एपीपीयू ने विनय प्रकाश सिंह को लगातार दूसरी बार महासचिव के तौर पर चुना
भारतीय डाक सेवा के 1988 बैच के अधिकारी विनय प्रकाश सिंह को एशिया-पैसिफिक पोस्टल यूनियन (एपीपीयू) का लगातार दूसरी बार चार साल के कार्यकाल के लिए महासचिव से चुना गया है. उन्हें 4 सितंबर को बैंकॉक में आयोजित 14वीं एपीपीयू कांग्रेस में सर्वसम्मति से निर्विरोध चुना गया.
जनवरी 2027 से शुरू होगा दूसरा कार्यकाल
विनय प्रकाश सिंह का दूसरा कार्यकाल जनवरी 2027 से शुरू होगा और दिसंबर 2030 तक चलेगा. उनका दोबारा चुना जाना एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में उनके नेतृत्व पर पोस्टल एडमिनिस्ट्रेशन के भरोसे और आम सहमति को दिखाता है. यह अंतरराष्ट्रीय पोस्टल सहयोग में भारत के योगदान की भी एक अहम पहचान है. यह दोबारा चुनाव ऐसे समय में हुआ है जब एपीपीयू एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में डाक सहयोग को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है.
32 सदस्य देशों का अंतर सहकारी संगठन है APPU
यह संघ 32 सदस्य देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है, जिसका मुख्यालय बैंकॉक में है. यह संयुक्त राष्ट्र की डाक क्षेत्र के लिए विशेष एजेंसी, यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) के क्षेत्रीय संघ के रूप में कार्य करता है. विनय प्रकाश सिंह 2022 में 13वीं एपीपीयू कांग्रेस में पहली बार चुने जाने गए. जनवरी 2023 में पद संभालने के बाद से विनय प्रकाश सिंह ने डाक प्रशासनों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने और पूरे क्षेत्र में डाक सेवाओं के विकास व आधुनिकीकरण में मदद करने में योगदान दिया है. माना जा रहा है कि उनका दूसरा कार्यकाल क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने और डाक क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का और अवसर प्रदान करेगा.
भारत सरकार में कई वरिष्ठ पदों पर कर चुके हैं काम
तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में विनय प्रकाश सिंह ने भारत सरकार में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया है, जिनमें डाक सेवा बोर्ड के सदस्य, डाक विभाग में वरिष्ठ उप महानिदेशक और मुख्य सतर्कता अधिकारी, उत्तर प्रदेश सर्कल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल और इंडिया पोस्ट मुख्यालय में मुख्य महाप्रबंधक शामिल हैं.
उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग, अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और सेना डाक सेवा कोर में भी कार्य किया है. एक प्रख्यात शिक्षाविद के रूप में उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से प्रबंधन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है.
स्रोत- आईएएनएस
सहारनपुर में मस्जिद गिराने के बाद जमीन से निकला पुराना कुआं, प्रशासन ने शुरू कराई जांच
Saharanpur Mosque Demolition: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय एक नया और दिलचस्प मोड़ आ गया जब एक अवैध धार्मिक ढांचे के ध्वस्तीकरण के बाद मलबा हटाने के दौरान जमीन के नीचे से एक पुराना कुआं बरामद हुआ. एसडीएम सदर सुबोध कुमार ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि यह संपूर्ण कार्रवाई माननीय न्यायालय के सख्त आदेशों के तहत पूरी की गई थी.
मस्जिद के गिराए जाने के बाद जब वहां पड़े मलबे को साफ किया जा रहा था, तब जमीन के भीतर ईंटों से बनी हुई एक प्राचीन संरचना नजर आई, जो प्रथम दृष्टया एक कुआं प्रतीत होती है. प्रशासन ने एहतियात के तौर पर फिलहाल उस कुएं को ढक दिया है और अब विभिन्न तकनीकी एवं पुरातत्व से जुड़ी संबंधित एजेंसियां इसकी गहराई और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की जांच करने में जुट गई हैं, जिसके बाद ही इसके वास्तविक स्वरूप और इतिहास की पूरी तस्वीर साफ हो पाएगी.
अवैध मस्जिद को किया गया जमींदोज
जिला प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अवैध मस्जिद को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया और उस खाली पड़ी भूमि को बिल्कुल समतल कर दिया है. प्रशासन की सख्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मस्जिद के मलबे को कलेक्ट्रेट परिसर में बिल्कुल भी नहीं रहने दिया गया, बल्कि उसे तुरंत वहां से लगभग दस किलोमीटर दूर ले जाकर डंप किया गया. कलेक्ट्रेट परिसर से मलबे की एक-एक ईंट को पूरी तरह से हटा दिया गया है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या विवाद की गुंजाइश न बचे. हालांकि, इस ध्वस्तीकरण के ठीक बीचों-बीच कुआं निकल आने के बाद से स्थानीय प्रशासन और खुफिया एजेंसियां और अधिक सतर्क हो गई हैं तथा पूरे इलाके में पुलिस बल को तैनात रखा गया है ताकि कानून और शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम रहे.
#WATCH | Saharanpur, Uttar Pradesh: A well has been discovered at the demolition site where a mosque inside the Saharanpur Collectorate was demolished yesterday.
— ANI (@ANI) September 6, 2026
SDM Sadar Subodh Kumar stated that technical teams and concerned agencies will investigate to determine the scale… https://t.co/YKwKgKQeCj pic.twitter.com/YC2oHUSGlz
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प्रशासन ने मस्जिद को दिया था सील करने का आश्वासन
इस पूरी कार्रवाई के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत पूरी तरह से गरमा गई है और समाजवादी पार्टी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के विशेष निर्देश पर समाजवादी पार्टी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल सच्चाई का पता लगाने और जमीनी हकीकत जानने के लिए रविवार को सहारनपुर पहुंच रहा है. सपा नेताओं का आरोप है कि प्रशासन ने पहले मस्जिद को केवल सील करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बावजूद इसे बुलडोजर से ढहा दिया गया. सहारनपुर पहुंचने के बाद यह प्रतिनिधिमंडल राज्य के कमिश्नर यानी मंडलायुक्त से मुलाकात करेगा और इस पूरे प्रकरण से जुड़ी विस्तृत जानकारी हासिल करने के बाद अपनी एक रिपोर्ट सीधे पार्टी के प्रदेश कार्यालय को सौंपेगा, जिसे लेकर प्रशासनिक हलकों में भी सरगर्मी तेज हो गई है.
विपक्षी दल सरकार को घेरने की लगातार कर रहा कोशिश
मस्जिद पर की गई इस बुलडोजर कार्रवाई की गूंज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है और विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं. इसी क्रम में, जब कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर के लिए रवाना हुईं, तो रास्ते में ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक लिया. पुलिस और सांसद के बीच बीच सड़क पर कुछ मिनटों तक तीखी बहस भी हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद यह खबर सामने आई कि सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर ही रोक दिया गया है. इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में इस विवाद को और अधिक हवा दे दी है और विपक्ष सरकार पर दमनकारी नीतियां अपनाने का आरोप लगा रहा है.
#WATCH | Saharanpur, Uttar Pradesh | On the demolition action at the illegal mosque at the Saharanpur Collectorate, SDM Sadar Subodh Kumar says, "This action was carried out by us in compliance with the court order. In the same sequence, a well has been discovered here.… pic.twitter.com/0rIqEakEqc
— ANI (@ANI) September 6, 2026
साल 2025 में शुरू हुआ था विवाद
यह पूरा कानूनी विवाद साल 2025 में तब शुरू हुआ था जब बजरंग दल के प्रांतीय संयोजक विकास त्यागी ने नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में एक औपचारिक याचिका दाखिल करके इस मस्जिद को पूरी तरह अवैध करार देने की मांग की थी. लंबी सुनवाई और दोनों पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद, नगर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को अपने फैसले में इसे अवैध मानते हुए इसके ध्वस्तीकरण का आदेश सुना दिया था. इस आदेश के खिलाफ मस्जिद की इंतजामिया कमेटी ने तुरंत जिला अदालत का दरवाजा खटखटाया और अपील दायर की. जिला न्यायाधीश की अदालत में लगभग डेढ़ महीने तक चली मैराथन सुनवाई के बाद जज ने नगर मजिस्ट्रेट के फैसले को पूरी तरह सही ठहराते हुए उसमें किसी भी तरह का फेरबदल करने से साफ इंकार कर दिया. प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से निष्पक्ष और तय कानूनी दायरे में रहकर की गई है, और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए शहर में पीएसी की कई बटालियनों के साथ भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.
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