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दलीप ट्रॉफी जीतने वाली टीम को मिलेंगे इतने करोड़ रुपये, तो हारने वाली टीम पर भी होगी पैसों की बारिश, जानिए कितनी है प्राइज मनी?

Duleep Trophy 2026 Prize Money: दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मैच ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन और तिलक वर्मा की कप्तानी वाली साउथ जोन के बीच खेला जा रहा है. चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जा रहा है. इस मुकाबले में टॉस जीतकर ईस्ट जोन ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया है. जहां, ईस्ट जोन के बल्लेबाजों की ओर से अच्छा प्रदर्शन देखने को मिल रहा है. अब सवाल उठता है कि दलीप ट्रॉफी जीतने वाली टीम को प्राइज मनी के रूप में कितने करोड़ रुपये मिलने वाले हैं. आइए इस आर्टिकल में आपको इस बारे में बताते हैं...

दलीप ट्रॉफी 2026 में आमने-सामने हैं ईस्ट जोन और साउथ जोन की टीम

दलीप ट्रॉफी 2026 का फाइनल मुकाबला ईशान किशन की ईस्ट जोन और तिलक वर्मा की कप्तानी वाली साउथ जोन की टीम के बीच खेला जा रहा है. इस मैच पर हर किसी की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इसमें कई बड़े खिलाड़ी खेल रहे हैं.

वैभव सूर्यवंशी पर एक बार फिर सभी का फोकस है, क्योंकि 15 साल की उम्र में ये खिलाड़ी अपने प्रदर्शन से अपनी टीम के लिए अहम रन जोड़ने की काबिलियत रखता है. वहीं, ईशान किशन, तिलक वर्मा, मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज जैसे खिलाड़ी भी एक्शन में नजर आएंगे. बता दें, ईस्ट जोन की टीम ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने का फैसला किया है. (खबर लिखे जाने तक) ईस्ट जोन का स्कोर 246/4 हो गया है.

कितनी मिलेगी प्राइज मनी?

बीसीसीआई अपने घरेलू इवेंट्स में जीतने वाली टीमों को प्राइज मनी के रूप में मोटी रकम देता है. ऐसे में अभी जारी दलीप ट्रॉफी जीतने वाली टीम को प्राइज मनी के रूप में 1 करोड़ रुपये मिलेंगे. जबकि रनरअप टीम पर भी पैसों की बारिश होगी और उसे भी 50 लाख रुपये मिलेंगे. अब देखने वाली बात होगी कि कौन सी टीम जीतती है और एक करोड़ रुपये ईनाम अपने नाम करती है और किस टीम के नाम 50 लाख रुपये होंगे.

साउथ जोन और ईस्ट जोन ने कितनी बार जीती हैं दलीप ट्रॉफी?

साउथ जोन की टीम ने अब तक दलीप ट्रॉफी के इतिहास में 14 बार विजेता (2 बार संयुक्त विजेता सहित) ट्रॉफी जीती है. वहीं, 25 बार फाइनल तक का सफर तय किया है. ईस्ट जोन की टीम की बात करें, तो इस टीम ने 2 बार विजेता (2011-12 और 2012-13 सीजन में) ट्रॉफी उठाई है और 7 बार फाइनल खेला.

ऐसी हैं दोनों टीमें

ईस्ट जोन की टीम: अभिमन्यु ईश्वरन, वैभव सूर्यवंशी, कुमार कुशाग्र, सुदीप कुमार घरामी, विराट सिंह, ईशान किशन (विकेटकीपर/कप्तान), अनुकूल रॉय, मोहम्मद कौनैन कुरैशी, मोहम्मद शमी, अभिजीत के सरकार, मुकेश कुमार, सुभ्रांशु सेनापति, शाहबाज़ अहमद, डेनिश दास, शिखर मोहन, सूरज सिंधु जयसवाल

साउथ जोन की टीम: रिकी भुई, नारायण जगदीसन (विकेटकीपर), देवदत्त पडिक्कल, तिलक वर्मा (कप्तान), स्मरण रविचंद्रन, कोडिमेला हिमातेजा, श्रेयस गोपाल, तनय त्यागराजन, वैधवथ कावरप्पा, एमडी निधिश, मोहम्मद सिराज, शेख रशीद, कवुरी सैतेजा, करुण नायर, अमन खान, त्रिपुराना विजय, अभिनव तेजराना

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Uttarakhand Elections 2027: उत्तरकाशी की 3 सीटों पर बिछी सियासी बिसात, दावेदारों की धड़कनें तेज

Uttarakhand Elections 2027: उत्तराखंड समेत देश के सात राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. उत्तराखंड में साल की शुरुआत में ही विधानसभा चुनाव होंगे. ऐसे में सभी राजनीतिक दलों ने अभी से चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. साथ ही सभी पार्टियों के दावेदारों की भी धड़कनें तेज हो गई हैं कि उन्हें इस बार पार्टी चुनावी मैदान में उतारेगी या उनकी टिकट करेगी.

इस चुनावी सीजन में हम आपको उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले की सभी सीटों का हाल बताने जा रहे हैं. यहां मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही होगा. क्योंकि उत्तरकाशी जिले की तीन में से दो सीटों पर अभी बीजेपी का कब्जा है. जबकि एक सीट निर्दलीय उम्मीदवार के पास है. जबकि कांग्रेस के पास जनपद में कोई सीट नहीं है. तो चलिए सबसे पहले बात करते हैं उत्तरकाशी के ऐतिहासिक महत्व वहां की पृष्ठभूमि के बारे में......

गढ़वाल की ऐतिहासिक धरोहर उत्तरकाशी

उत्तरकाशी को उत्तराखंड का मस्तक और मां गंगा और यमुना का उद्गम स्थल माना जाता है. इसीलिए उत्तरकाशी जिला धार्मिक, आध्यात्मिक और सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माना जाता है. अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर जनपद में सियासी सरगर्मियां अभी से तेज होने लगी हैं. साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी रणनीति बनाना भी शुरू कर दी है.

बता दें कि उत्तरकाशी पवित्र गंगोत्री व यमुनोत्री धाम, ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ मंदिर, नेलांग घाटी के अद्भुत नजारों और पर्वतारोहण के वैश्विक केंद्र नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) के लिए मशहूर है. यहां की राजनीति में चारधाम यात्रा प्रबंधन, आपदा राहत व पुनर्वास, सेब बागवानों के हित, टनल और ऑल वेदर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य सुविधाएं और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दे हमेशा केंद्र में रहे हैं. इस बार भी जनपद में इन्हीं मुद्दों पर चुनाव होगा.

बीजेपी-कांग्रेस के साथ निर्दलीयों का भी दबदबा

वहीं जिले के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो यहां राष्ट्रीय दलों- बीजेपी और कांग्रेस के अलावा स्थानीय क्षत्रपों और निर्दलीय प्रत्याशियों का भी खासा दबदबा रहा है. 2022 में हुए विधानसभा चुनाव में जिले की 3 सीटों में से 2 सीटों पर बीजेपी (BJP) ने जीत हासिल की थी, जबकि 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी ने दोनों प्रमुख दलों को पछाड़ते हुए परचम लहराया था. ऐसे में 2027 के चुनाव में बीजेपी के सामने अपना प्रभुत्व बनाए रखने और कांग्रेस के लिए इस सीमांत जिले में अपनी खोई सियासी जमीन फिर से हासिल करने की कड़ी चुनौती होगी.

उत्तरकाशी की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामरिक पहचान

उत्तरकाशी को स्कंद पुराण में 'सौम्य काशी' कहा गया है, सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक आंदोलनों और समृद्ध परंपराओं के लिए भी जाना जाता है. उत्तरकाशी कभी टिहरी रियासत का हिस्सा रहा और जिसने 30 मई 1930 को तिलाड़ी के मैदान में वन अधिकारों की रक्षा के लिए हुए ऐतिहासिक 'रवांई जनआंदोलन' (तिलाड़ी कांड) की शहादत देखी. मां गंगा (भागीरथी) और यमुना के उद्गम स्थलों को समेटे यह जिला तिब्बत सीमा से सटा होने के कारण देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का मजबूत प्रहरी भी है.

उत्तरकाशी की पहचान गंगोत्री-यमुनोत्री धाम के दर्शन, मुखबा और खरसाली के शीतकालीन प्रवास, रवांई घाटी की अनोखी मंगसीर बग्वाल, सेलकु मेला, पांडव नृत्य और दयारा बुग्याल जैसी अनुपम धरोहरों से है, लेकिन इस आध्यात्मिक वैभव के बीच, उत्तरकाशी नगर के बाड़ाहाट बाजार से लेकर रवांई घाटी के बड़कोट, पुरोला, मोरी और आराकोट के सेब अंचलों तक यहां की सियासत का अपना एक अलग अंदाज है.

उत्तरकाशी की कुल आबादी और साक्षरता दर

श्रेणी / विवरण कुल आंकड़े पुरुष महिला
कुल जनसंख्या 3,30,086 1,68,597 1,61,489
साक्षरता दर (%) 75.81% 88.79% 62.35%
कुल साक्षर आबादी 2,15,126 1,28,237 86,889
शिशु जनसंख्या (0–6 आयु वर्ग) 46,307 24,165 22,142

उत्तरकाशी की कुल धार्मिक आबादी

धर्म जनसंख्या प्रतिशत (%)
हिंदू 3,24,859 98.42%
मुस्लिम 3,554 1.08%
बौद्ध 563 0.17%
ईसाई 353 0.11%
सिख 167 0.05%
जैन 74 0.02%
अन्य धर्म 105 0.03%
धर्म उल्लेख नहीं  411 0.12%
कुल आबादी 3,30,086 100.00%

कैसा रहा 2022 विधानसभा चुनाव में उत्तरकाशी की सभी सीटों पर रिजल्ट?

विधानसभा सीट उम्मीदवार पार्टी प्राप्त मत स्थिति
1. पुरोला (SC) दुर्गेश्वर लाल BJP 27,856 विजेता (6,296 मतों से)
मालचंद INC 21,560 उपविजेता
प्रकाश कुमार AAP 538 पराजित
राम प्रसाद RLP 495 पराजित
2. यमुनोत्री संजय डोभाल निर्दलीय  22,952 विजेता (6,639 मतों से)
दीपक बिजल्वाण INC 16,313 उपविजेता
केदार सिंह रावत BJP 10,620 तीसरे स्थान पर
मनोज कोहली श्याम AAP 583 पराजित
3. गंगोत्री सुरेश सिंह चौहान BJP 29,619 विजेता (8,029 मतों से)
विजयपाल सिंह सजवाण INC 21,590 उपविजेता
कर्नल अजय कोठियाल AAP 6,161 तीसरे स्थान पर
नवनीत उनियाल निर्दलीय (IND) 476 पराजित

गंगोत्री विधानसभा सीट पर बीजेपी ने दर्ज की थी जीत

बता दें कि गंगोत्री सीट को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में एक मिथक वर्षों से चला आ रहा है- "जिस पार्टी का प्रत्याशी गंगोत्री से जीतता है, प्रदेश में सरकार उसी दल की बनती है." 2002 से लेकर 2022 तक हर चुनाव में यह मिथक सटीक साबित हुआ है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुरेश सिंह चौहान ने कांग्रेस के दिग्गज व पूर्व विधायक विजयपाल सिंह सजवाण को 8,029 मतों के बड़े अंतर से हराया था.

अगर 2027 के समीकरण की बात करें तो भागीरथी घाटी में स्थित इस सीट पर चारधाम यात्रा का नियमन, सिलक्यारा टनल जैसी मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं, वरुणावत पर्वत से जुड़े सुरक्षा कार्य और आपदा विस्थापन मुख्य विषय हैं. बीजेपी इस सीट पर अपनी जीत की परंपरा बनाए रखने की कोशिश करेगी, जबकि कांग्रेस वापसी की उम्मीद में संगठन को धार दे रही है.

यमुनोत्री विधानसभा सीट पर बीजेपी-कांग्रेस को निर्दलीय ने दी थी मात

वहीं यमुनोत्री सीट का इतिहास बताता है कि यहां दलगत निष्ठा से ज्यादा उम्मीदवार का व्यक्तिगत प्रभाव, स्थानीय रिश्तेदारी और रवांई क्षेत्र की गोलबंदी काम करती है. यही वजह है कि यहां निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों के प्रत्याशी अक्सर बाजी मारते रहे हैं. 2022 के विधानसभा चुनाव में भी इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी संजय डोभाल ने बीजेपी के केदार सिंह रावत और कांग्रेस दोनों को पछाड़कर 22,952 वोट हासिल कर शानदार जीत दर्ज की थी.

वहीं 2027 के समीकरण की बात करें तो यमुनोत्री धाम के लिए प्रस्तावित रोपवे प्रोजेक्ट, खरसाली व बड़कोट क्षेत्र में ट्रामा सेंटर व स्वास्थ्य सेवाओं की मांग, और यमुना घाटी के सेब-सब्जी उत्पादकों की समस्याएं यहां के मुख्य मुद्दे हैं. आगामी चुनाव में निर्दलीय प्रभाव को थामना दोनों राष्ट्रीय दलों के लिए बड़ी चुनौती होगी.

पुरोला विधानसभा सीट- SC बीजेपी-कांग्रेस के बीच मुकाबला

वहीं टोंस और कमल नदी घाटी में फैली यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. जौनसार-बावर और हिमाचल की सीमा से सटे होने के कारण यहां का सामाजिक व राजनीतिक ताना-बाना बेहद अनूठा है. यहां भी लंबे समय से कांग्रेस और बीजेपी के बीच मुकाबला रहा है. 2022 के चुनाव में बीजेपी के दुर्गेश्वर लाल ने कांग्रेस के प्रत्याशी मालचंद को 6,296 मतों के अंतर से मात दी थी.

अगर 2027 के समीकरण की बात करें तो आराकोट और मोरी जैसे सेब बेल्ट में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज व पैकेजिंग प्लांट का अभाव, सुदूरवर्ती गांवों में पक्की सड़कों की मांग और स्थानीय वन अधिकार यहां के प्रमुख विषय हैं. स्थानीय स्तर पर युवाओं के बीच बढ़ती राजनीतिक चेतना 2027 में नए समीकरण बना सकती है.

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