Sabudana Khichdi Recipe: जन्माष्टमी व्रत में बनाएं पारंपरिक साबूदाना खिचड़ी, ये खास ट्रिक अपनाते ही स्वाद हो जाएगा दोगुना!
Sabudana Khichdi Recipe: जन्माष्टमी के व्रत में फलाहार की थाली सजाते समय साबूदाना खिचड़ी का नाम सबसे पहले लिया जाता है। मोती जैसे नरम साबूदाने, भुनी हुई मूंगफली, हरी मिर्च और हल्के मसालों से तैयार यह खिचड़ी स्वाद के साथ पेट भी भर देती है। हालांकि घर पर साबूदाना खिचड़ी बनाते समय सबसे बड़ी परेशानी यही रहती है कि साबूदाना या तो चिपचिपा हो जाता है या फिर बीच से कच्चा रह जाता है। सही तरीके से तैयार की जाए तो यही साधारण-सी डिश व्रत के खाने की जान बन सकती है।
परफेक्ट साबूदाना खिचड़ी बनाने का राज सिर्फ सामग्री में नहीं, बल्कि साबूदाना भिगोने के तरीके में छिपा है। कई लोग साबूदाने को जरूरत से ज्यादा पानी में भिगो देते हैं, जिससे पकाते समय दाने आपस में चिपक जाते हैं। वहीं कम पानी में भिगोने पर खिचड़ी सूखी और कड़ी रह सकती है। इस जन्माष्टमी अगर आप भी फलाहार में स्वादिष्ट, खिले-खिले साबूदाने की खिचड़ी बनाना चाहते हैं, तो यह आसान ट्रिक जरूर अपनाएं।
साबूदाना भिगोने की सही ट्रिक है सबसे जरूरी
सबसे पहले साबूदाने को साफ पानी से 2-3 बार हल्के हाथ से धो लें। अब इसे उतने ही पानी में भिगोएं, जितने में साबूदाना मुश्किल से डूबे। ज्यादा पानी डालकर इसे तैराने की जरूरत नहीं है। सामान्य तौर पर 4-6 घंटे या रातभर भिगोना ठीक रहता है, लेकिन समय साबूदाने की किस्म पर निर्भर कर सकता है। अच्छी तरह भीगे दाने उंगली से दबाने पर आसानी से मैश हो जाने चाहिए।
मूंगफली को ऐसे करें तैयार
साबूदाना खिचड़ी का स्वाद बढ़ाने में भुनी मूंगफली बड़ी भूमिका निभाती है। मूंगफली को धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनकर ठंडा करें और हल्का दरदरा कूट लें। बहुत बारीक पाउडर न बनाएं। दरदरी मूंगफली खिचड़ी को शानदार क्रंच देती है और स्वाद को भी बेहतर बनाती है।
कम तेल में बनाएं स्वादिष्ट तड़का
कड़ाही में थोड़ा घी या तेल गर्म करें। इसमें जीरा डालें और चटकने दें। इसके बाद हरी मिर्च और जरूरत के अनुसार उबले या कटे हुए आलू डाल सकते हैं। व्रत के नियमों के अनुसार सेंधा नमक का इस्तेमाल करें। अब भीगा हुआ साबूदाना और मूंगफली डालकर अच्छी तरह मिलाएं।
साबूदाना पकाते समय सबसे बड़ी गलती न करें
यहां ध्यान रखें कि साबूदाने को बहुत देर तक तेज आंच पर न पकाएं। मध्यम से धीमी आंच पर कुछ मिनट चलाते हुए पकाएं। जैसे ही दाने पारदर्शी दिखने लगें, गैस बंद कर दें। ज्यादा देर पकाने से साबूदाना चिपचिपा हो सकता है और पूरी खिचड़ी का टेक्सचर खराब हो सकता है।
स्वाद दोगुना करने वाली खास ट्रिक
खिचड़ी में आखिर में थोड़ा नींबू का रस और ताजा हरा धनिया डालें। इसके साथ अगर पसंद हो तो थोड़ी दरदरी भुनी मूंगफली ऊपर से डालें। नींबू की हल्की खटास साबूदाने की खिचड़ी के हल्के स्वाद को बैलेंस करती है और डिश ज्यादा फ्रेश लगती है। हालांकि व्रत के नियम परिवार और परंपरा के अनुसार अलग हो सकते हैं।
परोसते समय रखें ये बात
साबूदाना खिचड़ी गरमागरम परोसने पर सबसे ज्यादा स्वादिष्ट लगती है। ऊपर से थोड़ा घी, मूंगफली और हरा धनिया डाल सकते हैं। इसे दही या फलाहारी चटनी के साथ भी सर्व किया जा सकता है। ध्यान रखें कि व्रत में इस्तेमाल होने वाली हर सामग्री आपके धार्मिक नियमों के अनुरूप हो।
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लेखक: (कीर्ति)
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Sudarsan Pattnaik Sand Art: पुरी बीच पर रेत से साकार हुए बाल गोपाल, सुदर्शन पटनायक की कलाकृति ने खींचा सबका ध्यान
Sudarsan Pattnaik Sand Art: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी पर देशभर में भक्ति और उत्साह का माहौल है। इसी बीच ओडिशा के पुरी बीच पर रेत से बनाई गई बाल गोपाल की कलाकृति लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इसे मशहूर रेत कलाकार और पद्मश्री सम्मानित सुदर्शन पटनायक ने तैयार किया है।
कलाकृति में बाल गोपाल को शांत और दिव्य रूप में दिखाया गया है। उनके हाथ में बांसुरी, पास में माखन की हांडी और एक गाय को जगह दी गई है। इस पूरी रचना में भगवान कृष्ण के बाल रूप और गोकुल की यादों को रेत के जरिए खूबसूरती से उकेरा गया है।
8 फीट ऊंची है बाल गोपाल की कलाकृति
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुरी बीच पर बनाई गई यह रेत की कलाकृति करीब 8 फीट ऊंची है। इसके आसपास 101 छोटी माखन हांडियां भी सजाई गई हैं, जो कलाकृति को और खास बना रही हैं।
बाल गोपाल की इस रचना के जरिए कृष्ण के बचपन से जुड़ी माखन और गोकुल की लीलाओं की झलक दिखाई गई है। रेत पर तैयार की गई इस कलाकृति ने जन्माष्टमी के धार्मिक उत्सव में कला और भक्ति का खूबसूरत मेल पेश किया है।
सुदर्शन पटनायक की कला ने फिर मोहा मन
सुदर्शन पटनायक पुरी के समुद्र तट पर अपनी रेत कलाकृतियों के लिए जाने जाते हैं। वह अलग-अलग मौकों पर सामाजिक, पर्यावरण और धार्मिक संदेशों को अपनी कला के जरिए लोगों तक पहुंचाते रहे हैं। जन्माष्टमी के मौके पर उनकी यह नई रचना भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है।
सोशल मीडिया पर भी छाई कलाकृति
बाल गोपाल की यह रेत कलाकृति जन्माष्टमी के उत्सव को एक अलग अंदाज में दिखाती है। समुद्र किनारे रेत पर बनी भगवान कृष्ण की विशाल आकृति और उसके आसपास रखी माखन हांडियां देखने में बेहद आकर्षक नजर आती हैं। पुरी पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह कलाकृति त्योहार के बीच एक खास आकर्षण बन गई है।
भक्ति और कला का दिखा खूबसूरत संगम
जन्माष्टमी पर जहां देशभर में मंदिरों और घरों में बाल गोपाल का श्रृंगार किया जा रहा है, वहीं पुरी बीच पर रेत के जरिए कान्हा के बाल रूप को साकार किया गया। इस कलाकृति ने दिखाया कि भक्ति को कला के अलग-अलग रूपों के जरिए भी खूबसूरती से व्यक्त किया जा सकता है।
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