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एस्टोनिया के रक्षामंत्री ने इस्तीफा दिया:यूक्रेन को समय पर तोप के गोले नहीं दे पाए; कॉन्ट्रैक्ट में भारतीय कंपनी शामिल, अनुभव नहीं होने का आरोप

एस्टोनिया के रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे की वजह यूक्रेन के लिए की गई करीब 768 करोड़ रुपए की एक डील है। सौदे के तहत भारतीय कंपनी से जुड़ी इटली की एक फर्म को गोला-बारूद सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया था। आरोप है कि कंपनी के पास तोप के गोले बनाने या बेचने का अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया गया और भारी रकम एडवांस में दी गई। कंपनी के साथ किए गए थे 4 समझौते 2024 में एस्टोनिया के सेंटर फॉर डिफेंस इन्वेस्टमेंट ने तोप के गोलों की खरीद के लिए डेटासेल एसआरएल के साथ चार समझौते किए। यह कंपनी इटली में रजिस्टर्ड है। नवंबर 2024 तक यूक्रेन पहुंचने थे गोले गोला-बारूद का पहला बैच नवंबर 2024 में यूक्रेन पहुंचना था, लेकिन डेटासेल ने देरी की। बाद में जो सामान पहुंचा, उसे लेकर भी सवाल उठाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ खेप अधूरी थी और उसमें गोले चलाने के लिए जरूरी हिस्से मौजूद नहीं थे। इनमें फ्यूज, प्रोपेलेंट चार्ज और प्राइमर जैसे हिस्से शामिल हैं। इसलिए एस्टोनिया ने कुछ सामान को स्वीकार नहीं किया। कंपनी ने आरोपों को खारिज किया डेटासेल ने एस्टोनिया के आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उसने बड़ी मात्रा में सामान तैयार किया और उसकी सप्लाई के लिए बिल भी दिए। कंपनी ने यह भी कहा कि डिलीवरी में देरी के पीछे अलग-अलग देशों से मंजूरी और जरूरी दस्तावेज मिलने में हुई देरी जैसी वजहें थीं। एस्टोनिया के 768 करोड़ रुपए अटके एस्टोनिया ने इस सौदे में करीब 768 करोड़ रुपए दिए थे। अब वह इस रकम को वापस पाने की कोशिश कर रहा है। अगर पैसा वापस नहीं मिला तो एस्टोनिया पर इस रकम का वित्तीय बोझ पड़ सकता है। यूरोपीय आयोग भी एस्टोनिया के साथ इस मामले पर बातचीत कर रहा है। EU के फंड से आया था पैसा इस सौदे में इस्तेमाल हुआ पैसा यूरोपीय संघ की यूरोपियन पीस फैसिलिटी (EPF) से आया था। यह फंड यूक्रेन को सैन्य सहायता देने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। अब सवाल यह है कि अगर एस्टोनिया कंपनी से पैसा वापस नहीं ले पाया तो इस फंड का क्या होगा। यूरोपीय आयोग इस मामले में एस्टोनियाई अधिकारियों के संपर्क में है। जांच में खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल एस्टोनिया के राष्ट्रीय लेखा कार्यालय ने इस सौदे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच का एक बड़ा मुद्दा यह है कि इतने बड़े रक्षा सौदे में ऐसी कंपनी को कैसे चुना गया, जिसके पास तोप के गोले की सप्लाई का पहले का अनुभव नहीं था। यानी विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि गोले समय पर पहुंचे या नहीं। सवाल यह भी है कि कंपनी का चयन कैसे हुआ और इतनी बड़ी रकम एडवांस में क्यों दी गई। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें… जयशंकर बोले- तेल खरीद पर रोक से जंग नहीं थमेगी: बातचीत से ही खत्म होगी, भारत यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए मध्यस्थता को तैयार केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन जंग का समाधान इस बात से नहीं निकलेगा कि कोई देश रूसी तेल खरीदता है या नहीं। पूरी खबर पढ़ें…

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नवरात्र-दिवाली पर आ सकता है जियो का IPO:₹37,800 करोड़ का देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू होगा, SEBI से मिल चुकी मंजूरी

रिलायंस इंडस्ट्रीज की टेलीकॉम और टेक्नोलॉजी कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड देश का सबसे बड़ा IPO लाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी इस इश्यू को नवरात्र या दिवाली के आसपास लॉन्च करने का प्लान बना रही है। कंपनी इस इश्यू से लगभग ₹37,800 जुटाएगी। यह देश का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू होगा। नवरात्र-दिवाली यानी त्योहारी सीजन के दौरान मार्केट में निवेशकों का सेंटिमेंट पॉजिटिव रहता है। इस बार नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर यानी दशहरा तक चलेगा। माना जा रहा है कि कंपनी अगले हफ्ते से ही इंटरनेशनल रोडशोज की शुरुआत कर सकती है। वहीं 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है। अगर नवरात्र विंडो मिस होती है, तो कंपनी दिवाली पर इश्यू लॉन्च कर सकती है। 5 हफ्तों तक इंटरनेशनल-डोमेस्टिक रोडशोज करेगी जियो प्लेटफॉर्म्स अगले 1-2 हफ्तों के भीतर आईपीओ की तारीखों को फाइनल कर सकती है। इसके बाद कंपनी विदेशी निवेशकों के लिए 3 हफ्तों का इंटरनेशनल रोडशो करेगी। विदेशी दौरों के बाद कंपनी भारत में डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स और रिटेल निवेशकों के साथ 2 हफ्तों तक मीटिंग्स और प्रेजेंटेशन आयोजित करेगी। कंपनी इश्यू में 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी अगर यह आईपीओ तय ₹37,800 करोड़ के साइज पर लॉन्च होता है, तो यह भारतीय शेयर बाजार के इतिहास का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा। ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) के मुताबिक, कंपनी 27 करोड़ नए इक्विटी शेयर जारी करेगी। यह कंपनी की पोस्ट-इश्यू शेयर कैपिटल का करीब 2.9% हिस्सा होगा। ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में होगा आईपीओ से जुटाए जाने वाले फंड का बड़ा हिस्सा रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (RJIL) का कर्ज चुकाने में खर्च किया जाएगा। कंपनी करीब ₹27,500 करोड़ का इस्तेमाल लोन चुकाने/प्रीपेमेंट में करेगी। इश्यू की बाकी रकम का इस्तेमाल सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों में किया जाएगा। जियो प्लेटफॉर्म्स यह पैसा RJIL को इक्विटी, प्रेफरेंस शेयर, डिबेंचर्स या लोन के जरिए ट्रांसफर करेगी। ग्लोबल टेक दिग्गजों के पास 30.9% की हिस्सेदारी जियो प्लेटफॉर्म्स में दुनिया के कई बड़े दिग्गज निवेशकों का पैसा लगा हुआ है। वर्तमान में बड़े विदेशी निवेशकों के पास कंपनी की कुल 30.9% हिस्सेदारी है। कंपनी में जादू होल्डिंग्स (मेटा/फेसबुक) की 9.98% और गूगल इंटरनेशनल की 7.73% हिस्सेदारी है। वहीं अन्य निवेशकों में सऊदी अरब का पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF), सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी, जनरल अटलांटिक, केकेआर (KKR) और आबू धाबी इन्वेस्टमेन्ट अथॉरिटी (ADIA) से जुड़े फंड्स शामिल हैं। जून में भरा था DRHP, अगस्त में मिली SEBI की मंजूरी जियो प्लेटफॉर्म्स ने अपने इस मेगा आईपीओ के लिए इस साल जून में मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास ड्राफ्ट पेपर (DRHP) जमा कराए थे। इसके बाद 28 अगस्त को SEBI ने इस पब्लिक इश्यू को मंजूरी दे दी थी। क्या होता है DRHP और रोडशो?

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SA vs NAM: हार की हैट्रिक से बाल-बाल बची साउथ अफ्रीका, हार की हैट्रिक से बाल-बाल बची साउथ अफ्रीका, नामीबिया को पहली बार हराया

साउथ अफ्रीका ने नामीबिया के खिलाफ इससे पहले सिर्फ 2 टी20 मैच खेले थे, जिसमें से एक इसी सीरीज में था. साउथ अफ्रीका को दोनों मुकाबलों में शिकस्त मिली थी और तीसरी बार भी टीम हारती हुई दिख रही थी. Sat, 05 Sep 2026 01:31:31 +0530

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