भारत में खेले जाते हैं कौन-कौन से घरेलू टूर्नामेंट? BCCI कैसे तैयार करता है स्टार खिलाड़ी, समझिए पूरा गणित
BCCI Domestic Tournament: इस बात में कोई दोराय नहीं है कि बीसीसीआई इंटरनेशनल खिलाड़ियों के साथ-साथ अपने डोमेस्टिक प्लेयर्स को भी काफी मौके देती है. पूरे साल जहां, टीम इंडिया किसी न किसी टीम के साथ मैच खेलती रहती है, वहीं घरेलू स्तर पर बीसीसीआई के कई टूर्नामेंट्स भी खेले जा रहे होते हैं, जिसमें युवा खिलाड़ी प्रदर्शन करके टीम इंडिया तक का सफर तय करते हैं. अलग-अलग फॉर्मेट में खेले जाने वाले इस इवेंट्स में वह इंटरनेशनल प्लेयर्स भी हिस्सा लेते हैं, जो उस वक्त टीम का हिस्सा नहीं होते या ब्रेक पर होते हैं. जी हां, हर फॉर्मेट के लिए भारत में घरेलू टूर्नामेंट्स खेले जाते हैं. तो आइए इस आर्टिकल में आपको बताते हैं कि भारत में कौन-कौन से डोमेस्टिक टूर्नामेंट खेले जाते हैं...
रणजी ट्रॉफी
रणजी ट्रॉफी भारत का सबसे अहम और प्रमुख घरेलू फर्स्ट-क्लास क्रिकेट प्रतियोगिता है. इसकी शुरुआत 1934-35 में हुई थी. टूर्नामेंट का पहला मुकाबला 4 नवंबर 1934 को मद्रास और मैसूर के बीच खेला गया था. शुरुआत में इसका नाम ‘क्रिकेट चैंपियनशिप ऑफ इंडिया’ था, लेकिन 1935-36 से इसका नाम महान भारतीय क्रिकेटर सर रंजीतसिंहजी (रणजी) के सम्मान में रणजी ट्रॉफी रखा गया.
इस प्रतियोगिता में भारत के अलग-अलग राज्यों और क्रिकेट संघों की टीमें हिस्सा लेती हैं. रणजी ट्रॉफी से कई दिग्गज खिलाड़ियों ने भारतीय टीम तक का सफर तय किया है. मुंबई इस टूर्नामेंट की सबसे सफल टीम है, जिसने रिकॉर्ड 42 बार खिताब जीता है. मुंबई ने 1958-59 से 1972-73 तक लगातार 15 खिताब भी जीते थे. 2025-26 सीजन में जम्मू-कश्मीर ने पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीता, जबकि कर्नाटक 8 खिताब के साथ दूसरी सबसे सफल टीम है.
दलीप ट्रॉफी
दलीप ट्रॉफी भारत की मुख्य फर्स्ट-क्लास क्रिकेट प्रतियोगिताओं में से एक है. इसकी शुरुआत 1961-62 सीजन में हुई थी., जिसका नाम महान भारतीय क्रिकेटर कुमार श्री दलीपसिंहजी के सम्मान में रखा गया था. वह रणजी के भतीजे थे और इंग्लैंड के लिए टेस्ट क्रिकेट भी खेल चुके थे. शुरुआत में टूर्नामेंट में भारत के अलग-अलग जोन की टीमें हिस्सा लेती थीं और इसे नॉकआउट आधार पर खेला जाता था. बाद में इसके फॉर्मेट में कई बदलाव किए गए.
दलीप ट्रॉफी के इतिहास में वेस्ट जोन सबसे सफल टीम है. उसने अब तक 19 बार खिताब जीता है. टूर्नामेंट में नॉर्थ, साउथ, ईस्ट और सेंट्रल जोन जैसी टीमें भी प्रमुख रूप से हिस्सा लेती रही हैं. यह टूर्नामेंट भारतीय क्रिकेट में प्रतिभाओं को पहचानने और खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम के लिए तैयार करने का अहम मंच माना जाता है.
The captains are ready ????????
— BCCI Domestic (@BCCIdomestic) September 6, 2026
The teams are ready ????????
Let's go ????#DuleepTrophy | #EZvSZ pic.twitter.com/5ysM6ZIrEv
ईरानी कप
भारत के मुख्य डोमेस्टिक टूर्नामेंट्स में ईरानी कप का नाम भी शुमार है. ये एक भारत की एक प्रतिष्ठित फर्स्ट क्लास क्रिकेट प्रतियोगिता है. इसकी शुरुआत 1959-60 सीजन में रणजी ट्रॉफी के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हुई थी. इस टूर्नामेंट का नाम बीसीसीआई के लंबे समय तक कोषाध्यक्ष और अध्यक्ष रहे जाल आर. ईरानी Z. R. Irani के नाम पर रखा गया.
यह वार्षिक मुकाबला मौजूदा रणजी ट्रॉफी विजेता और भारत के अन्य राज्यों के चुनिंदा खिलाड़ियों से बनी 'शेष भारत' (Rest of India - ROI) टीम के बीच खेला जाता है. पांच दिनों तक चलने वाले इस मैच को जीतने वाली टीम चैंपियन बनती है. इतिहास की बात करें तो शेष भारत (ROI) ने सबसे ज्यादा 30 बार यह खिताब जीता है. वहीं, घरेलू राज्य टीमों में मुंबई सबसे सफल टीम है, जिसने 15 बार ईरानी कप पर कब्जा किया है. यह टूर्नामेंट युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ताओं के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का एक बेहतरीन मंच प्रदान करता है.
विजय हजारे ट्रॉफी
विजय हजारे ट्रॉफी भारत की एक प्रमुख घरेलू सीमित ओवरों की क्रिकेट प्रतियोगिता है. इसकी शुरुआत सीजन 1993-94 में 'रणजी वनडे ट्रॉफी' के रूप में हुई थी, जिसे साल 2002-03 में एक राष्ट्रीय नॉकआउट टूर्नामेंट का रूप दिया गया. इसके बाद साल 2007 में भारत के महान और दिग्गज क्रिकेटर विजय हजारे के सम्मान में इसका नाम बदलकर 'विजय हजारे ट्रॉफी' रख दिया गया. विजय हजारे वही कप्तान थे जिनकी अगुवाई में भारत ने 1952 में अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की थी.
इस टूर्नामेंट का आयोजन बीसीसीआई द्वारा किया जाता है, जिसमें रणजी ट्रॉफी की सभी 38 टीमें हिस्सा लेती हैं. इतिहास की बात करें तो राष्ट्रीय नॉकआउट दौर के बाद से तमिलनाडु और कर्नाटक ने सबसे ज्यादा 5-5 बार यह प्रतिष्ठित खिताब जीता है. टूर्नामेंट के नवीनतम 2025-26 संस्करण की विजेता विदर्भ की टीम रही है.
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी भारत की T20 फॉर्मेट वाली प्रतियोगिता है. इसकी शुरुआत सीजन 2006-07 में 'इंटर-स्टेट ट्वेंटी-20 टूर्नामेंट' के नाम से हुई थी. बाद में साल 2010 में BCCI ने इसका नाम बदलकर 'सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी' रख दिया. यह नाम भारत के महान और दिग्गज क्रिकेटर सैयद मुश्ताक अली के सम्मान में रखा गया, जिन्होंने 1936 में इंग्लैंड के खिलाफ विदेशी धरती पर टेस्ट शतक लगाने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया था.
इस वार्षिक टूर्नामेंट में रणजी ट्रॉफी की सभी 38 टीमें भाग लेती हैं. आईपीएल नीलामी से ठीक पहले होने के कारण युवाओं के लिए यह सबसे महत्वपूर्ण मंच है. इतिहास की बात करें तो तमिलनाडु इस टूर्नामेंट की सबसे सफल टीम है, जिसने सबसे ज्यादा 3 बार यह खिताब जीता है. टूर्नामेंट के हालिया 2025-26 संस्करण की चैंपियन झारखंड की टीम रही, जिसने ईशान किशन की कप्तानी में पहली बार यह ट्रॉफी उठाई.
सीनियर वुमेन्स टूर्नामेंट में मुख्य रूप से दो टूर्नामेंट शामिल हैं:-
सीनियर महिला वन-डे ट्रॉफी: यह 50-50 ओवर का फॉर्मेट है, जहां विभिन्न राज्यों की टीमें घरेलू स्तर पर प्रतिस्पर्धा करती हैं. सीनियर महिला टी20 ट्रॉफी: यह फटाफट क्रिकेट का रोमांचक फॉर्मेट है, जो खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम और विमेंस प्रीमियर लीग (WPL) के लिए तैयार करता है. इंटर-जोनल टूर्नामेंट के तहत अलग-अलग जोन (जैसे नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट, सेंट्रल, नॉर्थ-ईस्ट) के बीच मुकाबले होते हैं. इसमें सीनियर महिला मल्टी-डे ट्रॉफी और वनडे अंतर-क्षेत्रीय ट्रॉफी शामिल हैं, जो खिलाड़ियों के धैर्य और तकनीकी कौशल को निखारती हैं.
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