High Protein Diet: प्रोटीन बढ़ाया और पेट ने दे दिया जवाब! गैस-फूलने की ये 5 वजहें जान लें, वरना बढ़ सकती है परेशानी
High Protein Diet: फिटनेस के लिए प्रोटीन बढ़ाना इन दिनों लोगों की पहली पसंद बन गया है। लेकिन अगर अंडे, पनीर, दाल या प्रोटीन पाउडर लेने के बाद पेट फूलने लगे, गैस परेशान करे और हर वक्त भारीपन महसूस हो, तो सिर्फ प्रोटीन को जिम्मेदार मानना सही नहीं है। आपकी डाइट की कुछ छोटी-सी गलतियां भी इस परेशानी की वजह बन सकती हैं।
1. प्रोटीन बढ़ाया, लेकिन फाइबर घटा दिया
कई लोग हाई प्रोटीन डाइट शुरू करते समय फल, सब्जियां और साबुत अनाज कम कर देते हैं। इससे शरीर को मिलने वाला फाइबर घट सकता है और कब्ज या पेट फूलने जैसी परेशानी हो सकती है।
क्या करें: प्रोटीन के साथ फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दूसरे फाइबर वाले खाद्य पदार्थ भी अपनी थाली में शामिल करें।
2. एकदम से बढ़ा दी प्रोटीन की मात्रा
अगर पहले आपकी डाइट में प्रोटीन कम था और अचानक इसकी मात्रा काफी बढ़ा दी, तो पाचन तंत्र को नए बदलाव के साथ तालमेल बैठाने में समय लग सकता है। इस दौरान गैस, पेट में गुड़गुड़ाहट और भारीपन महसूस हो सकता है।
3. पानी पीने में कर रहे हैं लापरवाही
हाई प्रोटीन डाइट के साथ पानी की जरूरत को नजरअंदाज करना भी पेट से जुड़ी परेशानी बढ़ा सकता है। खासकर जब डाइट में फाइबर भी बढ़ाया गया हो, तब पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।
4. प्रोटीन पाउडर से हो सकती है परेशानी
अगर प्रोटीन शेक लेने के बाद ही पेट फूलता है या गैस बनने लगती है, तो समस्या प्रोटीन से ज्यादा उसके किसी घटक से जुड़ी हो सकती है। कुछ लोगों को लैक्टोज या कुछ कृत्रिम मिठास जैसी सामग्री पचाने में परेशानी हो सकती है।
क्या करें: प्रोटीन पाउडर का लेबल देखें और अगर किसी खास उत्पाद के बाद बार-बार परेशानी हो रही है, तो उसके इस्तेमाल पर विशेषज्ञ से सलाह लें।
5. दाल और बीन्स भी बढ़ा सकते हैं गैस
दाल, बीन्स और कुछ अन्य पौधों से मिलने वाले प्रोटीन में ऐसे कार्बोहाइड्रेट और फाइबर होते हैं, जिन्हें आंतों के बैक्टीरिया तोड़ते हैं। इस प्रक्रिया में कुछ लोगों को ज्यादा गैस महसूस हो सकती है।
क्या करें: इन चीजों को पूरी तरह छोड़ने के बजाय जरूरत के हिसाब से कम-ज्यादा करें और देखें कि कौन-सा खाद्य आपको ज्यादा परेशान करता है।
ये आसान उपाय आएंगे काम
- एकदम से डाइट में बड़ा बदलाव न करें।
- फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाते रहें।
- शरीर में पानी की कमी न होने दें।
- जल्दी-जल्दी खाने के बजाय अच्छी तरह चबाकर खाएं।
(Disclaimer): यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी पर आधारित है। हर व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरत अलग होती है। लगातार पाचन संबंधी परेशानी होने पर डॉक्टर या योग्य आहार विशेषज्ञ की सलाह लें।
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Krishna Janmashtami 2026: कृष्ण जी के जन्मदिन पर जरूर करें कुंज बिहारी जी की आरती, पढ़ें लिरिक्स
Krishna Janmashtami 2026: आज यानी 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा है. देशभर में इस त्योहार को धूमधाम से मनाया जाता है. कई सालों के बाद ऐसा संयोग बन रहा है जब कान्हा जी का जन्म रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का महासंयोग बन रहा है. आज मथुरा, वृंदावन और इस्कॉन मंदिरों में जन्माष्टमी मनाई जा रही है. हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर कृष्ण जन्माष्टमी पड़ती है. आज भक्तों ने व्रत रखा होगा. रात्रि में 12 बजे के पश्चाच जब कान्हा का जन्म किया जाएगा तो व्रत का पारण किया जाएगा. जन्म के बाद उनकी पूजा की जाती है जिसमें आरती करने की परंपरा भी होती है. ऐसे में आज के दिन आपको कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए. चलिए पढ़ते हैं आरती कुंज बिहारी की... इस आरती के संपूर्ण लिरिक्स.
श्री कृष्ण जी की आरती (Shree Krishna Aarti Lyrics in Hindi)
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की।
गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली; भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चन्द्र सी झलक; ललित छवि श्यामा प्यारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै; बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग; अतुल रति गोप कुमारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा; बसी सिव सीस, जटा के बीच,
हरै अघ कीच; चरन छवि श्रीबनवारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू; हंसत मृदु मंद,चांदनी चंद,
कटत भव फंद; टेर सुन दीन भिखारी की॥
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥
आरती कुंजबिहारी की
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की
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पढ़ें कृष्ण चालीसा के लिरिक्स (Shree Krishna Chalisa Lyrics in Hindi)
बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।
अरुणअधरजनु बिम्बफल, नयनकमलअभिराम॥
पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पीताम्बर शुभ साज।
जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज॥
जय यदुनंदन जय जगवंदन।
जय वसुदेव देवकी नन्दन॥
जय यशुदा सुत नन्द दुलारे।
जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥
जय नट-नागर, नाग नथइया॥
कृष्ण कन्हइया धेनु चरइया॥
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो।
आओ दीनन कष्ट निवारो॥
वंशी मधुर अधर धरि टेरौ।
होवे पूर्ण विनय यह मेरौ॥
आओ हरि पुनि माखन चाखो।
आज लाज भारत की राखो॥
गोल कपोल, चिबुक अरुणारे।
मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥
राजित राजिव नयन विशाला।
मोर मुकुट वैजन्तीमाला॥
कुंडल श्रवण, पीत पट आछे।
कटि किंकिणी काछनी काछे॥
नील जलज सुन्दर तनु सोहे।
छबि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥
मस्तक तिलक, अलक घुंघराले।
आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥
करि पय पान, पूतनहि तार्यो।
अका बका कागासुर मार्यो॥
मधुवन जलत अगिन जब ज्वाला।
भै शीतल लखतहिं नंदलाला॥
सुरपति जब ब्रज चढ़्यो रिसाई।
मूसर धार वारि वर्षाई॥
लगत लगत व्रज चहन बहायो।
गोवर्धन नख धारि बचायो॥
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई।
मुख मंह चौदह भुवन दिखाई॥
दुष्ट कंस अति उधम मचायो॥
कोटि कमल जब फूल मंगायो॥
नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें।
चरण चिह्न दै निर्भय कीन्हें॥
करि गोपिन संग रास विलासा।
सबकी पूरण करी अभिलाषा॥
केतिक महा असुर संहार्यो।
कंसहि केस पकड़ि दै मार्यो॥
मात-पिता की बन्दि छुड़ाई।
उग्रसेन कहं राज दिलाई॥
महि से मृतक छहों सुत लायो।
मातु देवकी शोक मिटायो॥
भौमासुर मुर दैत्य संहारी।
लाये षट दश सहसकुमारी॥
दै भीमहिं तृण चीर सहारा।
जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥
असुर बकासुर आदिक मार्यो।
भक्तन के तब कष्ट निवार्यो॥
दीन सुदामा के दुख टार्यो।
तंदुल तीन मूंठ मुख डार्यो॥
प्रेम के साग विदुर घर मांगे।
दुर्योधन के मेवा त्यागे॥
लखी प्रेम की महिमा भारी।
ऐसे श्याम दीन हितकारी॥
भारत के पारथ रथ हांके।
लिये चक्र कर नहिं बल थाके॥
निज गीता के ज्ञान सुनाए।
भक्तन हृदय सुधा वर्षाए॥
मीरा थी ऐसी मतवाली।
विष पी गई बजाकर ताली॥
राना भेजा सांप पिटारी।
शालीग्राम बने बनवारी॥
निज माया तुम विधिहिं दिखायो।
उर ते संशय सकल मिटायो॥
तब शत निन्दा करि तत्काला।
जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥
जबहिं द्रौपदी टेर लगाई।
दीनानाथ लाज अब जाई॥
तुरतहि वसन बने नंदलाला।
बढ़े चीर भै अरि मुंह काला॥
अस अनाथ के नाथ कन्हइया।
डूबत भंवर बचावइ नइया॥
'सुन्दरदास' आस उर धारी।
दया दृष्टि कीजै बनवारी॥
नाथ सकल मम कुमति निवारो।
क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥
खोलो पट अब दर्शन दीजै।
बोलो कृष्ण कन्हइया की जै॥
दोहा
यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि।
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥
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