अडोबी ने भारतीय एआई स्टार्टअप रिलो को खरीदा:आमभाषा में लिखे निर्देशों से जटिल वर्कफ्लो टूल पर बड़ा दांव; ध्रुव-जॉर्जी ने किया था शुरू
अमेरिकी टेक दिग्गज अडोबी ने सिर्फ 11 महीने पुरानी इस भारतीय स्टार्टअप को खरीद लिया है। यह अडोबी की भारत में दूसरी जानी-मानी डील है। इससे पहले 2023 में उसने जनरेटिव एआई वीडियो कंपनी रीफ्रेज.एआई को खरीदा था। हालांकि नई डील कितने में हुई, इसकी जानकारी न तो अडोबी ने और न ही रिलो ने अब तक सार्वजनिक की है। रिलो को सितंबर 2025 में आईआईटी बॉम्बे के बैचमेट्स ध्रुव जगलान और जॉर्जी बॉबी ने शुरू किया था। शुरुआत में यह आम भाषा में लिखे निर्देशों से जटिल वर्कफ्लो बनाने वाला टूल था, जो गैर-तकनीकी यूजर्स के लिए भी सैकड़ों टूल्स पर काम करने वाले एआई एजेंट तैयार कर सकता था। धीरे-धीरे यह मार्केटिंग और जीटीएम (गो-टू-मार्केट) टीमों के लिए “एआई एम्प्लॉई’ प्लेटफॉर्म में बदल गया। जीटीएम टीम किसी कंपनी के प्रोडक्ट या सर्विस को बाजार में उतारने और ग्राहकों तक पहुंचाने का काम करती है। बहरहाल रिलो प्रतिस्पर्धी विश्लेषण, प्रॉस्पेक्टिंग, लिंक्डइन आउटरीच, रेडिट मार्केटिंग और कैंपेन रिसर्च जैसे काम संभालते हुए एंथ्रोपिक के क्लॉड कोवर्क का शुरुआती प्रतिद्वंद्वी तक बन गया। लोकप्रियता इतनी तेजी से बढ़ी कि लॉन्च के कुछ महीनों में रिलो 10,000 से ज्यादा यूजर्स जोड़ चुका था। डील के बाद सह-संस्थापक ध्रुव जगलान ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘रिलो अब अडोबी के साथ जुड़कर फॉर्च्यून 500 मार्केटर्स तक एआई पहुंचाने में मदद करेगा।’ डील के पीछे रणनीति साफ है- एजेंटिक एआई मार्केटिंग की रेस तेज हो चुकी है, एंथ्रोपिक अपना ‘क्लॉड फॉर मार्केटियर्स’ ला चुकी है और खुद अडोबी अप्रैल में सीएक्स एंटरप्राइज नाम से अपना एजेंटिक सिस्टम लॉन्च कर चुका है। ऐसे में कई साल लगाकर खुद टेक्नोलॉजी विकसित करने की बजाय अडोबी ने एक तैयार, तेजी से बढ़ती टीम और प्रोडक्ट को सीधे खरीदना बेहतर समझा। साथ ही आईआईटी जैसे संस्थानों के युवा एआई टैलेंट तक भी सस्ती और तेज पहुंच मिल गई। 945 करोड़ रु. के वैल्युएशन पर फंडिंग हासिल कर चुकी रिलो, डील का खुलासा नहीं रिलो को इससे पहले पीक एक्सवी, जी47/डीवीसी और डे जीरो वेंचर्स जैसे निवेशकों से करीब 945 करोड़ रुपए के वैल्युएशन पर फंडिंग मिली थी। इस स्टार्टअप से जुड़े लोगों के मुताबिक, यह डील पूरी कंपनी खरीदने की बजाय टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग और 6 सदस्यों वाली टीम को अडोबी में शामिल करने के तरीके से हुई है। यह अडोबी की मार्केटिंग-एआई खरीदारी की बड़ी लिस्ट में जुड़ी है। पिछले साल कंपनी ने 17,958 करोड़ रुपए में सेमरश के साथ भी ऐसी ही डील की थी।
लंदन पहुंचे Mohan Bhagwat, हिंदुत्व और भारत की संस्कृति पर खुलकर बोले RSS के Pramukh Sunil Ambekar
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत गुरुवार को लंदन पहुंच गए। यह उनके तीन देशों के दौरे का आखिरी पड़ाव है। इससे पहले वह अमेरिका और कनाडा का दौरा कर चुके हैं। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मौके पर यह दौरा संगठन के वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है।
मोहन भागवत के ब्रिटेन में रहने के दौरान भारतीय समुदाय के लोगों से मुलाकात और संवाद का कार्यक्रम है। सप्ताहांत में वह ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के एक बड़े कार्यक्रम को संबोधित कर सकते हैं।
सरकार के साथ लोगों के बीच संवाद भी जरूरी
आरएसएस के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि भारत और दूसरे देशों के बीच रिश्ते केवल सरकारों के स्तर पर होने वाली कूटनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं होने चाहिए। लोगों के बीच संवाद के साथ-साथ सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आरएसएस संस्कृति और सभ्यता पर आधारित दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है और ऐसे में वैश्विक स्तर पर लोगों के बीच संवाद बढ़ाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। आंबेकर ने बताया कि मोहन भागवत का यह दौरा इंटीग्रल नामक संगठन के निमंत्रण पर हो रहा है।
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पश्चिमी अकादमिक जगत में हिंदुत्व को लेकर क्या बोले आंबेकर?
लंदन में हिंदुत्व को लेकर पश्चिमी अकादमिक जगत में मौजूद धारणा पर सवाल पूछे जाने पर सुनील आंबेकर ने कहा कि इस विषय को लेकर कई गलतफहमियां हैं। उन्होंने कहा कि भारत को सिर्फ एक राजनीतिक राष्ट्र-राज्य की अवधारणा के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह एक सांस्कृतिक अवधारणा भी है। आंबेकर ने हिंदुत्व को किसी एक धर्म तक सीमित मानने से भी इनकार किया।
उनके मुताबिक, हिंदुत्व की अवधारणा सभी तरह की धार्मिक मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान और सत्य में विश्वास पर आधारित है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मोहन भागवत के इस दौरे से इन मुद्दों को समझने और गलतफहमियां दूर करने में मदद मिलेगी।
ब्रिटेन में कई लोगों और संगठनों से करेंगे मुलाकात
सुनील आंबेकर ने बताया कि इस सप्ताह मोहन भागवत सार्वजनिक जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों और अलग-अलग संगठनों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। उन्होंने बताया कि भागवत ने लंदन के विल्सडन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर का दौरा भी किया है। आंबेकर के अनुसार, इन मुलाकातों का उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच संवाद, सहयोग और लंबे समय के संबंधों को मजबूत करना है।
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310 संगठनों के समर्थन का दावा
आरएसएस के प्रचार प्रमुख ने दावा किया कि ब्रिटेन में 100 से ज्यादा संगठनों ने मोहन भागवत का स्वागत किया है और उनके कार्यक्रमों में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अलग-अलग समुदायों के नेताओं के साथ एक बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जिसे 310 संगठनों का समर्थन मिलने की बात कही गई है। आंबेकर ने कहा कि आरएसएस ब्रिटेन में अलग-अलग वर्गों और संगठनों के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
तीन देशों का दौरा क्यों अहम है?
आरएसएस के 100 साल पूरे होने के अवसर पर मोहन भागवत का अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन का दौरा संगठन के वैश्विक संपर्क अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान भारतीय प्रवासी समुदाय के साथ संवाद के अलावा भारत की संस्कृति, सभ्यता और आरएसएस की विचारधारा से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हो रही है।
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