हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर विवाद:वित्त मंत्री बोले- तय प्रक्रिया नहीं मानी, पंजाब की अनदेखी हुई; इमरजेंसी कैबिनेट मीटिंग बुलाई
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के पद पर जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। रविवार को जालंधर में वित्त मंत्री हरपाल चीमा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि इस नियुक्ति में तय मानक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। पंजाब तथा पंजाबियों के हितों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से की गई इस नियुक्ति प्रक्रिया में स्थापित परंपराओं और प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया है। उन्होंने कहा कि जब भी उच्च न्यायालयों में इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां होती हैं, तो क्षेत्रीय संतुलन और तय प्रक्रियाओं का ध्यान रखा जाता है। हालांकि, इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से पंजाब की अनदेखी की गई, जिससे पंजाब के लोगों और कानूनी बिरादरी में रोष व्याप्त है। इसको लेकर आज शाम 4 बजे कैबिनेट मीटिंग बुलाई गई है। हालांकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से इसको लेकर अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मंत्री हरपाल चीमा का अहम बातें… जीएस संधावालिया की अपॉइंटमेंट को होल्ड किया था उन्होंने कहा कि कल जो पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति हुई है, उसमें जो प्रोसीजर पहले अडॉप होता था उसे अडॉप करने में भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार फेल हुई है। जब पंजाब में जन्मे जीएस संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया था, तो उस समय मध्य प्रदेश के चीफ जस्टिस ने उनकी अपॉइंटमेंट को दो महीने से ज्यादा होल्ड करके रखा। केंद्र ने तय प्रोसीजर नहीं अपनाया उन्होंने कहा कि इस पर कोई डिसीजन नहीं दिया और इसके बाद दोबारा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और उनके कॉल्जियम ने उनकी नई नियुक्ति हिमाचल प्रदेश में की। 2 हफ्ते पहले जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की अपॉइंटमेंट का मामला सामने आया। केंद्र सरकार ने प्रोसीजर फॉलो किए बिना उनकी बतौर चीफ जस्टिस अपॉइंटमेंट कर दी। हम खबर को अपडेट कर रहे हैं…
कर्मचारियों का सवाल- क्या ISRO रॉकेट नहीं बनाएगा?:9 संगठनों ने प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा; कांग्रेसी बोली- मोदी सरकार ये जानबूझकर कर रही
ISRO के नौ कर्मचारी संगठनों ने स्पेस एजेंसी के चेयरपर्सन वी. नारायणन को पत्र लिखकर प्राइवेटाइजेशन पर स्पष्टीकरण मांगा है। यह लेटर 4 सितंबर को लिखा गया। जानकारी आज सामने आई है। कर्मचारियों ने लेटर में ISRO की मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल काम निजी कंपनियों को सौंपने की प्रस्तावित योजना पर आधिकारिक जवाब मांगा है। संगठनों ने भविष्य की भूमिका, मौजूदा कर्मचारियों पर असर और आगे होने वाली भर्ती को लेकर भी सवाल उठाए हैं। यह पत्र 21 अगस्त को IN-SPACe चेयरपर्सन पवन गोयनका की टिप्पणी के बाद लिखा गया है। IN-SPACe निजी क्षेत्र की अंतरिक्ष गतिविधियों को बढ़ावा देने, मंजूरी देने और उनकी निगरानी का काम करता है। एक कार्यक्रम में गोयनका ने कथित तौर पर कहा था, “आखिरकार, ISRO कोई लॉन्च व्हीकल नहीं बनाएगा और न ही किसी लॉन्च व्हीकल का निर्माण करेगा। यह सब निजी क्षेत्र या PSU करेगा।” कर्मचारी संगठन बोला- ISRO को सिर्फ रिसर्च एंड डेवलपमेंट तक सीमित न किया जाए कर्मचारी संगठनों ने कहा कि तय व्यावसायिक कामों में निजी कंपनियों की भागीदारी हो सकती है, लेकिन ISRO मजबूत और सरकारी स्वामित्व वाला संगठन बना रहना चाहिए। लेकिन बिना चर्चा के ऐसी नीति स्वीकार नहीं की जा सकती, जिसमें ISRO को केवल सीमित रिसर्च एंड डेवलपमेंट (RD) संस्था तक सीमित कर दिया जाए। और देश के लॉन्च व्हीकल बनाने तथा लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर चलाने का काम सार्वजनिक क्षेत्र से बाहर चला जाए। ----------------------
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