डिजिटल युग के 10 मासाब, विकास दिव्यकीर्ति से लेकर प्रो. एच सी वर्मा तक के बारे में जानिए, जिन्होंने पढ़ाई का तरीका बदल दिया
Modern Age Teacher: पहले के जमाने में महान शिक्षकों की कमी नहीं थी लेकिन तब डिजिटल युग नहीं था. इसलिए ऐसे शिक्षक अपनी ही जगह पॉपुलर होते थे. आज जमाना 360 डिग्री पर घूम गया है. इस अथाह, अनकंट्रोल्ड डिजिटल सागर में कौन कब किस तरह, कहां से निकल जाए किसी को पता नहीं होता. हालांकि इस गलाकाट प्रतिद्वंद्विता में खुद को स्थापित करना बेहद दुरुह है पर कोरोना के बाद कुछ बेहद प्रतिभाशाली शिक्षकों की भी आमद हुई है जिन्होंने अपनी अलग शैली से पढ़ाई का तरीका बदल दिया है. आज किसी महंगे कोचिंग सेंटर के बजाय लाखों छात्र हाथ में मोबाइल थामे यूट्यूब वाले नए मासाब से पढ़कर देश की सबसे कठिन परीक्षाएं क्रैक कर रहे हैं. डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के गंभीर तर्कों से लेकर खान सर के देसी अंदाज़ और अलख पांडे के क्रांति तक, जानिए देश के उन 10 डिजिटल गुरुओं की कहानी, जिन्होंने पढ़ाई के पारंपरिक तरीके को हमेशा-हमेशा के लिए बदलकर भारत की शिक्षा व्यवस्था में नया इतिहास रच दिया है.
6 साल से घर की छत पर लहलहा रहा किचन गार्डन, सब्जियों के छिलके और चावल की भूसी से बनी खाद का कमाल
Organic Fertilizer From Kitchen Waste: मेदिनीनगर की अनु दुबे सब्जियों के अवशेष, चावल की भूसी व मिट्टी से जैविक खाद बनाती हैं. वे 6 साल से छत पर किचन गार्डन में इसका इस्तेमाल कर रही हैं. इसे तैयार करते समय बस कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए फिर बेहतरीन खाद तैयार होती है.
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