आज यानी की 05 सितंबर को बॉलीवुड अभिनेता पंकज त्रिपाठी अपना 50वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्होंने साइड और सपोर्टिंग रोल करके फैंस का दिल जीता है। फिल्मी दुनिया में अपना नाम बनाने के लिए उनको काफी संघर्ष करना पड़ा। लेकिन अपनी मेहनत और दमदार अभिनय से पंकज त्रिपाठी हर किसी के दिल पर राज करते हैं। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर अभिनेता पंकज त्रिपाठी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...
जन्म और परिवार
बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड गांव में 05 सितंबर 1976 को पंकज त्रिपाठी का जन्म हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनें और लोगों की सेवा करें। लेकिन एक समय पर पंकज का रुझान राजनीति में हो गया था। कॉलेज के दिनों में वह स्टूडेंट्स पॉलिटिक्स में सक्रिय थे। वहीं 10वीं क्लास में उन्होंने अपना सरनेम तिवारी से त्रिपाठी कर लिया था। विद्यार्थी परिषद में रहते हुए पंकज त्रिपाठी को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी।
एक्टिंग फील्ड
डॉक्टर की पढ़ाई में मन न लगने के बाद पंकज त्रिपाठी का मन राजनीति से भी हटने लगा। उन्होंने फिर अभिनय की दुनिया में आने का फैसला किया। एक बार वह अपने दोस्त के साथ 'अंधा कुंआ' नाम का नाटक देखने के लिए गए थे। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह से मन बना लिया कि उनको एक्टिंग ही करनी है।
2004 में आए मुंबई
पंकज त्रिपाठी ने पटना में रहते हुए एक के बाद एक थिएटर में काम करते हुए कई नाटक किए। लोगों को उनका काम पसंद आने लगा था। धीरे-धीरे उनको भी इसमें मजा आने लगा। साल 1995 से लेकर 2001 तक पंकज त्रिपाठी ने पटना में नाटक किया। इसके बाद वह फिल्मों की दुनिया में काम करने का सपना लेकर साल 2004 में मुंबई आ गए।
काम के लिए भटके
मुंबई आने के बाद पंकज त्रिपाठी को काम पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। उस मुश्किल समय में उनकी पत्नी मृदुला त्रिपाठी ने घर संभाला भी और चलाया भी था। अभिनेता ने बताया कि उन्होंने साल 2004 से लेकर 2010 तक कुछ नहीं कमाते थे। वह अंधेरी में घूमते और काम की तलाश करते थे।
इस फिल्म से बदले दिन
साल 2004 में आई फिल्म 'रन' में पंकज त्रिपाठी को छोटा सा रोल मिला। इस फिल्म में भूमिका चावला और अमिताभ बच्चन थे। वहीं साल 2012 में आई फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से अभिनेता को बड़ा ब्रेक और पहचान मिली थी। इसमें पंकज त्रिपाठी ने सुल्तान कुरैशी का रोल निभाया था। इस फिल्म से अन्य स्टार्स ऋचा चड्ढा, नवाजुद्दीन सिद्दीकी और हुमा कुरैशी को पहचान मिली थी।
ओटीटी पर छाए
इसके बाद पंकज त्रिपाठी ने 'न्यूटन', 'बरेली की बर्फी', 'मसान', 'ओएमजी 2' और 'मिमी' फिल्मों में अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। साल 2018 में वेब सीरीज 'मिर्जापुर' से पंकज त्रिपाठी ने ओटीटी पर डेब्यू किया था। इस सीरीज के आते ही हर किसी की जुंबा पर 'कालीन भैया' का नाम था। यह किरदार पंकज त्रिपाठी की बड़ी पहचान साबित हुआ। उन्होंने 'सेक्रेड गेम्स' और 'क्रिमिनल जस्टिस' में भी अपनी एक्टिंग का जलवा दिखाया।
Continue reading on the app
नया मोबाइल सिम कनेक्शन लेने के लिए अब डिजिटल KYC या e-KYC की प्रोसेस अनिवार्य कर दी गई है। इसके साथ ही सरकार ने आम उपभोक्ताओं के लिए बल्क सिम कार्ड जारी करने पर भी सख्त रोक लगा रखी है। टेलिकॉम डिपार्टमेंट (DoT) के नियमों के मुताबिक, कोई भी एक व्यक्ति अपने नाम पर आधार कार्ड से अधिकतम 9 मोबाइल कनेक्शन रख सकता है। यह नियम कनेक्शनों को रेग्युलेट करने के लिए बनाया गया था, लेकिन आधार डिटेल्स के बढ़ते गलत इस्तेमाल को देखते हुए अब समय-समय पर यह चेक करना जरूरी हो गया है कि आपकी पहचान पर कितने सिम एक्टिव हैं। धोखाधड़ी का खतरा क्यों बढ़ा? टेलिकॉम कंपनियां नया सिम कार्ड जारी करने के लिए आधार को एक वैध पहचान और पते के दस्तावेज के रूप में स्वीकार करती हैं। इससे आधार आधारित वेरिफिकेशन तो आसान हो जाता है, लेकिन अगर आपकी आईडी किसी गलत हाथों में पड़ जाए तो बड़ा जोखिम खड़ा हो सकता है। जालसाज कथित तौर पर किसी दूसरे व्यक्ति के पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके सिम कार्ड खरीद लेते हैं। इसके बाद इन नंबरों का इस्तेमाल फर्जी कॉल्स, एसएमएस, सोशल मीडिया अकाउंट्स या फाइनेंशियल फ्रॉड के लिए किया जाता है। टेलीकॉम विभाग के संचार साथी से ऐसे चेक करें ऐसे चेक करें आपके आधार से लिंक मोबाइल नंबर सुरक्षा जांच की जरूरत क्यों पड़ी? क्या है TAFCOP? टेलीकॉम एनालिटिक्स फॉर फ्रॉड मैनेजमेंट एंड कंज्यूमर प्रोटेक्शन (TAFCOP) दूरसंचार विभाग की एक पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों के नाम पर चल रहे फर्जी सिम कनेक्शनों की पहचान करना और डिजिटल फ्रॉड से सुरक्षा देना है। जरूरी नियम: एक भारतीय नागरिक अधिकतम 9 सिम कार्ड (असम और पूर्वोत्तर राज्यों/जम्मू-कश्मीर के लिए सीमित मामलों में 6) अपने नाम रख सकता है।
Continue reading on the app