केरल के Kaipamangalam हादसे पर Suresh Gopi ने NHAI को दी सख्त चेतावनी
त्रिशूर, छह सितंबर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कैपामंगलम जैसी दुर्घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की अपील करते हुए रविवार को कहा कि एक-दूसरे पर दोष मढ़ने से कोई फायदा नहीं होगा। इस हादसे में तमिलनाडु के आठ लगों की मौत हो हो गई थी। यह हादसा शुक्रवार देर रात डिंडिगुल जिले के एक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों समेत आठ लोगों को ले जा रही एक कार के कैपामंगलम के पनम्बिक्कुन्नु में राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड़ी एक लॉरी के पिछले हिस्से से टकरा जाने से हुआ।
त्रिशूर से लोकसभा सदस्य गोपी ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि सभी संबंधित पक्षों से गलतियां हुई हैं और उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग के उन हिस्सों पर सुरक्षित यातयात सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित किया जहां अब भी निर्माण कार्य जारी है। गोपी ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को ‘सख्त’ चेतावनी दी गई है और इस मामले को सार्वजनिक मुद्दा बनाने की कोई जरूरत नहीं थी। मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक रूप से बोलना वास्तव में जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है।
उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए अधिकारियों या दूसरों पर दोष नहीं मढ़ना चाहिए। गोपी ने कहा कि जहां भी सड़क का काम पूरा हो गया है, वहां वाहनों को सुरक्षित रूप से गुजरने देने के लिए सही डायवर्ज़न की व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि कैपामंगलम में, जहां हादसा हुआ है वहां पर आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था।
हादसे के बाद, मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और खेल मंत्री ओ.जे. जनीश ने एनएचएआई के समक्ष केरलम में राष्ट्रीय राजमार्ग के कुछ हिस्सों पर बार-बार होने वाले हादसों को लेकर चिंता जताई। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केरलम इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने हालांकि मामले में एनएचएआई और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने को लेकर केरलम के मंत्रियों की आलोचना की।
HHRC ने चिकित्सा लापरवाही मामलों में अपीलीय व्यवस्था बनाने के दिए निर्देश
चंडीगढ़, छह सितंबर हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने इलाज में लापरवाही के मामलों की निगरानी करने वाले जिला बोर्ड के निष्कर्षों से असंतुष्ट लोगों के लिए स्पष्ट, स्वतंत्र और प्रभावी अपीलीय व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया है। आयोग ने कहा कि केवल जिला स्तर पर शिकायतों की जांच के लिए व्यवस्था होना पर्याप्त नहीं है। इसने कहा, ‘‘यदि कोई व्यक्ति चिकित्सा लापरवाही के मामलों की निगरानी करने वाले जिला बोर्ड की राय या निष्कर्ष से असंतुष्ट है, तो उसके पास किसी उच्च या स्वतंत्र प्राधिकरण के समक्ष उसे चुनौती देने के लिए प्रभावी कानूनी उपाय उपलब्ध होना चाहिए।’’ ये निर्देश एक शिकायत पर पारित आदेश में दिए गए।
इस मामले की सुनवाई हरियाणा मानवाधिकार आयोग की पूर्ण पीठ ने की, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा, न्यायिक सदस्य कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया शामिल थे। अपने पहले के आदेश का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए एक स्पष्ट और संहिताबद्ध कानूनी ढांचे की तत्काल जरूरत है। आयोग ने कहा कि वैधानिक नियमों और स्पष्ट दिशानिर्देशों के अभाव में जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड के निष्कर्षों से असंतुष्ट व्यक्ति के पास कोई स्पष्ट कानूनी उपाय या अपील का रास्ता नहीं रह जाता है।
आयोग ने 27 अगस्त के अपने आदेश में कहा कि राज्य सरकार को उचित नियम और दिशानिर्देश बनाने चाहिए, ताकि बोर्ड के निष्कर्षों को चुनौती दिए जाने की स्थिति में शिकायत के समाधान के लिए एक व्यवस्थित और प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध हो सके। आयोग ने स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक की इस आशंका को भी खारिज कर दिया कि राज्य स्तर पर अपीलीय प्राधिकरण के गठन से समानांतर कार्यवाही शुरू हो सकती है। इसने स्पष्ट किया कि इससे समानांतर नहीं, बल्कि फैसले की क्रमिक समीक्षा के चरण बनेंगे।
आयोग ने कहा, ‘‘अपीलीय व्यवस्था तभी प्रभावी होगी, जब कोई असंतुष्ट व्यक्ति जिला बोर्ड के निष्कर्षों को चुनौती देने का विकल्प चुनता है।’’ एचएचआरसी के सहायक रजिस्ट्रार पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग की पूर्ण पीठ के आदेश के अनुसार वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को अगली सुनवाई की तारीख पर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से हरियाणा मानवाधिकार आयोग के समक्ष अपना-अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग के समक्ष प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।
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