Sweet Potato Recipes: सर्दियों में शकरकंद की ये रेसिपी है सबसे बेस्ट, जानें व्यंजन विधि
Sweet Potato Recipes: इन दिनों शकरकंद खूब मिल रहे हैं। इनको उबालकर तो खाया ही जाता है, इनसे कई तरह के स्वादिष्ट व्यंजन भी बनाए जा सकते हैं। यहां हम आपको बता रहे हैं, शकरकंद से तैयार होने वाले कुछ स्वादिष्ट व्यंजनों की रेसिपी। इन्हें बनाना भी आसान है।
शकरकंद करी
सामग्री: बड़े आकार का शकरकंद-1, बारीक कटा टमाटर-आधा कप, बारीक कटी हरी मिर्च-1 छोटा चम्मच, अजवायन- आधा छोटा चम्मच, हल्दी पावडर-आधा छोटा चम्मच, जीरा-आधा छोटा चम्मच, हींग-चुटकी भर, धनिया पावडर-1 छोटा चम्मच, गरम मसाला-आधा छोटा चम्मच, लाल मिर्च पावडर-आधा छोटा चम्मच, नमक-स्वादानुसार, तेल-2 बड़े चम्मच
विधि: सबसे पहले शकरकंद को छीलकर लंबाई में 4 फांकें करके टुकड़ों में काट लें। प्रेशर कुकर में तेल गर्म करके जीरा, हींग और अजवायन डालकर मीडियम फ्लेम पर भूनें। कटी हरी मिर्च, कटा अदरक और कटा टमाटर मिलाकर भूनें। कुछ देर बाद शकरकंद के टुकड़े और 2 गिलास पानी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। प्रेशर कुकर का ढक्कन लगाकर 4-5 सीटी आने तक या शकरकंदी सॉफ्ट होने तक पकाएं। हल्दी पावडर, धनिया पावडर, लाल मिर्च पावडर और नमक मिलाकर 2 मिनट और पकाकर गैस बंद कर दें। गरम मसाला मिलाकर अदरक और कटा हरा धनिया डालकर सर्व करें।
शकरकंद चॉप्स
सामग्री: बड़े आकार के शकरकंद-2, मैश किया पनीर-2 बड़े चम्मच, बेसन के बारीक सेव-चौथाई कप, चावल का आटा-2 बड़े चम्मच, बारीक कटा प्याज-2 बड़े चम्मच, कद्दूकस किया अदरक-1 छोटा चम्मच, बारीक कटी हरी मिर्च-2, बारीक कटा हरा धनिया-1 बड़ा चम्मच, अमचूर पावडर-आधा छोटा चम्मच, पिसी लाल मिर्च-आधा छोटा चम्मच, अनारदाना पावडर-1 छोटा चम्मच, नमक-स्वादानुसार, तेल-सेंकने के लिए
विधि: शकरकंद को छीलें और कद्दूकस करके बॉउल में निकाल लें। अब आधी बेसन सेव और तेल छोड़कर बाकी सारी सामग्री इसमें अच्छी तरह मिलाएं। हथेली पर तेल लगाकर मनचाहे आकार के चॉप्स बना लें। तवा गर्म करें। इस पर थोड़ा तेल लगाएं और चॉप्स को मध्यम आंच पर दोनों ओर से सुनहरी होने तक सेक लें। इन पर बेसन सेव डालकर टोमेटो कैचअप के साथ गरम-गरम सर्व करें।
शकरकंद रबड़ी
सामग्री: शकरकंद-2 मध्यम आकार के, दूध-3 कप, मिल्क पावडर-2 बड़े चम्मच, पिसी चीनी-आधा कप, बारीक कटा पिस्ता-1 छोटा चम्मच, किशमिश-1 बड़ा चम्मच, इलायची पावडर-आधा छोटा चम्मच, घी-2 बड़े चम्मच
विधि: शकरकंद को धोकर छील लें। इनके टुकड़े करके थोड़े दूध के साथ मिक्सी में डालकर पेस्ट बना लें। कड़ाही में घी डालकर गर्म करके शकरकंद का पेस्ट डालकर चलाते हुए भूनें। हल्का ब्राउन होने पर दूध मिलाकर धीमी आंच पर चलाते हुए पकाएं। फिर इसमें मिल्क पावडर मिला लें। दूध गाढ़ा होने पर पिसी चीनी और इलायची पावडर मिलाकर चलाते हुए पकाएं। रबड़ी जैसी कंसिसटेंसी होने पर आंच बंद कर दें। स्वादिष्ट रबड़ी तैयार है। इसको बाउल में डालें और कटे पिस्ते, किशमिश से गार्निश करके सर्व करें।
शकरकंद पैनकेक
सामग्री: छीलकर कद्दूकस की शकरकंद-1 कप, सूजी-आधा कप, दही-चौथाई कप, बारीक कटा हरा धनिया-1 बड़ा चम्मच, बारीक कटा अदरक-1 छोटा चम्मच, बारीक कटी हरी मिर्च-1 छोटा चम्मच, लाल मिर्च पावडर-आधा छोटा चम्मच, चाट मसाला-1 छोटा चम्मच, अनारदाना पावडर-1 छोटा चम्मच, अमचूर पावडर-1 छोटा चम्मच, हींग-चुटकी भर, जीरा-आधा छोटा चम्मच, बेकिंग सोडा-आधा छोटा चम्मच, काला नमक-आधा छोटा चम्मच, नमक-स्वादानुसार, तेल-1 बड़ा चम्मच
विधि: कद्दूकस की हुई शकरकंद को 1 गिलास पानी के साथ प्रेशर कुकर में 1 सीटी आने तक उबालें। ठंडा करके पानी निचोड़कर उसको एक बाउल में डालें। तेल और बेकिंग सोडा छोड़कर बाकी सारी सामग्री इसमें डालकर अच्छी तरह मिला लें। आवश्यकतानुसार थोड़ा पानी मिलाकर गाढ़ा घोल बनाएं और दस मिनट के लिए रख दें। पैनकेक बनाने वाले पैन को मध्यम आंच पर गर्म करके प्रत्येक खांचें में तेल लगा लें। अब शकरकंद के मिश्रण में बेकिंग सोडा मिलाकर पैन के खांचों में भर दें। ऊपर से थोड़ा-थोड़ा तेल लगा दें। 2-3 मिनट बाद उलट-पलट कर इन्हें दोनों ओर से सुनहरी होने तक सेक लें। शकरकंद पैनकेक तैयार है। इन्हें हरी चटनी और टोमेटो कैचअप के साथ गरम-गरम परोसें।
शकरकंद टिक्का
सामग्री: बड़े आकार का शकरकंद-1, चक्का दही-डेढ़ कप, टमाटर-1 मध्यम आकार का, शिमला मिर्च-1 मध्यम आकार की, हरी मिर्च-अदरक पेस्ट-1 छोटा चम्मच, बारीक कटा हरा धनिया-1 बड़ा चम्मच, कॉर्न फ्लोर-2 बड़े चम्मच, ओरिगैनो-1 छोटा चम्मच, कुटी काली मिर्च-आधा छोटा चम्मच, काला नमक-चौथाई छोटा चम्मच, नमक-स्वादानुसार, लाल मिर्च फ्लेक्स-आधा छोटा चम्मच, तेल-1 छोटा चम्मच
विधि: दही को एक पतले कपड़े में बांधकर 2-3 घंटों के लिए लटका दें। शकरकंद को पोंछकर 2 सीटी आने तक कुकर में उबाल लें। ठंडी होने पर इसे छीलकर बड़े-बड़े टुकड़ों में काटकर रख लें। इसी तरह टमाटर और शिमला मिर्च के भी टुकड़े करके इनके बीच का गूदा निकाल दें। अब एक बाउल में दही और बाकी सारी सामग्री डालकर अच्छी तरह मिला लें। फिर शकरकंद, शिमला मिर्च और टमाटर के टुकड़े इसमें डालकर अच्छे से मिलाएं, जिससे दही का मिश्रण इन पर ठीक से लग जाए। इस बाउल को एक घंटे के लिए फ्रिज में रखें। फिर इन सभी टुकड़ों को सलाइयों में पिरोकर मध्यम फ्लेम पर घुमाते हुए सेकें और प्लेट में निकाल लें। इन पर कटा हरा धनिया डालकर गरम-गरम शकरकंद टिक्का सर्व करें।
भगवान को मिश्री का भोग लगाना क्यों माना जाता है शुभ? जानें इसका धार्मिक महत्व और परंपरा
Puja me mishri bhog ka mahatva: हिंदू धर्म में मिश्री यानी रॉक शुगर को अत्यंत पवित्र और शुद्ध मानी जाने वाली मिठास का प्रतीक माना जाता है, इसी वजह से इसे भगवान के भोग में शामिल करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। मान्यता है कि साधारण चीनी की तुलना में मिश्री को अधिक शुद्ध और सात्विक माना जाता है, इसी वजह से पूजा में इसका इस्तेमाल विशेष रूप से प्रचलित है। यही कारण है कि तुलसी और पंचामृत के साथ मिश्री अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
मिश्री को क्यों माना जाता है पवित्र?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, मिश्री को बिना किसी रासायनिक प्रक्रिया के तैयार की गई प्राकृतिक मिठास का प्रतीक माना जाता है, इसी वजह से इसे शुद्धता की दृष्टि से सबसे उत्तम भोग सामग्री बताया गया है। मान्यता है कि भगवान को अर्पित किया जाने वाला भोग जितना शुद्ध और सात्विक होता है, उतना ही अधिक फलदायी माना जाता है। कथाओं में यह भी उल्लेख मिलता है कि तुलसी और मिश्री का संयोजन भगवान विष्णु को विशेष रूप से प्रिय है, इसी वजह से इसे "चरणामृत" के साथ भी अर्पित किया जाता है।
मिश्री अर्पित करने की परंपरा
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, सत्यनारायण कथा, एकादशी व्रत और अन्य विशेष पूजा-अनुष्ठानों में भगवान को मिश्री का भोग लगाना अनिवार्य माना जाता है। मान्यता है कि पूजा के बाद इसी मिश्री को प्रसाद के रूप में भक्तों में बांटा जाता है, जिससे सभी को भगवान की कृपा का लाभ मिलता है। इसके अलावा कुछ परंपराओं में जन्मदिन या किसी शुभ समाचार के अवसर पर भी मिश्री बांटने की प्रथा है, जिसे खुशी और मिठास बांटने का प्रतीक माना जाता है।
मिश्री के स्वास्थ्य लाभ भी हैं खास
धार्मिक महत्व के साथ-साथ मिश्री को आयुर्वेद में भी अत्यंत गुणकारी माना जाता है। मान्यता है कि साधारण चीनी की तुलना में मिश्री पाचन तंत्र के लिए अधिक लाभकारी होती है और गले की खराश व खांसी में भी राहत देने में सहायक मानी जाती है। इसके अलावा इसे शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करने वाला भी बताया जाता है।
किन अवसरों पर होता है मिश्री का खास इस्तेमाल
हिंदू परंपरा में सत्यनारायण भगवान की कथा, तुलसी पूजा, एकादशी व्रत और जन्माष्टमी जैसे पर्वों पर मिश्री का भोग विशेष रूप से लगाया जाता है। मान्यता है कि इन अवसरों पर मिश्री और तुलसी का संयोजन अर्पित करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।
आज भी हर शुभ अवसर पर बांटी जाती है मिश्री
समय के साथ भले ही पूजा-पाठ के तरीकों में कुछ बदलाव आया हो, लेकिन भगवान को मिश्री अर्पित करने और इसे प्रसाद के रूप में बांटने की यह परंपरा आज भी उतनी ही श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। आज भी कई घरों और मंदिरों में मिश्री को शुद्धता और मिठास के प्रतीक के रूप में विशेष सम्मान दिया जाता है।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक ग्रंथों और लोक-परंपराओं पर आधारित है। Haribhoomi.com इनकी किसी भी तरह की सटीकता या तथ्य की पुष्टि नहीं करता है। इन्हें केवल सामान्य जानकारी के तौर पर प्रस्तुत किया जा रहा है।
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