electricity rules: झारखंड में बिजली सप्लाई को लेकर नया नियम लागू, तय सीमा से चूकने पर लगेगा एक्स्ट्रा चार्ज और पेनल्टी
Jharkhand electricity rules: झारखंड में पावर सेक्टर के भीतर बिजली उत्पादन, खपत और वाणिज्यिक जवाबदेही को अधिक अनुशासनबद्ध बनाने के लिए एक नया नियम सामने आया है। झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (JSERC) ने 'झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (इंट्रा-स्टेट डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म एंड रिलेटेड मैटर्स) रेगुलेशन्स, 2026' का ड्राफ्ट आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है।
इस नई व्यवस्था के तहत तय किए गए शेड्यूल और वास्तविक बिजली उत्पादन या खपत के बीच अंतर आने पर 'डेविएशन चार्ज' (विचलन शुल्क) वसूले जाने का कड़ा प्रावधान किया गया है। आयोग ने इस महत्वपूर्ण ड्राफ्ट पर बिजली क्षेत्र के तमाम स्टेकहोल्डर्स और आम नागरिकों से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए हैं।
शेड्यूल और वास्तविक खपत के अंतर का होगा वित्तीय निपटारा
प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, यदि किसी पावर जनरेटर को तय समय में 100 मेगावाट बिजली ग्रिड को सप्लाई करनी है, लेकिन वह इसके बजाय 110 मेगावाट बिजली दे देता है, तो जो 10 मेगावाट का अंतर आएगा, उसे डेविएशन माना जाएगा। ठीक इसी तरह, तय मात्रा से कम या ज्यादा बिजली की खपत करना भी इसी दायरे में आएगा। इस अंतर का पूरा वित्तीय निपटारा बाजार आधारित कीमतों और तय संदर्भ दरों के आधार पर सुनिश्चित किया जाएगा।
ग्रिड की स्थिरता और संतुलन बनाए रखना मुख्य मकसद
नियामक आयोग का स्पष्ट मानना है कि पावर ग्रिड की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए बिजली के उत्पादन और उसकी खपत के बीच संतुलन का होना बेहद आवश्यक है। अगर शेड्यूल और वास्तविक बिजली प्रवाह के बीच बड़ा अंतर पैदा होता है, तो इससे ग्रिड की फ्रीक्वेंसी पर बुरा असर पड़ सकता है।
राज्य में बढ़ती बिजली की मांग, ओपन एक्सेस कारोबार में तेजी और ग्रिड के साथ नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) के बढ़ते एकीकरण को देखते हुए इस तरह के कड़े नियामकीय ढांचे की जरूरत महसूस की गई है। इस पूरी व्यवस्था को केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) के साल 2024 के नियमों की तर्ज पर ही तैयार किया गया है।
साप्ताहिक ऊर्जा खाते और पेनल्टी का प्रावधान
इस प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से साप्ताहिक आधार पर ऊर्जा और डेविएशन खातों को तैयार कर प्रकाशित किया जाएगा। यदि तय समयसीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो उपभोक्ताओं या इकाइयों पर डिलेड पेमेंट सरचार्ज (DPS) लगाया जाएगा। आपसी विवादों के त्वरित समाधान के लिए राज्य पावर कमेटी के जरिए एक संस्थागत व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि घरेलू बिजली उपभोक्ताओं पर इसका सीधा डेविएशन चार्ज लागू नहीं होगा, लेकिन इससे ओवरऑल ग्रिड संचालन और बिजली आपूर्ति में सुधार की पूरी उम्मीद है।
इन इकाइयों पर मुख्य रूप से लागू होंगे नए नियम
यह नया डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म पारंपरिक थर्मल पावर प्लांट, हाइड्रो पावर स्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसधारी, ओपन एक्सेस उपभोक्ता, कैप्टिव पावर प्लांट, एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और राज्य ग्रिड से जुड़े तमाम अन्य बिजली खरीदारों व विक्रेताओं पर सख्ती से लागू होगा।
हालांकि, पवन, सौर और हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी परियोजनाओं को फिलहाल इस सामान्य व्यवस्था से बाहर रखा गया है, क्योंकि मौसम और पूर्वानुमान की अनिश्चितता को देखते हुए इनके लिए अलग से रूपरेखा बाद में लाई जा सकती है। इसके अलावा, जानबूझकर नियम तोड़ने या अनुचित आर्थिक लाभ कमाने वालों से अतिरिक्त व्यावसायिक पेनल्टी और रिकवरी की जाएगी।
Neeraj Chopra: एशियन गेम्स और डायमंड लीग फाइनल से बाहर हुए नीरज चोपड़ा, सीजन का हुआ समय से पहले अंत
Neeraj Chopra ruled out Asian Games 2026: भारत के स्टार जैवलिन थ्रोअर और ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा का 2026 का सत्र समय से पहले ही समाप्त हो गया है। अभ्यास सत्र के दौरान टखने में लिगामेंट टियर (Ligament Tear) की गंभीर चोट लगने के कारण वह आगामी एशियन गेम्स और प्रतिष्ठित डायमंड लीग फाइनल में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। अपने डॉक्टरों और सपोर्ट स्टाफ से लंबी चर्चा के बाद नीरज ने इस मुश्किल सत्र को यहीं रोकने और पूरी तरह से रिकवरी पर ध्यान केंद्रित करने का कठिन निर्णय लिया है।
सोशल मीडिया पर अपने आधिकारिक हैंडल से इस बात की जानकारी साझा करते हुए नीरज ने लिखा कि कड़ी मेहनत के बाद उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था कि वह आखिरकार अपनी खोई हुई लय हासिल कर रहे हैं, खासकर लुसाने डायमंड लीग में सीजन का अपना बेस्ट थ्रो फेंकने के बाद। लेकिन दुर्भाग्य से, उसके तुरंत बाद ट्रेनिंग के दौरान उनके टखने में चोट लग गई।
लुसाने में शानदार प्रदर्शन के बाद आया चोट का यह बड़ा आघात
यह दुर्भाग्यपूर्ण चोट ऐसे समय में आई है जब नीरज ने हाल ही में लुसाने डायमंड लीग में अपने इस साल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। उन्होंने वहां 88.05 मीटर के शानदार थ्रो के साथ दूसरा स्थान हासिल किया था, और वह श्रीलंका के रमेश थरंगा पाथिराज (Rumesh Tharanga Pathirage) से महज नौ सेंटीमीटर से चूक गए थे, जिन्होंने 88.14 मीटर के थ्रो के साथ पहला स्थान प्राप्त किया था।
अगर इस साल के सफर पर नजर डालें, तो लुसाने मीट से पहले नीरज ने 2026 में केवल दो अन्य प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था। उन्होंने दोहा डायमंड लीग में चौथा स्थान और कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीता था, हालांकि दोनों ही इवेंट्स में वह 86 मीटर का आंकड़ा पार करने में असफल रहे थे। लुसाने के प्रदर्शन ने उनके प्रशंसकों में उम्मीद जगाई थी कि वह एक बार फिर अपनी पुरानी लय में लौट रहे हैं।
रिकवरी पर रहेगा पूरा फोकस, एथलेटिक्स दल के लिए बड़ा झटका
एशियन गेम्स और डायमंड लीग जैसे साल के सबसे बड़े टूर्नामेंटों से बाहर होना भारत के एथलेटिक्स दल के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। अपनी निराशा व्यक्त करते हुए नीरज ने कहा कि यह उनके लिए काफी निराशाजनक है, खासकर तब जब उन्हें लगा था कि वह अपनी लय के बेहद करीब पहुंच रहे हैं। हालांकि, उन्होंने सकारात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि असफलताएं सफर का ही एक हिस्सा होती हैं।
नीरज ने अपने प्रशंसकों को संदेश देते हुए कहा कि उनका पूरा ध्यान अब अच्छी तरह से रिकवर होने और पहले से अधिक मजबूत होकर मैदान पर वापसी करने पर है। उन्होंने इस मुश्किल समय में उन्हें लगातार प्यार और समर्थन देने के लिए सभी का आभार भी व्यक्त किया। टोक्यो ओलंपिक 2021 में स्वर्ण और पेरिस ओलंपिक 2024 में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन करने वाले नीरज चोपड़ा के इस हालिया झटके से उनके फैंस जरूर निराश हैं, लेकिन सभी को उनकी दमदार वापसी का इंतजार रहेगा।
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