Swatantra Bhardwaj Vs Nishu Azad: स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर बहुत बड़ा खुलासा! | UP News
Swatantra Bhardwaj Vs Nishu Azad: स्वतंत्र भारद्वाज को लेकर बहुत बड़ा खुलासा! | UP News #swatantra #nishuazad #upnews #cjpprotest सिर फोड़ने वाले स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंदशहर से पुलिस ने पकड़ा है. निशु आजाद के पिता को मारने का मुद्दा गरमा गया है. news18 live | aaj ka taaja khabar | आज की ताजा खबर | up live news | news18 up live news | up news live | aaj ke taaja khabar | hindi hews | latest news | news in hindi | hindi samachar | hindi khabar | n18oc_uttar_pradesh Follow Every Breaking Story LIVE ???? Watch News18 LIVE 24x7: https://youtube.com/live/pVXYxHNwJo8 SUBSCRIBE to get the Latest News & Updates - http://bit.ly/News18UP News18 Mobile App - https://onelink.to/desc-youtube Follow Us on Social Media: Website: https://bit.ly/3auydBL Twitter: https://twitter.com/News18UP https://twitter.com/News18_UK Facebook: https://www.facebook.com/News18UP/ https://www.facebook.com/News18UK/ About Channel: News18 UP Uttarakhand is one of India's leading Hindi news channel and can be watched live on YouTube. News18 UP Uttarakhand news channel is a part of Network 18. Topics such as politics, education, health, environment, economy, business, sports, and entertainment are covered by this channel. The channel gives nationwide coverage. News18 UP Uttarakhand ,भारत का एक मात्र भरोसेमंद और लोकप्रिय न्यूज़ चैनल है। यह चैनल नेटवर्क १८ का हिस्सा है। यह चैनल उत्तरप्रदेश एवं उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय खबरों के साथ साथ सरकार, राजनीति, पर्यावरण , खेल-कूद से जुड़ी राष्ट्रीय एवं अंतराष्ट्रीय खबरें प्रसारित करता है| news18 up live, aaj ki taaza khabar, news18 up uttarakhand live, uttar pradesh news, delhi property dealer murder, krishna janmashtami, pm modi gujarat visit, nitin nabin uttarakhand visit, rahul gandhi in uttarakhand, sheikh hasina extradition, isro eos-05, neet ug 2027, bihar flood, chitrakoot flood, varanasi ganga water level
अमित दुबे की साइबर कहानियां पहुंचीं हिरानी-नीरज पांडे तक:बोले- क्रिमिनल डिवाइस नहीं, पहले इंसान को हैक करता है, ऐसे बचें साइबर ठगी से
साइबर क्राइम एक्सपर्ट और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अमित दुबे ने करियर में ऐसे कई मामलों की जांच की है, जो किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थे। उनकी वास्तविक इन्वेस्टिगेशन की कहानियां राजकुमार हिरानी की वेब सीरीज 'प्रीतम एंड पेड्रो' और नीरज पांडे की 'हैक क्राइम्स ऑनलाइन' तक पहुंचीं। एटीएम चोरी, किडनैपिंग और एक एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट से फॉलोअर्स गायब होने जैसे मामलों से अमित ने साइबर क्राइम की बदलती दुनिया को करीब से देखा है। उनका कहना है कि अपराधी हर बार डिवाइस को हैक नहीं करता, कई बार पहले इंसान के भरोसे को हैक करता है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में अमित ने साइबर क्राइम की अपनी इन्वेस्टिगेशन, फिल्ममेकर्स के साथ काम करने के अनुभव और आम लोगों के लिए जरूरी सावधानियों पर खुलकर बात की। सवाल: आपकी वास्तविक साइबर इन्वेस्टिगेशन राजकुमार हिरानी की वेब सीरीज तक पहुंची। उनसे यह कनेक्शन कैसे बना? जवाब: कोविड के दौरान राजू सर से मेरा कनेक्शन हुआ। उस समय साइबर क्राइम को लेकर हमारी बातचीत शुरू हुई और फिर वीडियो कॉल पर कई बार चर्चा हुई। मैंने उन्हें अपने काम और अलग-अलग इन्वेस्टिगेशन से जुड़ी कहानियां बताईं। उन्हें लगा कि इन केसों में सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि इंसानी व्यवहार और भावनाओं की भी काफी संभावनाएं हैं। इसके बाद हमने इन कहानियों पर काम करना शुरू किया। यह कोई छोटा प्रोसेस नहीं था। 6 साल तक कहानी और स्क्रिप्ट पर काम हुआ, कई ड्राफ्ट तैयार हुए और चीजों को लगातार बेहतर किया गया। सवाल: 'प्रीतम एंड पेड्रो' में एटीएम चोरी वाला सीन भी है। क्या यह आपके किसी वास्तविक केस से जुड़ा है? जवाब: हां, एटीएम चोरी का मामला मेरे वास्तविक अनुभवों से जुड़ा है। साइबर क्राइम की इन्वेस्टिगेशन में कई बार कोई केस शुरुआत में बहुत जटिल दिखाई देता है। आपको लगता है कि इसके पीछे बहुत हाईटेक तरीका होगा, लेकिन जब आप घटनाओं के पैटर्न और डिजिटल फुटप्रिंट को जोड़ते हैं तो तस्वीर धीरे-धीरे साफ होने लगती है। यही चीज इस केस में भी थी। वास्तविक घटना को स्क्रीन पर उसी रूप में रखना संभव नहीं होता, इसलिए कहानी के हिसाब से उसमें बदलाव किए जाते हैं, लेकिन उसका बेस और इन्वेस्टिगेशन का अनुभव वास्तविक होता है। सवाल: इस केस से आम लोगों के लिए भी एक सीख निकलती है कि साइबर क्राइम हमेशा बहुत हाईटेक नहीं होता, क्या कहना चाहेंगे? जवाब: बिल्कुल। हम अक्सर मान लेते हैं कि साइबर क्रिमिनल कोई बहुत बड़ा कंप्यूटर एक्सपर्ट होगा और वह ऐसी तकनीक इस्तेमाल करेगा, जिसे समझना हमारे लिए मुश्किल है। जबकि कई मामलों में अपराध बहुत साधारण तरीके से शुरू होता है। छोटी-सी लापरवाही, किसी व्यक्ति पर भरोसा या जानकारी शेयर करना आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है। इन्वेस्टिगेशन में भी कई बार बड़ी सफलता किसी बहुत बड़े सुराग से नहीं, बल्कि छोटी-छोटी चीजों को जोड़ने से मिलती है। सवाल: राजकुमार हिरानी के बाद आपका जुड़ाव नीरज पांडे से भी हुआ। दोनों के काम करने के तरीके में क्या अंतर महसूस किया? जवाब: दोनों की अपनी अलग स्टोरीटेलिंग लैंग्वेज है। नीरज सर थ्रिल और सस्पेंस को बहुत मजबूत तरीके से बिल्ड करते हैं। उनके साथ काम करते हुए यह ध्यान रहता है कि दर्शक लगातार अगला मोड़ जानना चाहे। राजू सर का तरीका थोड़ा अलग है। वे गंभीर विषय में भी ह्यूमन इमोशन, ह्यूमर और रिश्तों की परतें तलाशते हैं। लेकिन एक चीज दोनों में समान है- दोनों कहानी को विश्वसनीय बनाना चाहते हैं। खासकर जब विषय साइबर क्राइम हो तो तकनीकी चीजें सही होना बहुत जरूरी है। सवाल: नीरज पांडे की ‘हैक क्राइम्स ऑनलाइन’ में साइबर क्राइम को पर्दे पर उतारना कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब: सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि साइबर क्राइम को बहुत तकनीकी भी न बना दें और इतना सरल भी न कर दें कि वह अविश्वसनीय लगे। अगर आप सिर्फ कंप्यूटर स्क्रीन, कोड या टेक्निकल शब्द दिखाएंगे तो आम दर्शक कहानी से जुड़ नहीं पाएगा। इसलिए यह जरूरी है कि टेक्नोलॉजी के साथ इंसान की कहानी भी दिखाई जाए- अपराधी ऐसा क्यों कर रहा है, पीड़ित कैसे फंसता है और जांच करने वाला किस तरह चीजों को जोड़ता है। यही संतुलन सबसे महत्वपूर्ण है। सवाल: आपकी इन्वेस्टिगेशन में ऐसा कौन-सा केस रहा, जो आपको आज भी याद है? जवाब: किडनैपिंग का एक केस काफी दिलचस्प था। उसमें डिजिटल लोकेशन और दूसरी ऑनलाइन जानकारियों को जोड़कर पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। बीच में लोकेशन से जुड़ी जानकारी बदलती रही, जिससे जांच मुश्किल हुई। लेकिन अलग-अलग डिजिटल संकेतों को जोड़ते हुए पुलिस आगे बढ़ती रही। आखिरकार उस व्यक्ति को सुरक्षित बरामद किया गया। इस तरह के मामलों में टेक्नोलॉजी अकेले काम नहीं करती। टेक्नोलॉजी से मिले संकेतों को सही तरीके से समझना और उन्हें ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है। सवाल: यानी अपराधी अपनी डिजिटल मौजूदगी छिपाने की कोशिश करे, फिर भी कुछ न कुछ सुराग बच जाता है? जवाब: डिजिटल दुनिया में पूरी तरह गायब होना आसान नहीं है। हम फोन, ईमेल, सोशल मीडिया, क्लाउड और कई दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। इन सबके बीच कहीं न कहीं डिजिटल फुटप्रिंट बनते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर केस तुरंत सुलझ जाएगा। कई बार एक सुराग दूसरे सुराग से जुड़ता है और फिर धीरे-धीरे पूरी तस्वीर सामने आती है। इन्वेस्टिगेशन में धैर्य बहुत जरूरी है। सवाल: एक्ट्रेस के इंस्टाग्राम अकाउंट से फॉलोअर्स गायब होने वाला मामला भी काफी अलग था। आखिर उसमें क्या हुआ? जवाब : उस एक्ट्रेस की डिजिटल पहचान के साथ छेड़छाड़ हुई थी। अकाउंट का नाम और पहचान बदलने के बाद स्थिति ऐसी बन गई कि पुराना अकाउंट अलग रूप में दिखाई देने लगा। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि उनके पुराने फॉलोअर्स उसी डिजिटल पहचान से जुड़े हुए थे। हमने अलग-अलग डिजिटल सुरागों और अकाउंट से जुड़ी जानकारियों को जोड़कर पुराने अकाउंट तक पहुंचने का रास्ता निकाला। इस केस से यह समझ आता है कि सोशल मीडिया अकाउंट सिर्फ एक यूजरनेम और पासवर्ड नहीं है। उसके पीछे आपकी पूरी डिजिटल पहचान और वर्षों की मेहनत जुड़ी होती है। सवाल: क्या सेलिब्रिटी के सोशल मीडिया अकाउंट पर आम यूजर के मुकाबले ज्यादा खतरा रहता है? जवाब: खतरा इसलिए ज्यादा हो सकता है क्योंकि सेलिब्रिटी के अकाउंट की वैल्यू ज्यादा होती है। उनके लाखों फॉलोअर्स होते हैं और उनके नाम से कोई गलत जानकारी या ऑफर तेजी से फैल सकता है। लेकिन अकाउंट से जुड़ी गलतियां सेलिब्रिटी और आम आदमी दोनों से होती हैं। पुराने फोन में लॉगिन रह जाना, किसी दूसरे व्यक्ति के डिवाइस पर अकाउंट खुला छोड़ देना, पासवर्ड शेयर करना या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करना- ये सभी चीजें खतरा बढ़ाती हैं। सवाल: सेशन हाईजैकिंग जैसे खतरे से आम यूजर किस तरह बच सकता है? जवाब: सबसे पहले अपने अकाउंट में लॉगिन डिवाइस और एक्टिविटी पर नजर रखें। आपने कभी किसी पुराने फोन, लैपटॉप या दूसरे डिवाइस में अपना अकाउंट इस्तेमाल किया था तो यह देखना जरूरी है कि वहां अभी भी एक्सेस तो नहीं है। पुराने और अनजान डिवाइस से लॉगआउट करें। जहां संभव हो, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन इस्तेमाल करें और पासवर्ड किसी के साथ शेयर न करें। कई बार यूजर को लगता है कि पासवर्ड सुरक्षित है, लेकिन समस्या किसी पुराने लॉगिन से पैदा हो रही होती है। सवाल: लोग अक्सर कहते हैं कि ‘मेरा फोन हैक हो गया।’ क्या हर बार वास्तव में फोन हैक होता है? जवाब: नहीं। कई बार फोन हैक नहीं हुआ होता, बल्कि किसी अकाउंट, क्लाउड सर्विस या पुराने डिवाइस का एक्सेस बना रहता है। उदाहरण के लिए आपका ईमेल या क्लाउड किसी दूसरे डिवाइस में लॉगिन है और आपको उसकी जानकारी नहीं है। ऐसी स्थिति में आपको लगता है कि फोन में कोई समस्या है, जबकि असली समस्या अकाउंट एक्सेस की हो सकती है। इसलिए घबराने के बजाय पहले यह पता लगाना चाहिए कि समस्या फोन में है, अकाउंट में है या किसी पुराने डिवाइस में। सवाल: फ्री ब्लू टिक जैसे ऑफर आज भी लोगों को आसानी से फंसा लेते हैं। ऐसे मैसेज को कैसे पहचानें? जवाब: साइबर क्रिमिनल अक्सर ऐसी चीज का इस्तेमाल करते हैं, जिसे देखकर यूजर तुरंत उत्साहित हो जाए या डर जाए। फ्री ब्लू टिक, अकाउंट बंद होने की चेतावनी, इनाम या किसी जरूरी सर्विस का ऑफर- ये सभी लालच या डर पैदा करने वाले तरीके हो सकते हैं। अगर कोई मैसेज आपको तुरंत लिंक पर क्लिक करने के लिए कह रहा है तो रुकिए। संबंधित ऐप या वेबसाइट खुद खोलिए और वहीं जाकर जानकारी चेक कीजिए। किसी मैसेज में आए लिंक को सच मान लेना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। सवाल: डीपफेक को लेकर आपकी सबसे बड़ी चिंता क्या है? जवाब: डीपफेक का खतरा सिर्फ फर्जी वीडियो या ऑडियो बनने तक सीमित नहीं है। इससे भी बड़ा खतरा यह है कि लोगों का वास्तविक कंटेंट पर भरोसा खत्म हो जाए। भविष्य में कोई असली वीडियो सामने आए और लोग कहें कि यह भी डीपफेक है, तो समस्या और गंभीर होगी। इसलिए किसी वायरल वीडियो को सिर्फ देखकर सच या झूठ तय करने के बजाय उसके स्रोत और संदर्भ की पुष्टि करना जरूरी है। सवाल: आपकी नजर में साइबर क्रिमिनल का सबसे मजबूत हथियार क्या है? जवाब: इंसान का भरोसा। हम अक्सर सोचते हैं कि अपराधी पहले डिवाइस को हैक करता है, जबकि कई मामलों में वह पहले इंसान को हैक करता है। वह आपको विश्वास दिलाता है कि वह बैंक से बोल रहा है, किसी कंपनी से बोल रहा है या कोई फायदा देने वाला है। जब आप उसकी बात पर भरोसा कर लेते हैं तो कई बार जानकारी आप खुद दे देते हैं। इसलिए साइबर सिक्योरिटी की शुरुआत तकनीक से नहीं, जागरूकता से होती है। सवाल: अगर कोई साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाए तो सबसे पहले क्या करना चाहिए? जवाब: सबसे पहले घबराकर चुप नहीं बैठना चाहिए। जितनी जल्दी घटना की जानकारी संबंधित बैंक या सर्विस प्रोवाइडर को दी जाए, उतना बेहतर है। आधिकारिक साइबर क्राइम चैनल पर शिकायत करें और घटना से जुड़े सभी सबूत संभालकर रखें- मैसेज, फोन नंबर, ईमेल, स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन डिटेल आदि। साइबर क्राइम में समय बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसलिए शर्म या डर के कारण शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए। सवाल: इतने सालों की इन्वेस्टिगेशन के बाद आम लोगों के लिए आपका सबसे जरूरी संदेश क्या है? जवाब: डिजिटल दुनिया में सुविधा के साथ जिम्मेदारी भी आती है। किसी अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी या पासवर्ड शेयर न करें, पुराने डिवाइस से अकाउंट लॉगआउट करें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करें। कोई मैसेज आपको डराए या लालच दे और तुरंत फैसला लेने के लिए कहे तो सबसे पहले रुकिए और उसकी पुष्टि कीजिए। मेरी नजर में साइबर क्राइम से बचने का सबसे मजबूत हथियार जागरूकता है। सवाल: आगे आपका फोकस किस दिशा में है? जवाब: मैं चाहता हूं कि भारत में बड़ी संख्या में प्रशिक्षित और प्रमाणित साइबर प्रोफेशनल तैयार हों। अभी जरूरत सिर्फ अपराध होने के बाद उसकी जांच करने की नहीं है, बल्कि अपराध होने से पहले लोगों को जागरूक करने की भी है। अगर हमारी एक कहानी, एक ट्रेनिंग या एक छोटी-सी जानकारी किसी व्यक्ति को साइबर फ्रॉड से बचा देती है तो वही सबसे बड़ी सफलता है। पैसा और तारीफ कमाना आसान हो सकता है, लेकिन लोगों का भरोसा और प्यार कमाना सबसे मुश्किल है।
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