मैं किसी स्टार के पीछे नहीं भागता:निखिल आडवाणी बोले- 25 साल बाद मनोज बाजपेयी संग काम किया तो उन्होंने कहा- अब आए हो
वेब सीरीज ‘द रिवोल्यूशनरीज’ आजादी की लड़ाई के उन युवा क्रांतिकारियों की कहानी है, जिनके बारे में कम चर्चा हुई। यह सीरीज संजीव सान्याल की किताब ‘रेवोल्यूशनरीज: द अदर स्टोरी ऑफ हाउ इंडिया वॉन इट्स फ्रीडम’ पर आधारित है। दैनिक भास्कर से बातचीत में डायरेक्टर निखिल आडवाणी ने बताया कि ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के बाद उन्हें लगा कि ऐसी कहानियों में यूथ का नजरिया मिसिंग था। उन्होंने प्रतिभा रांटा की तारीफ करते हुए कहा कि अगर वह शो के लिए मना कर देतीं तो उनका दिल टूट जाता। निखिल ने मनोज बाजपेयी का किस्सा भी सुनाया, जिन्होंने 25 साल बाद साथ काम करने पर पूछा था- ‘अब आए हो?’ प्रतिभा ने किरदार की तैयारी और रोहित सराफ ने एक्शन को चुनौती बताया। सवाल: पहले भी आपने आजादी से जुड़ी कहानियां कही हैं। ‘द रिवोल्यूशनरीज’ में ऐसा क्या था, जो आपको पहले की कहानियों में मिसिंग लगा? जवाब/निखिल आडवाणी: मुझे लगा कि यूथ मिसिंग था। हमने भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, ऊधम सिंह और जलियांवाला बाग के बारे में बहुत पढ़ा है। लेकिन इनसे करीब 10 साल पहले भी एक समानांतर कहानी चल रही थी। रिसर्च करते हुए मुझे लगा कि इन युवाओं की कहानी भी बतानी चाहिए। उस समय के क्रांतिकारियों में एक अलग तरह का जुनून था। उन्होंने तय कर लिया था कि अंग्रेजों को भारत से बाहर निकालना है। कैसे करेंगे, यह बाद की बात थी। यही जुनून मुझे इस कहानी में सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। सवाल: प्रतिभा रांटा में आपको वह प्रतिभा कब नजर आई, जो इस किरदार के लिए जरूरी थी? अगर वह शो करने से मना कर देतीं तो क्या होता? जवाब/निखिल आडवाणी: मेरे लिए किसी एक्टर के पास जाना सिर्फ कास्टिंग नहीं है। मैं किसी कलाकार के पास तब तक नहीं जाना चाहता, जब तक मेरे पास उसके लिए ऐसा कुछ न हो, जिसमें वह पूरी तरह डूब सके। प्रतिभा के मामले में भी ऐसा ही था। मुझे पता था कि वह बहुत अच्छी एक्टर हैं, लेकिन यह समझना भी जरूरी था कि वह किरदार को किस तरह अपने अंदर उतारेंगी। हमने कई सीन्स पर महीनों चर्चा की। एक-एक लाइन पर बात की कि इसका मतलब क्या है और इसे किस तरह करना है। अगर प्रतिभा ने इस शो के लिए मना कर दिया होता, तो मैं सच में मेरा दिल टूट हो जाता। क्योंकि उन्होंने इस किरदार के लिए जो दिया है, वह बहुत खास है। मैं हमेशा मानता हूं कि एक एक्टर के अंदर यह चुनौती होनी चाहिए कि क्या मैं इस सीन को और बेहतर कर सकता हूं? क्या मैं इसे पेपर पर लिखे हुए सीन से आगे ले जा सकता हूं? अगर यह चुनौती नहीं है तो काम बोरिंग हो जाता है। सवाल: आपने कहा कि आप किसी कलाकार को सिर्फ इसलिए नहीं लेते कि वह बड़ा नाम है। मनोज बाजपेयी का 25 साल वाला किस्सा क्या है? जवाब/निखिल आडवाणी: मनोज बाजपेयी मुझसे करीब 25 साल से कहते रहे थे कि मेरे साथ काम करना है। जब मैं आखिरकार उनके पास ‘सत्यमेव जयते’ लेकर गया तो उन्होंने मुझसे कहा- ‘अब आए हो?’ मैं किसी बिजी स्टार के पीछे भागने में विश्वास नहीं करता। मेरे लिए जरूरी है कि मेरे पास उस कलाकार के लिए सही किरदार हो। मैं किसी एक्टर के पास सिर्फ इसलिए नहीं जाता कि वह बड़ा नाम है। मुझे ऐसा किरदार लेकर जाना होता है, जिसमें वह अपने दांत गड़ा सके और पूरी तरह डूब सके। यही बात प्रतिभा के साथ भी थी। मुझे उनके लिए सही किरदार मिला और फिर हमने साथ में उसे खोजा। सवाल: प्रतिभा, निखिल सर ने आपको किरदार किस तरह समझाया? जवाब/प्रतिभा रांटा: जब मैंने स्क्रिप्ट पढ़ी तो उसमें काफी कुछ पहले से मौजूद था, क्योंकि सर और उनकी टीम ने बहुत रिसर्च की थी। लेकिन प्रतिभा के बारे में ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए दूसरी क्रांतिकारी महिलाओं से भी प्रेरणा ली गई। मैंने भिकाजी कामा और बीबी गुलाब कौर जैसी महिलाओं के बारे में पढ़ा। मुझे फिल्म ‘लिटिल वुमन’ भी बहुत पसंद है और उससे भी मुझे प्रेरणा मिली। सर के साथ लगातार चर्चा होती थी कि प्रतिभा को किस तरह अप्रोच करना है। वह स्क्रीन पर सामान्य लड़की की तरह नहीं दिखती। उसमें आत्मविश्वास और आग है। वह बराबरी का हक मांगती है और अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटती। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन सा सीन आपके लिए सबसे खास रहा? जवाब/प्रतिभा रांटा: बाघा जतिन और प्रतिभा के बीच का एक सीन मेरे लिए बहुत खास है। उसमें प्रतिभा उनसे कहती है कि आपको किसने हक दिया कि आप हमारे बारे में फैसला करें? अगर आप अपने लिए फैसले ले सकते हैं तो हम क्यों नहीं ले सकते? उस सीन में प्रतिभा का नजरिया साफ दिखाई देता है। वह महिलाओं को बराबरी से देखती है और अपने फैसले खुद लेना चाहती है। निखिल आडवाणी: यह सीन सुबह करीब 5 बजे शूट हुआ था। शूटिंग में देरी हो गई थी और वह लोकेशन का आखिरी दिन था, इसलिए हम वापस भी नहीं आ सकते थे। प्रतिभा और मैं उस सीन पर महीनों से बात कर रहे थे। वह उस वक्त काफी परेशान थी, लेकिन सुबह 5 बजे उसने जो परफॉर्म किया, वह शानदार था। यह उनके किरदार का बहुत महत्वपूर्ण सीन है और उन्होंने इसे बेहतरीन तरीके से निभाया। सवाल: रोहित, आपके लिए शो में सबसे चुनौतीपूर्ण क्या रहा? जवाब/रोहित सराफ: मेरे लिए राजबिहारी बोस के साथ वाले सीन्स बहुत खास रहे। मुझे ऐसा किरदार निभाने का मौका मिला, जिसे मैं बहुत मानता हूं। उनके साथ इंटरपर्सनल रिलेशनशिप वाले सीन्स करना मेरे लिए बहुत मजेदार था। लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण एक्शन था। मैंने पहले इतना एक्शन नहीं किया था। इसकी तैयारी की और शूटिंग के दौरान बहुत कुछ सीखा। सवाल: अगर उस दौर का कोई क्रांतिकारी आज आपके सामने आ जाए तो क्या पूछेंगे? जवाब/रोहित सराफ: मैं उनसे पूछूंगा- ‘आप क्या खाकर पैदा हुए थे?’ सच में, क्योंकि उस दौर के लोगों में जिस तरह का जज्बा और जुनून था, उसी की वजह से आज हम यहां हैं। मैं जानना चाहूंगा कि उस तरह सपने देखना कैसा था? सवाल: प्रतिभा के किरदार से आज की लड़कियां क्या सीख सकती हैं? जवाब/प्रतिभा रांटा: सिर्फ लड़कियां ही नहीं, लड़के भी इस किरदार से बहुत कुछ सीख सकते हैं। प्रतिभा जिस तरह दुनिया को समझती है, लोगों को देखती है और बराबरी का हक मांगती है, वह महत्वपूर्ण है। उसके अंदर बराबरी की भावना है। वह मानती है कि अगर लड़के अपने फैसले खुद ले सकते हैं तो लड़कियों को भी अपने फैसले लेने का पूरा हक है। सवाल: क्या ‘द रिवोल्यूशनरीज’ जैसी कहानी पर फिल्म भी बनाई जा सकती है? जवाब/निखिल आडवाणी: बिल्कुल बनाई जा सकती है। लेकिन मुझे सीरीज का फॉर्मेट पसंद है, क्योंकि इसमें किरदारों को ज्यादा गहराई से एक्सप्लोर करने का मौका मिलता है। इसमें रोमांस है, एक्शन है और कई किरदारों की अपनी अलग परतें हैं। अगर यह फिल्म होती तो भी मैं इन्हीं कलाकारों के साथ काम करता। मैंने रोहित, प्रतिभा और बाकी कलाकारों को इसलिए चुना क्योंकि वे मेरे दिमाग में मौजूद किरदारों के लिए बिल्कुल सही थे। मेरे लिए यह मायने नहीं रखता कि फॉर्मेट ओटीटी है या फिल्म। सही कलाकार और सही किरदार सबसे ज्यादा जरूरी हैं।
उमंग सिंघार ने लगाया MP के सामाजिक न्याय विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप, सरकार से मांगा जवाब
मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में कंप्यूटर, प्रिंटर और यूपीएस की लगभग 10.99 करोड़ की खरीद जांच के घेरे में है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच में टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, आपस में जुड़ी चार फर्मों के जरिए फर्जी प्रतिस्पर्धा और तय मानकों के विपरीत उपकरणों की आपूर्ति के आरोप सामने आए हैं। इसी मामले में ईओडब्ल्यू ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिव्यांगजनों के अधिकारों और कल्याण के लिए बने विभाग में भी भ्रष्टाचार का खेल चल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सवाल किया कि इस भ्रष्टाचार के लिए कौन जिम्मेदार है और किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है।
क्या है मामला
ईओडब्ल्यू की जांच के मुताबिक वर्ष 2024 में विभाग ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM के माध्यम से कंप्यूटर और अन्य आईटी उपकरणों की खरीद के लिए टेंडर जारी किया था। जांच में सामने आया कि बोली लगाने वाली चार फर्में अलग-अलग कंपनियों के रूप में सामने आईं, लेकिन उनके बीच कथित तौर पर आपसी संबंध थे। जांच में इन फर्मों के मोबाइल नंबर, ई-मेल और पते जैसी जानकारियों में समानताएं मिलने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसी के अनुसार इन कंपनियों के पीछे तौर पर एक ही व्यक्ति का नियंत्रण था और अलग-अलग फर्मों के नाम से बोली लगाकर टेंडर प्रक्रिया में फर्जी प्रतिस्पर्धा तैयार की गई। मामले में साईबाबा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम, शांति ट्रेडर्स, एचटीएम इंडिया और सूरज इंटरप्राइजेज नाम की फर्मों का उल्लेख किया गया है। ईओडब्ल्यू ने रणधीर कुमार पटेल, हेमलता पटेल, अशोक कुमार सिंह और देवेंद्र सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
जांच में उपकरणों की कीमत को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जिस यूपीएस की GeM पर कीमत करीब 3,754 बताई गई थी, उसे विभाग को 11,247 प्रति यूनिट की दर से सप्लाई किया गया। यानी दोनों कीमतों के बीच करीब तीन गुना का अंतर बताया गया है।
उमंग सिंघार ने सरकार से मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जिस विभाग का उद्देश्य दिव्यांगजनों को अधिकार, सहायता और सशक्तिकरण उपलब्ध कराना है, उसी विभाग की खरीद में करोड़ों रुपये की कथित अनियमितता सामने आना गंभीर विषय है। कांग्रेस नेता ने इसे दिव्यांगजनों के नाम पर कमीशनखोरी बताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि सरकारी धन के इस्तेमाल की निगरानी में इतनी बड़ी गड़बड़ी कैसे हुई और इस पूरे मामले में किस स्तर पर संरक्षण मिला है।
दिव्यांगजनों के अधिकारों के लिए बने विभाग में भी भ्रष्टाचार का खेल!
मध्यप्रदेश के सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग में ₹10.99 करोड़ के टेंडर में फर्जीवाड़े का खुलासा। 4 डमी फर्मों के जरिए टेंडर में खेल, ₹3,754 के UPS के लिए ₹11,247 का भुगतान, टेंडर से पहले ही…
— Umang Singhar (@UmangSinghar) September 4, 2026
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