रिपोर्ट-पुतिन को जंग खत्म करने पर सत्ता जाने का डर:डोनबास पर कब्जा जरूरी, इसके बिना लड़ाई रोकी तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाएगा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” पुतिन का मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को मिलाकर डोनबास कहा जाता है। रूस का डोनबास के करीब 90% हिस्से पर कंट्रोल है। पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस का खर्च लगातार बढ़ रहा है। युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। पांच साल की जंग के बाद लोगों की नाराजगी बढ़ी द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों में अब यह सवाल उठने लगा है कि करीब पांच साल तक युद्ध लड़ने के बाद आखिर देश ने हासिल क्या किया। चिंता सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध के नतीजे की नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे इस युद्ध की कीमत को लेकर भी है। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” यानी सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं हैं और लोगों को दिखाई देने लगी हैं। फिर भी पुतिन की सत्ता पर पकड़ मजबूत है। रूस के पास युद्ध जारी रखने के लिए पैसा और विरोध को दबाने का मजबूत सिस्टम मौजूद है। लेकिन द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, राजनीति में हिंसा को लोग सह सकते हैं, लेकिन नाकामी को नहीं। डोनबास को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच फंसा है मामला रूस पूरे डोनबास पर कब्जा चाहता है, लेकिन यूक्रेन अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते में यह सबसे बड़ी अड़चनों में से एक बना हुआ है। रूस डोनबास को बेहद अहम मानता है और इन्हें छोड़ना नहीं चाहता। पुतिन पहले ही कह चुके हैं कि शांति समझौते के लिए यूक्रेन को रूस के कब्जे वाले इलाकों पर अपना दावा छोड़ना होगा। साथ ही उसे इन इलाकों को रूस का हिस्सा मानना होगा। 2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग रूस और यूक्रेन के बीच जंग फरवरी 2022 में शुरू हुई। रूस ने यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया और तभी से दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी है। रूस के पास यूक्रेन के करीब 20% इलाके पर कब्जा है। इस युद्ध में हजारों नागरिकों और सैनिकों की मौत हुई है, जबकि लाखों यूक्रेनियन अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। जून 2023 तक करीब 80 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर दूसरे देशों में चले गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प युद्ध खत्म कराने के लिए रूस और यूक्रेन के नेताओं के साथ बातचीत कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात की थी। यह करीब 80 साल में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी। ------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन- घरों के बीच छिपे हथियार डिपो पर रूसी हमला:गोला-बारूद, बारूदी सुरंगें और ड्रोन फटे, 37 की मौत, 130 घरों को नुकसान रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव के पास शनिवार को एक हथियार डिपो पर ड्रोन हमला किया। हमले के बाद डिपो में रखे गोले, बारूदी सुरंगें और ड्रोन फटने लगे। इस घटना में कम से कम 37 लोगों की मौत हुई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Relationship Tips: रिश्तों को छोटी-छोटी बातें बनाते है मजबूत; समझ ले बारीकियां; रिलेशनशिप रहेंगे मधुर
- क्या आपको अकसर लगता है कि आप लोगों के लिए जितना करती हैं, उनकी तरफ से उसका पचास फीसदी भी आपको नहीं हासिल होता?
- क्या आपको लगता है कि लोग आपको जानबूझकर नजरअंदाज करते हैं या प्यार नहीं करते?
- क्या आपको अपने आस-पास का हर दूसरा-तीसरा व्यक्ति निहायत स्वार्थी, चतुर और घुन्ना लगता है?
Relationship Tips: अगर आप ऐसा महसूस करती हैं तो आपको मानवीय स्वभाव और लोकाचार से जुड़ी कुछ बारीकियों को समझना होगा। भगवान बुद्ध ने कहा है, ‘हजार लड़ाइयां जीतने की कोशिश करने से अच्छा है आप खुद अपने मन को नियंत्रित कर लें।’ सवाल यह है कि लोगों के प्रति आप पूर्वाग्रहों से उबर कर कैसे सबसे मधुर और मजबूत रिश्ते बनाकर रखें, इसके लिए किन बातों का ध्यान रखें।
रिश्तों पर करें मेहनत
किसी से रिश्ते मधुर ना हों, मनमुटाव हो तो अपने सही व्यवहार से रिश्ते सुधारे जा सकते हैं ना कि भाग्य के भरोसे छोड़ दिया जाए। आपको अपने रिश्तों को सुधारने के लिए एक गंभीरता के साथ मेहनत करनी होगी, जैसे लोग अपनी प्रोफेशनल या बिजनेस लाइफ में क्लाइंट के साथ रिश्तों को अच्छे बनाए रखने के लिए करते हैं। समझदारी और सूझबूझ से आप विपरीत स्वभाव वाले लोगों से भी अच्छे रिश्ते बना रख सकती हैं।
समझें मानवीय स्वभाव
लोगों से अपने मधुर रिश्ते बनाए रखने के लिए आपको सबसे पहले यह समझना होगा कि हर व्यक्ति के अपने अलग गुण, अपनी रुचि और अपना स्वभाव होता है, जो उसे दूसरों से अलग व्यक्तित्व प्रदान करता है। हर किसी की अपनी एक सोच होती है, इच्छाएं, उम्मीदें होती हैं। इसी के अनुसार वह लोगों के साथ व्यवहार करता है। आपको लोगों की इस यूनीकनेस यानी खास व्यक्तित्व का सम्मान करना आना चाहिए, यह रिश्तों को अच्छा बनाए रखने के लिए जरूरी है।
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ज्यादा ना करें उम्मीदें
हम सभी किसी से कोई भी संबंध या रिश्ता इसलिए बनाते या रखते हैं, क्योंकि इससे हमें सुकून और खुशी मिलती है या फिर कहीं ना कहीं कोई फायदा भी होता है। हम इस दुनिया में अकेले नहीं रह सकते। हम एक सामाजिक प्राणी हैं, इसलिए हमारा दूसरों की तरफ झुकाव होता ही है। इससे एक मानसिक शांति मिलती है। लेकिन समस्या तब आती है, जब हम एकतरफा फायदे की सोचने लगते हैं या फिर हम लोगों से बहुत ज्यादा उम्मीदें करने लगते हैं, उनसे जरूरत से ज्यादा फेवर लेने या पैसा, प्रशंसा या दूसरी चीजों की चाहत करने लगते हैं। जब हमारी मानसिकता रिश्तों का फायदा उठाने और दोहन करने की हो जाती है, तो जो लोग हमारे लिए इतना कुछ कर रहे होते हैं, उनसे हम और ज्यादा की उम्मीदें करने लगते हैं। इसकी परिणति रिश्तों में दूरियां लाती हैं, खटास पैदा करती है। अंत में रिश्ते टूट भी जाते हैं। इसलिए जितना आप दूसरों से लेने की चाहत रखें,उतना ही देने का भी चाहत रखें। रिश्तों की गाड़ी हमेशा टू वे पर सुगमता से चलती है, यह बात हमें समझनी चाहिए।
देने का भाव जागृत करें
अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए आप अपने दिलोदिमाग को विस्तार दीजिए। लोगों से अपने संबंधों के दायरे को बड़ा कीजिए। अपने परिवार, सोसाइटी, मोहल्ले, वर्कप्लेस के लोगों के लिए कुछ अच्छा कीजिए। उनके दुख-सुख में काम आएं, उनकी किसी मुसीबत के समय उन्हें हिम्मत बंधाएं। कहने का मतलब लोगों के प्रति सहानुभूति रखने की आदत बनाएं। फिर देखिएगा, कैसे लोगों का प्यार और स्नेह आपको मिलता है, लोगों से आपके रिश्ते इंप्रूव होते हैं। आपको धीरे-धीरे पता चलेगा कि जो प्यार आपने बांटा है, अपना समय और ऊर्जा लगाई है, वह आपको किस प्रकार आंतरिक खुशी दे रही है। आपके रिश्तों को मधुर और प्रगाढ़ बना रही है।
जो जैसा है, उसे वैसा ही स्वीकार करें
लोगों को आप उसी तरह स्वीकार करें, जैसे वे हैं। उन्हें अपनी तरह बनाने की कोशिश ना करें। आप उनकी तरह बन सकें तो ठीक है, वरना समझ लें कि वे अपने स्वभाव के मुताबिक ही आचरण करेंगे। रिश्तों को प्रगाढ़ और मधुर बनाने वाला यह फार्मूला दांपत्य संबंधों के निर्वाह में भी कारगर साबित होता है। जब आप ऐसा करती हैं तो धीरे-धीरे आपको लोगों के सकारात्मक गुण नजर आने लगते हैं। आप उनकी बुराइयों या नकारात्मकता को नजरअंदाज करने लगती हैं। जाहिर है, इससे आपके मन में उनके प्रति चिढ़न या कुढ़न बंद हो जाती है, इससे रिश्ते बेहतर होने लगते हैं, हमेशा बने रहते हैं।
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