Kangana Ranaut Latest Video: गुस्से से इतना क्यों फट पड़ीं कंगना? आखिर हुआ क्या? | Mandi | Himachal
हिमाचल प्रदेश के मंडी में BJP सांसद कंगना रनौत ने विकास कार्यों में देरी और सांसद निधि के इस्तेमाल को लेकर अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई... कंगना ने दावा किया कि उनकी सांसद निधि के तहत करीब 11 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध थी, लेकिन इसमें से सिर्फ करीब 50 लाख रुपये ही खर्च किए गए....कंगना का आरोप है कि अधिकारियों की ओर से उन्हें लगातार ऐसी रिपोर्ट दी जा रही थी, जिसमें करीब 90 प्रतिशत सांसद निधि खर्च होने की बात कही गई... लेकिन बाद में एजेंसियों की जांच में कथित तौर पर फंड के इस्तेमाल को लेकर गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं....कंगना ने दावा किया कि करीब 30 से 40 प्रतिशत सांसद निधि की राशि फर्जी लोगों को वितरित किए जाने का खुलासा हुआ है... उनका कहना है कि अधिकारियों द्वारा इस रकम की वसूली भी नहीं की जा रही है...उन्होंने अधिकारियों पर तंज कसते हुए कहा कि एक्टिंग में तो अधिकारी मुझसे भी आगे हैं। Kangana Ranaut Latest Video: BJP MP Kangana Ranaut confronted officials during a DISHA Committee meeting in Mandi, Himachal Pradesh. She questioned delays in development projects and the utilisation of around ₹11 crore allocated under MPLADS, with her angry exchange drawing widespread attention. #kanganaranaut #kanganaraniaut #mandi #himachalpradesh #kanganavideo #bjp #himachalnews #viralvideo CUT_SN OPT_VJ News18 India को Google पर फॉलो करे- https://news18.co/n18ig न्यूज़18 इंडिया भारत का नंबर 1 न्यूज चैनल है। जो 24 घंटे आप तक देश और दुनिया की हर खबर पहुँचाता है। राजनीति, मनोरंजन, बॉलीवुड, खेल के साथ साथ आप तक वो हर खबर हम पहुँचाते हैं जो आपके लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए बने रहें हमारे साथ और सब्सक्राइब करें हमारा YouTube चैनल #News18IndiaNumber1 News18 India is India's No.1 hindi News Channel. We bring you the latest, most relevant and the news that concerns you from all over the world. Politics, Entertainment, Bollywood, OTT, Sports, News to Use, Technology, all the news that is important for you to know, we bring you that. Be with us as News18India viewer and subscribe our YouTube channel #News18IndiaNumber1 Follow Every Breaking Story LIVE???? Watch News18 LIVE 24x7: https://youtube.com/live/Io-G_aiF8HA Subscribe our channel for the latest news updates: https://www.youtube.com/@news18India Like us: https://www.facebook.com/News18India/ Follow us: https://twitter.com/News18India News18 Mobile App https://onelink.to/desc-youtube Website https://hindi.news18.com/
सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल प्रचार का ट्रेंड:एक रील के मिलते हैं ₹50 हजार, स्थानीय इंफ्लूएंसर पार्टियों के रडार पर
राजनीतिक दलों की ताकत का पुराना आधार संगठन और कार्यकर्ता रहे हैं। अब इनके समानांतर कंटेंट क्रिएटर्स और माइक्रो इंफ्लूएंसर्स की ‘डिजिटल फौज’ खड़ी हो रही है। इनके पास न पार्टी का पद है, न झंडा। लेकिन, हजारों-लाखों स्क्रीन तक पहुंच है। युवा आंदोलनों ने इसकी ताकत दिखा दी है। आंदोलन की सूचना, नैरेटिव और सरकार से सवाल अब सिर्फ सभा, पोस्टर या प्रेस कॉन्फ्रेंस के भरोसे नहीं हैं। एक रील, मीम या शॉर्ट वीडियो कुछ घंटों में लाखों युवाओं तक पहुंच सकता है। यूपी, पंजाब और उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टियां 10 से 50 हजार फॉलोअर्स वाले स्थानीय इंफ्लूएंसर्स का नेटवर्क बनाने में जुटी हैं। डिजिटल कैंपेन से जुड़े लोगों के अनुसार, छोटे और मझोले इंफ्लूएंसर किसी दल से स्थायी रूप से नहीं जुड़ते। वे अलग-अलग समय पर भाजपा, कांग्रेस, आप या अन्य दलों के लिए काम कर सकते हैं। 50 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर, तो 30 लाख रुपए मिलते हैं राजनीतिक रील के 15 से 50 हजार रु. और पोस्ट के 15 से 20 हजार रु. तक दिए जाने के दावे हैं। सोशल मीडिया कंपनी चलाने वाले श्याम तिवारी के अनुसार, 5 लाख तक सब्सक्राइबर वाले क्रिएटर 50 हजार से एक लाख रुपए तक लेते हैं। 50 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर वाले बड़े क्रिएटर का एक कंटेंट 30 लाख रुपए तक पहुंच सकता है। स्थानीय असर ज्यादा अहम, सरकारों ने बना दिए रेट कार्ड पार्टियां क्रिएटर की सामाजिक पहुंच, विचारधारा और बॉडी लैंग्वेज तक परखती हैं। 15 हजार फॉलोअर्स वाला शिक्षक, किसान, कॉमेडियन कहीं-कहीं राष्ट्रीय सेलिब्रिटी से ज्यादा प्रभावी हो सकता है। त्वरित नैरेटिव के लिए इंस्टाग्राम इंफ्लूएंसर और नेता की छवि गढ़ने के लिए पॉडकास्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। राजनीतिक पेमेंट नकद में चलने के दावे हैं। चुनाव आयोग सोशल मीडिया राजनीतिक विज्ञापन और चुनावी खर्च को नियमन के दायरे में रखता है। एएससीआई गाइडलाइंस भी विज्ञापन की स्पष्ट सूचना देने को कहती हैं। पर, कोई शिक्षक शिक्षा नीति की तारीफ करे तो दर्शक कैसे पहचाने कि यह पेड प्रचार है। 2027 के दौरान होने वाले चुनाव में वोटर के सामने ये चुनौती रहेगी। क्रिएटर के पास रीच, कार्यकर्ता के पास बूथ कांग्रेस की जेन-जी कनेक्ट यात्रा से जुड़े सुधांशु वाजपेयी कहते हैं, ‘रील्स से कार्यकर्ता से ज्यादा फेम मिल सकता है। पर, वोटर को बूथ तक लाना कार्यकर्ता का ही काम है।’ सोनम वांगचुक के लद्दाख अभियान ने दिखाया कि डिजिटल समर्थन जमीन पर उतर सकता है। 2024 की भूख हड़ताल के बाद कम से कम 50 शहरों में ‘फ्रेंड्स ऑफ लद्दाख’ कार्यक्रम हुए। पर जरूरी नहीं कि हर वायरल अभियान वोट में बदले। ‘जागो कर्नाटक’ के संयोजक नूर श्रीधर भी सोशल मीडिया और बूथ-स्तरीय प्रबंधन के तालमेल को निर्णायक मानते हैं। ------------------------------- ये खबर भी पढ़ें देश का सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर हैदराबाद में बनेगा, TCS की हाइपरवॉल्ट ₹70,000 करोड़ का निवेश करेगी हैदराबाद में देश का सबसे बड़ा AI डेटा सेंटर कैंपस बनने जा रहा है। यह कैंपस टाटा ग्रुप की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज की सब्सिडियरी कंपनी हाइपरवॉल्ट AI डेटा सेंटर लिमिटेड बनाएगी। सेंटर की क्षमता 1 गीगावॉट होगी, जो बड़ी AI तकनीकों को चलाने और संभालने का काम करेगी। पूरी खबर पढ़ें…
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