह ने कहा कि 2019 से अब तक 14 बड़े शांति समझौते हुए हैं और लगभग 11,000 हथियारबंद युवाओं ने हथियार छोड़कर मुख्यधारा का रास्ता अपनाया है।
शाह ने कहा कि पांच दशकों तक चला नक्सलवाद अब अतीत की बात हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, ‘‘हमने नक्सलवाद को खत्म कर दिया है और मादक पदार्थों की समस्या से भी उसी तरह निपटेंगे।
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