ग्वालियर में भारी बारिश की चेतावनी के बीच 5 सितंबर को नर्सरी से 8वीं तक के छात्रों की छुट्टी, आदेश जारी
मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश का दौर शुरू हो गया है। शुक्रवार को भी कई इलाकों में तेज बारिश हुई, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। लगातार हो रही बारिश के कारण नदियों और जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं कई जिलों के निचले इलाकों में पानी भरने से बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।
बता दें कि ग्वालियर जिले में भी तेज बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस बीच, मौसम विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी भारी बारिश की चेतावनी और जिले में अत्यधिक बारिश की संभावना को देखते हुए ग्वालियर जिले में 5 सितंबर को आंगनबाड़ी केंद्रों तथा नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।
केवल छात्र-छात्राओं के लिए अवकाश
आदेश के अनुसार जिले में संचालित सभी शासकीय, अशासकीय, CBSE, ICSE, माध्यमिक शिक्षा मंडल तथा अन्य सभी बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में नर्सरी से कक्षा 8वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिए 5 सितंबर 2026 को अवकाश रहेगा।
बता दें कि जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और अन्य स्टाफ नियमित समय पर उपस्थित रहेंगे तथा अपने निर्धारित शासकीय कार्यों का निर्वहन करेंगे। साथ ही यह भी कहा गया है कि पूर्व निर्धारित महत्वपूर्ण गतिविधियां एवं परीक्षाएं, यदि कोई हों, तो अपने तय कार्यक्रम के अनुसार यथावत संचालित की जाएंगी।
5 सितंबर को इन जिलों में येलो अलर्ट जारी
बता दें कि मौसम विभाग ने 5 सितंबर को मध्य प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इनमें रायसेन, सीहोर, राजगढ़, देवास, शाजापुर, आगर, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, रीवा, सतना, पन्ना और दमोह जिले शामिल हैं। मौसम विभाग ने इन जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है।
ग्वालियर से अतुल सक्सेना की रिपोर्ट
जन्माष्टमी पर ‘कान्हा’ को मिला नया जीवन, नीमच में छुट्टी के दिन हुआ पहला इमरजेंसी ऑर्थो ऑपरेशन
जन्माष्टमी के दिन नीमच से आई एक खबर ने सभी के दिल को जीत लिया। दरअसल जिला चिकित्सालय में एक गंभीर रूप से घायल मासूम को जन्माष्टमी के शासकीय अवकाश के दिन भी समय पर इलाज मिला। बच्चे का नाम ‘कान्हा’ था और वह कोहनी के पास गंभीर फ्रैक्चर के साथ अस्पताल पहुंचा था। चोट के कारण हाथ में अत्यधिक सूजन, लालिमा, त्वचा पर ब्लिस्टरिंग और नाड़ी कमजोर महसूस हो रही थी। वहीं स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत इमरजेंसी में लेकर ऑपरेशन करने का फैसला लिया।
दरअसल शासकीय अवकाश होने के बावजूद अस्थिरोग विभाग, एनेस्थीसिया टीम और ऑपरेशन थिएटर का स्टाफ तत्काल सक्रिय हुआ। बच्चे का Supracondylar Humerus Fracture का सफल ऑपरेशन किया गया। बता दें कि यह जिला चिकित्सालय, नीमच में मेडिकल कॉलेज के अस्थिरोग विभाग द्वारा किया गया पहला इमरजेंसी ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन भी रहा।
मेडिकल कॉलेज की पहली इमरजेंसी ऑर्थोपेडिक सर्जरी
इस ऑपरेशन का नेतृत्व अस्थिरोग विभागाध्यक्ष एवं असिस्टेंट मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. पुनीत कुमार आचार्य ने किया। उनके साथ सीनियर रेजिडेंट डॉ. अतुल सोलंकी ने सहयोग किया। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. कुणाल चौहान और डॉ. अवि शर्मा शामिल रहे। ऑपरेशन थिएटर में नर्सिंग ऑफिसर कल्पना मुछावत, सचिन भट्ट, ओटी टेक्नीशियन अमित यादव और नेहा अहिरवार के साथ सहयोगी स्टाफ कुलदीप और कैलाश ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई।
समय पर उपचार बेहद जरूरी था
डॉ. पुनीत कुमार आचार्य ने बताया कि गंभीर फ्रैक्चर और चोट के मामलों में समय पर विशेषज्ञ उपचार बेहद जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि जिला चिकित्सालय में अस्थिरोग की आपातकालीन शल्य चिकित्सा सेवाएं शुरू करने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। उनका कहना है कि आगे भी कोशिश रहेगी कि गंभीर चोट वाले मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही जरूरी सर्जरी और विशेषज्ञ इलाज मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में अस्थिरोग की इमरजेंसी और दूसरी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, ताकि नीमच और आसपास के मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर करने की जरूरत कम पड़े।
इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत करने की बात कही
वहीं मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. आदित्य बेरड़ ने कहा कि मरीजों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इमरजेंसी सेवाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है। उनके मुताबिक गंभीर मामलों में अलग-अलग विशेषज्ञ विभागों के समन्वय से तत्काल उपचार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र पाटिल ने भी कहा कि जिला चिकित्सालय की इमरजेंसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिले और उन्हें अनावश्यक रूप से बाहर रेफर न करना पड़े, इसके लिए विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सेवाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है।
कमलेश सारडा, नीमच
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