एडोब ने अनिल चक्रवर्ती को नया सीईओ नियुक्त किया, शांतनु नारायण संभालेगें एग्जीक्यूटिव चेयरमैन का पद
नई दिल्ली, 4 सितंबर (आईएएनएस)। सॉफ्टवेयर कंपनी एडोब ने अपने नए प्रेसिडेंट और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में अनिल चक्रवर्ती को नियुक्त करने का ऐलान किया है। वे शांतनु नारायण की जगह लेंगे।
वर्तमान में अनिल चक्रवर्ती एडोब के कस्टमर एक्सपीरियंस ऑर्केस्ट्रेशन बिजनेस और वर्ल्डवाइड फील्ड ऑपरेशंस के प्रेसिडेंट हैं। वे 1 दिसंबर 2026 से निदेशक मंडल में भी शामिल होंगे।
वहीं शांतनु नारायण अब एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की भूमिका में जाएंगे। वे चक्रवर्ती के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि ट्रांजिशन सुचारू रूप से हो सके और एडोब के ट्रांसफॉर्मेशन को सपोर्ट मिल सके।
इस नियुक्ति पर शांतनु नारायण ने कहा, एडोब के सामने असीम संभावनाएं हैं, क्योंकि हमारा नए मार्केट कैटेगरी और वर्ल्ड-क्लास प्रोडक्ट बनाने का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। अनिल एक अनुभवी ट्रांसफॉर्मेशनल लीडर हैं जो मूल्यों, ईमानदारी और बिजनेस की गहरी समझ के साथ नेतृत्व करते हैं। उनका व्यापक ग्राहकों के लिए कैटेगरी-डिफाइनिंग प्रोडक्ट बनाने का सिद्ध रिकॉर्ड रहा है।
उन्होंने कहा, मुझे पूरा विश्वास है कि एआई के इस युग में एडोब की ग्रोथ के लिए अनिल ही सही व्यक्ति हैं। मैं एग्जीक्यूटिव चेयर के रूप में उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।
नए सीईओ अनिल चक्रवर्ती ने कहा कि वे क्रिएटिविटी, प्रोडक्टिविटी और कस्टमर एक्सपीरियंस के लिए एजेंटिक सॉफ्टवेयर के अगले युग में एडोब के नेतृत्व को बढ़ाने के लिए उत्साहित हैं।
उन्होंने कहा, एडोब का इतिहास भविष्य को बनाने का रहा है, न सिर्फ अपनी टेक्नोलॉजी के जरिए बल्कि अपने लोगों और ग्राहकों के प्रति प्रतिबद्धता के जरिए भी। शांतनु के असाधारण नेतृत्व में बीते दशकों में एडोब के बिजनेस मॉडल में बदलाव आया है, जिससे हम ग्रोथ के अगले अध्याय के लिए अच्छी स्थिति में हैं।
बता दें कि अनिल चक्रवर्ती जनवरी 2020 में एडोब से जुड़े थे। तब वे एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट और डिजिटल एक्सपीरियंस बिजनेस के जनरल मैनेजर बने थे। सितंबर 2020 में उन्हें वर्ल्डवाइड फील्ड ऑपरेशंस की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई। दिसंबर 2021 में उन्हें डिजिटल एक्सपीरियंस और वर्ल्डवाइड फील्ड ऑपरेशंस का प्रेसिडेंट बनाया गया।
इससे पहले अनिल चक्रवर्ती चार साल तक इनफॉर्मैटिका में सीईओ के रूप में काम कर चुके हैं, जो एंटरप्राइज क्लाउड डेटा मैनेजमेंट की एक बड़ी कंपनी है।
--आईएएनएस
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सौर क्षेत्र में 10 गुना बढ़ी उत्तराखंड की चमक, 40 हजार सोलर पैनल का लक्ष्य समय से पहले हुआ पूरा
Uttarakhand Solar: उत्तराखंड ने सोलर के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. प्रदेश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने तय समय से पहले टारगेट हासिल किया है. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है.
मुख्यमंत्री धामी ने एक्स पर पोस्ट करके बताया कि उत्तराखंड ने 40 हजार रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाने का शुरुआती लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर लिया है. यह उपलब्धि राज्य में सौर ऊर्जा के बढ़ते इस्तेमाल को दिखाती है. इसके साथ ही राज्य ने योजना के कुल लक्ष्य का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया है. साथ ही सरकार का दावा है कि रूफटॉप सोलर को बढ़ावा मिलने से आम लोगों को बिजली के खर्च में राहत मिलने के साथ-साथ राज्य की सौर ऊर्जा क्षमता भी तेजी से बढ़ी है.
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10 गुना बढ़ी सौर ऊर्जा क्षमता
मुख्यमंत्री के मुताबिक, पिछले कुछ समय में सरकार के प्रयासों से उत्तराखंड की सौर ऊर्जा क्षमता में करीब 10 गुना बढ़ोतरी हुई है. राज्य में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का चलन भी तेजी से बढ़ा है. आवासीय रूफटॉप सोलर क्षमता अब करीब 290 मेगावाट तक पहुंच गई है. सरकार का कहना है कि रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने से लोग अपनी जरूरत की बिजली खुद पैदा कर सकेंगे. इससे बिजली के बिल में कमी आने की संभावना है. साथ ही अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजकर उसका लाभ भी लिया जा सकता है.
घरों की छत बन रही बिजली का जरिया
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. घरों, संस्थानों और अन्य इमारतों की खाली छतों पर सोलर पैनल लगाकर बिजली का उत्पादन किया जा सकता है. इससे जमीन की अतिरिक्त जरूरत नहीं पड़ती और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है. प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत देशभर में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने को प्रोत्साहित किया जा रहा है. उत्तराखंड में भी इस योजना को तेजी से लागू करने पर जोर दिया जा रहा है. सरकार का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ना है.
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बिजली बचत के साथ पर्यावरण को फायदा
सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ने से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है. सोलर पैनल से बिजली उत्पादन के दौरान प्रदूषण काफी कम होता है. ऐसे में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देना पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण कदम है. सीएम धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में हुई प्रगति को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और राज्य की ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लिए काम कर रही है.
राज्य में सौर ऊर्जा क्षमता में करीब 10 गुना वृद्धि और आवासीय रूफटॉप सोलर क्षमता के 290 मेगावाट तक पहुंचने को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिन रही है. आने वाले समय में रूफटॉप सोलर का दायरा और बढ़ाने की तैयारी है, जिससे ज्यादा परिवार इस योजना का लाभ उठा सकें. कुल मिलाकर, उत्तराखंड में रूफटॉप सोलर का बढ़ता इस्तेमाल बिजली की बचत, स्वच्छ ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की दिशा में राज्य के लिए एक सकारात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.
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