प्राथमिक बाजार में IPO की बहार, 11 कंपनियां जुटाएंगी ₹7,055 करोड़
नयी दिल्ली, छह सितंबर भारतीय प्राथमिक बाजार में अगले कुछ दिन में एक बार फिर जोरदार हलचल देखने को मिलेगी। रेंटोमोजो, कनोहर इलेक्ट्रिकल्स और करमतारा इंजीनियरिंग सहित 11 कंपनियां मुख्य मंच के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के जरिये कुल 7,055 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में हैं। इन कंपनियों के आईपीओ सात सितंबर से 15 सितंबर के बीच बाजार में खुले रहेंगे।
इनमें से अधिकांश निर्गम मंगलवार और बुधवार को खुलेंगे। यस सिक्योरिटीज के मुख्य निवेश अधिकारी राजकुमार राठी ने कहा कि एक साथ इतने आईपीओ आना इस बात का संकेत है कि निवेशक शुरुआती चरण की वृद्धि वाली कंपनियों में हिस्सेदारी लेने के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि ये सभी कंपनियां सूचीबद्ध होने के समय एक अरब अमेरिकी डॉलर से कुछ कम बाजार पूंजीकरण वाली होंगी।
आगामी आईपीओ में रियल एस्टेट, इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण, भुगतान एवं पहचान समाधान, विशेष रसायन और ऑनलाइन किराये के कारोबार से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं। कुल 7,055 करोड़ रुपये में से 2,722 करोड़ रुपये यानी 39 प्रतिशत नए शेयर जारी कर जुटाए जाएंगे। यह राशि कंपनियों के खाते में जाएगी।
वहीं, 4,333 करोड़ रुपये यानी 61 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री (ओएफएस) के जरिये जुटाए जाएंगे। नए शेयरों की बिक्री से प्राप्त राशि का इस्तेमाल मुख्य रूप से कारोबार विस्तार, पूंजीगत व्यय, कर्ज चुकाने, कार्यशील पूंजी और कंपनियों की सामान्य कारोबारी जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा। सितंबर की शुरुआत भी आईपीओ के लिहाज से व्यस्त रही है।
रेज ऑफ बिलीफ और दीपा ज्वेलर्स ने एक सितंबर को अपने आईपीओ पेश किए थे। इन नए निर्गमों के साथ 2026 में आईपीओ लाने वाली कंपनियों की संख्या बढ़कर 75 होने की उम्मीद है। इनमें अकेले अगस्त में 23 कंपनियां बाजार में उतरी थीं।
प्रणव कंस्ट्रक्शंस का आईपीओ सात सितंबर खुलेगा। कंपनी का 351 करोड़ रुपये से अधिक का यह निर्गम नौ सितंबर को बंद होगा। कंपनी ने शेयर का मूल्य दायरा 118-124 रुपये तय किया है।
इसमें 315.6 करोड़ रुपये का नया निर्गम और 28.57 लाख शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल है। कनोहर इलेक्ट्रिकल्स, प्रसोल केमिकल्स और ग्लास वॉल सिस्टम्स (इंडिया) के आईपीओ आठ सितंबर को खुलेंगे। कनोहर इलेक्ट्रिकल्स का निर्गम 1,056 करोड़ रुपये का है और मूल्य दायरा 601-632 रुपये है।
प्रसोल केमिकल्स 500 करोड़ रुपये जुटाएगी, जिसमें 80 करोड़ रुपये का नया निर्गम और 420 करोड़ रुपये तक की ओएफएस शामिल है। ग्लास वॉल सिस्टम्स का निर्गम 428 करोड़ रुपये का है और इसका मूल्य दायरा 172-182 रुपये है। इसके अलावा नौ सितंबर को रेंटोमोजो, मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस, आर्सिल, एलसीसी प्रोजेक्ट्स, करमतारा इंजीनियरिंग और स्टीमहाउस इंडिया के आईपीओ आएंगे।
रेंटोमोजो का आईपीओ 1,256 करोड़ रुपये का है, जो इस सप्ताह का सबसे बड़ा निर्गम है। इसका मूल्य दायरा 384-404 रुपये प्रति शेयर है। इसमें 150 करोड़ रुपये के नए शेयर जारी किए जाएंगे और करीब 1,106 करोड़ रुपये की बिक्री पेशकश शामिल होगी।
करमतारा इंजीनियरिंग आईपीओ से 875 करोड़ रुपये जुटाएगी। इसमें 675 करोड़ रुपये का नया निर्गम और 200 करोड़ रुपये तक का ओएफएस शामिल है। शेयर का मूल्य दायरा 241-254 रुपये है।
मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस का आईपीओ 805 करोड़ रुपये का है। इसमें 320 करोड़ रुपये का नया निर्गम और 485 करोड़ रुपये तक की ओएफएस शामिल है। शेयर का मूल्य दायरा 322-339 रुपये है।
आर्सिल का 733 करोड़ रुपये का आईपीओ पूरी तरह पेशकश पर आधारित है। इसका मूल्य दायरा 132-139 रुपये है। आर्सिल के निर्गम से कंपनी को कोई राशि नहीं मिलेगी, क्योंकि इसमें नए शेयर जारी नहीं किए जा रहे हैं।
एलसीसी प्रोजेक्ट्स का आईपीओ 427 करोड़ रुपये का है और शेयर का मूल्य दायरा 139-146 रुपये तय किया गया है। वहीं स्टीमहाउस इंडिया 414 करोड़ रुपये जुटाएगी, जिसमें 353 करोड़ रुपये का नया निर्गम और 61 करोड़ रुपये का ओएफएस शामिल है। सबसे अंत में वीगालैंड डेवलपर्स 10 सितंबर को अपना 210 करोड़ रुपये का आईपीओ लाएगी।
यह निर्गम 15 सितंबर को बंद होगा और पूरी राशि नए शेयर जारी करके जुटाई जाएगी।
Iran War खत्म होते ही Trump चलेंगे बड़ी चाल! इजरायल से लेकर सऊदी अरब तक बदलेंगे समीकरण
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बाद मध्य पूर्व के लिए एक बड़ी रणनीति तैयार कर रही है। Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका का यह प्लान युद्ध खत्म होने के बाद पूरे क्षेत्र में उसकी भूमिका को बदल सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस रणनीति का मकसद ईरान को क्षेत्र में घेरने के लिए अमेरिकी सहयोगियों को एक साथ लाना और इजरायल के अपने पड़ोसी देशों के साथ रिश्ते मजबूत करना है। ट्रंप ने निजी बातचीत में कुछ लोगों से कहा है कि ईरान युद्ध खत्म होने के बाद वह मध्य पूर्व के लिए 'कुछ बहुत बड़ा' करने की तैयारी में हैं।
ईरान को रोकने के लिए बनेगा क्षेत्रीय मोर्चा
रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की योजना का पहला बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व में अमेरिका के सहयोगी देशों को ईरान के खिलाफ ज्यादा मजबूती से एकजुट करना है। इसमें अमेरिका की भूमिका सुरक्षा गारंटर के तौर पर हो सकती है। यानी क्षेत्र में किसी बड़े सुरक्षा संकट की स्थिति में अमेरिका अपने सहयोगी देशों को सुरक्षा देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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गाजा और इजरायल-सीरिया पर भी फोकस
ट्रंप प्रशासन युद्ध के बाद क्षेत्र में चल रहे दूसरे विवादों को कम करने की दिशा में भी काम करना चाहता है। इसके तहत ट्रंप की गाजा योजना के अगले चरण को आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। इसके अलावा इजरायल और सीरिया के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर समझौता कराने और इजरायल-लेबनान के मौजूदा समझौते को लागू करने पर भी काम किया जा सकता है।
इजरायल-सऊदी अरब डील पर ट्रंप की नजर
इस रणनीति का तीसरा और बेहद अहम हिस्सा अब्राहम अकॉर्ड्स (Abraham Accords) का विस्तार करना है। ट्रंप प्रशासन इजरायल और सऊदी अरब के बीच रिश्तों को सामान्य करने के लिए समझौता कराने की कोशिश कर सकता है। अगर इजरायल और सऊदी अरब के बीच सामान्य संबंध स्थापित होते हैं तो इसे ट्रंप के लिए बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि माना जाएगा। ईरान युद्ध के बाद यह समझौता उनके मध्य पूर्व प्लान का सबसे बड़ा हिस्सा बन सकता है।
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इजरायल के चुनाव से बदल सकता है समीकरण
इजरायल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने हैं, जबकि अमेरिका में नवंबर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि इजरायल में चुनाव के बाद बनने वाली सरकार अमेरिका के साथ मिलकर इस नई रणनीति पर काम करने के लिए तैयार हो। हालांकि, अमेरिकी अधिकारी इजरायल की राजनीति का इंतजार करते हुए अपनी योजना को रोकने के मूड में नहीं हैं। सूत्रों के मुताबिक, अगर चुनाव के बाद भी इजरायल में राजनीतिक गतिरोध बना रहता है तो ट्रंप फिर भी अपनी रणनीति को आगे बढ़ा सकते हैं।
अभी तैयार नहीं हुआ है पूरा प्लान
ट्रंप हाल के हफ्तों में अपने वरिष्ठ सलाहकारों के साथ दो बैठकों में इस रणनीति पर चर्चा कर चुके हैं। इन बैठकों में कई अलग-अलग विचारों पर बातचीत हुई है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक इस प्लान को अंतिम रूप देने में अभी कई और हफ्ते लग सकते हैं। एक सूत्र ने इस प्रक्रिया को बताते हुए कहा कि योजना पर काम चल रहा है, लेकिन अभी यह पूरी तरह तैयार नहीं हुई है।
सूत्र के मुताबिक, इस पूरी रणनीति का मकसद मध्य पूर्व की अलग-अलग समस्याओं और देशों को एक बड़ी क्षेत्रीय व्यवस्था से जोड़ना है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि अमेरिका के सभी सहयोगी देश इस योजना पर एक साथ आने के लिए तैयार होंगे या नहीं।
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