CJP Protest | Swatantra Bhardwaj पर क्या बोले Chirag Paswan | Swatantra Bhardwaj Podcast | CJP
Union Minister Chirag Paswan has taken strict legal action against Swatantra Bhardwaj, following his viral podcast where he claimed political backing. Chirag Paswan has lodged an official complaint with the Delhi Police, denying any personal ties and demanding immediate justice for the victim. Watch the full coverage. #ChiragPaswan #SwatantraBhardwaj #DelhiPolice #BreakingNews #TrendingNews #JantarMantarCase #NishuAzad #LatestNews #HindiNews ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ Disclaimer: Republic Media Network may provide content through third-party websites, operating systems, platforms, and portals (‘Third-Party Platforms’). Republic does not control and has no liability for Third-Party Platforms, including content hosted, advertisements, security, functionality, operation, or availability. ------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------------ रिपब्लिक भारत देश का नंबर वन न्यूज चैनल है। देश और दुनिया की जनहित से जुड़ी ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल और मनोरंजन की खबरों का खजाना है । इस खजाने तक पहुंचने के लिए रिपब्लिक भारत से जुड़े रहिए और सब्सक्राइब करिए। ► http://bit.ly/RBharat R. Bharat TV - India's no.1 Hindi news channel keeps you updated with non-stop LIVE and breaking news. Watch the latest reports on political news, sports news, entertainment, and much more. आप Republic Bharat से जुड़ें और अपडेट्स पाएं! ???? Facebook: https://www.facebook.com/RepublicBharatHindi/ ???? Twitter: https://twitter.com/Republic_Bharat ???? Instagram: https://www.instagram.com/republicbharat/ ???? WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Va7GPTi7dmecQ2LFH01I ???? Telegram: https://t.me/RepublicBharatHindi ???? LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/republic-bharat/
Nepal Flood: नेपाल में भीषण बाढ़ से अबतक 939 मौतें, 3,925 लापता; भारत में मिले 17 शव
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। आपदा प्राधिकरण के मुताबिक, सोमवार तक बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में कम से कम 939 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 3,925 लोग लापता हैं। बचाव अभियान का सोमवार को छठा दिन था।
चीन के सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तिब्बत में भी इस आपदा के कारण 16 लोगों की मौत हुई है और 546 लोग लापता बताए गए हैं। इस तरह नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या कम से कम 955 और लापता लोगों की संख्या 4,471 हो गई है।
नेपाल में 592 विदेशी नागरिक भी लापता
नेपाल की लापता लोगों की सूची में 592 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले श्रमिकों के लापता होने का आंकड़ा भी अपडेट किया गया है। सोमवार को ऐसे लापता श्रमिकों की संख्या 639 बताई गई, जबकि पहले यह आंकड़ा 933 था।
नेपाल की आपदा एजेंसी के अनुसार, 3,333 नेपाली नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। नुवाकोट जिले में सबसे ज्यादा 1,158 लोग लापता हैं। इसके पड़ोसी रसुवा जिले में 865 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों में 45 नेपाली सेना के जवान, 38 पुलिसकर्मी और 18 सीमा शुल्क एवं आव्रजन विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं।
भारत में नदियों से मिले 17 शव
नेपाल की बाढ़ का असर पड़ोसी भारत तक भी पहुंचा है। उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल से होकर आने वाली नदियों से अब तक 17 शव बरामद किए गए हैं। आशंका है कि ये शव बाढ़ में बहकर आए लोगों के हो सकते हैं। फिलहाल इनकी पहचान की कोशिश की जा रही है। इन 17 शवों को नेपाल के आधिकारिक मृतक आंकड़े में शामिल नहीं किया गया है।
पीएम बलेंद्र शाह ने जलवायु परिवर्तन से जोड़ा संकट
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने इस आपदा को सामान्य बाढ़ मानने से इनकार करते हुए इसे हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिम से जोड़कर देखा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु परिवर्तन के खिलाफ और अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत बताई।
प्रधानमंत्री शाह के मुताबिक, रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में आया सैलाब सामान्य बाढ़ नहीं था। उनके अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और हिमस्खलन से जुड़ी घटना ने इस आपदा को जन्म दिया।
ग्लेशियल कोलैप्स से आई तबाही
बताया गया है कि चीन-नेपाल सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से भारी मात्रा में बर्फ, पानी और मलबा नीचे की ओर आया। इसके चलते अचानक आई बाढ़ ने रास्ते में आने वाले इलाकों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया।
ग्लेशियर के ढहने की सटीक वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि वैज्ञानिक लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे हिमालय जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है।
नेपाल अपेक्षाकृत कम ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन करने के बावजूद जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के लिहाज से दुनिया के संवेदनशील देशों में शामिल है। मौजूदा आपदा के बाद वहां बड़े पैमाने पर राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण की चुनौती खड़ी हो गई है।
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