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पाकिस्तानी पत्नी को तलाक, कोर्ट से मौत की सजा की मांग... 36 साल पुराने सरला भट हत्याकांड से बचने के लिए 'विक्टिम कार्ड' खेल रहा यासीन मलिक?

जेल में बंद जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक ने अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक को तलाक देने का फैसला किया है। 25 पन्नों के एक हलफनामे में मलिक ने अपनी लंबी कैद और मौत की सजा की आशंका का हवाला देते हुए शादी खत्म करने की बात कही है। हालांकि, कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट की हत्या के मामले में खुद को बेकसूर बताने और अदालत से मौत की सजा मांगने के उनके इस कदम को विशेषज्ञ खुद को 'पीड़ित' (विक्टिम) के रूप में पेश करने की एक रणनीतिक कोशिश मान रहे हैं। यासीन मलिक ने 2009 में पाकिस्तानी नागरिक मुलिक से शादी की थी। मलिक ने अपने हलफनामे में लिखा, "फांसी पर लटकाए जाने से पहले, मैंने तुम्हें निकाह के बंधन से अलग करने का फैसला किया है।"

60 साल के मलिक को नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने 2019 में गिरफ्तार किया था और तब से वह सात साल से ज़्यादा समय से जेल में हैं। 2022 में, दिल्ली की एक स्पेशल NIA कोर्ट ने उन्हें जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग और अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

उन पर 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में उग्रवाद और हिंसा के चरम दौर से जुड़े कई अन्य मामलों में भी मुकदमा चल रहा है।

सरला भट हत्याकांड के अलावा, यासीन मलिक पर श्रीनगर में भारतीय वायु सेना के जवानों पर 1990 में हुए हमले में शामिल होने का आरोप है, जिसमें चार जवान मारे गए थे। साथ ही, उन पर तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद के 1989 में अपहरण का भी आरोप है।

यासीन मलिक अपनी पाकिस्तानी पत्नी को तलाक क्यों दे रहे हैं?
इसी पृष्ठभूमि में मलिक ने 25 पेज का हलफनामा दाखिल किया। इसमें उन्होंने कहा कि वह अपनी पाकिस्तानी पत्नी से शादी खत्म कर रहे हैं ताकि वह "अपनी बाकी ज़िंदगी" बिना "उसके हालात का बोझ उठाए या विधवा की तरह जिए" बिता सकें। समाचार एजेंसी PTI ने यह जानकारी दी।

इससे भी अहम बात यह है कि मलिक, जिन्हें जम्मू-कश्मीर में टेरर फंडिंग और अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े आरोपों में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है, सरला भट की हत्या में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार करते रहे हैं। इसके बजाय, उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाने के लिए दशकों पुरानी साज़िश रची गई है।

मलिक ने स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) की चार्जशीट को पूरी तरह से खारिज कर दिया और इसे कथित अपराध के तीन दशक से भी ज़्यादा समय बाद गढ़ी गई "बाद की मनगढ़ंत कहानी" बताया। उन्होंने दावा किया कि अप्रैल 1990 में, जब भट का कथित तौर पर अपहरण और हत्या हुई थी, तब नरवारा में BSF की छापेमारी के दौरान एक इमारत से गिरने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मलिक ने कहा कि वे कोमा में चले गए थे और सरकारी चैनल दूरदर्शन समेत कई समाचार माध्यमों ने दो बार उनके मरने की खबर भी चलाई थी।

मलिक ने हलफनामे में दावा किया, "यह समझ से परे है कि जो व्यक्ति बेहोश था, अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था और जिसे व्यापक रूप से मृत मान लिया गया था, वह अपराध करने में कैसे शामिल हो सकता है, उसे निर्देशित कर सकता है या उसकी योजना बना सकता है।"

मलिक ने यह भी घोषणा की कि वे अब चल रहे मुकदमे का सामना नहीं करेंगे, क्योंकि उन्होंने अपना "पूरा मामला ईश्वर के हाथों में" सौंप दिया है।

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, मलिक ने अदालत में अपनी बात रखते हुए कहा, "अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों को देखते हुए और गहराई से सोचने के बाद, मैंने मुकदमे की कार्यवाही में आगे हिस्सा न लेने का फैसला किया है। मेरे इस फैसले को अभियोजन पक्ष के किसी तथ्य, अपराध या मुझ पर लगाए गए आरोपों को स्वीकार करने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। मैं मौत की सज़ा की मांग करता हूं।"

यासीन मलिक की पत्नी मुशाल हुसैन मलिक कौन हैं?
यासीन मलिक की पत्नी, मुशाल हुसैन मलिक, समय-समय पर चर्चा में रही हैं। अगस्त में, 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुशाल ने मध्यस्थता करने की पेशकश की थी, क्योंकि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे थे और पाकिस्तानी प्रशासन ने उन पर सख्ती से कार्रवाई की थी।

2023 में, मुशाल को पाकिस्तान की संघीय कार्यवाहक सरकार में शामिल किया गया था। जियो टीवी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक काकर का मानवाधिकार और महिला सशक्तिकरण मामलों का विशेष सलाहकार नियुक्त किया गया था।

पुरानी रिपोर्टों के अनुसार, यासीन मलिक की मुलाकात मुशाल से 2005 में हुई थी, जब वे अपने अलगाववादी आंदोलन के लिए समर्थन जुटाने के लिए पाकिस्तान के दौरे पर थे। मुशाल ने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पॉलिटिकल इकोनॉमी में पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री हासिल की है। वह कला की दुनिया में भी सक्रिय रही हैं, जिसमें न्यूड तस्वीरें बनाना भी शामिल है। उनकी माँ, रेहाना हुसैन मलिक, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) की नेता थीं, जबकि उनके पिता, एम ए हुसैन मलिक, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मशहूर पाकिस्तानी अर्थशास्त्री थे।

'इंडिया टुडे' मैगज़ीन की 2009 की एक रिपोर्ट के अनुसार, यासीन और मुशाल की शादी से पहले यह कहा जाता था कि इस उग्रवादी नेता ने 1980 के दशक में विद्रोह के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करने की कसम खाई थी, लेकिन कराची की इस सुंदरी ने उनके संकल्प को पिघला दिया।

क्या यासीन मलिक 'विक्टिम कार्ड' खेल रहे हैं?
अपनी पत्नी मुशाल का ज़िक्र करके, यासीन मलिक असल में खुद को एक ऐसे राजनीतिक व्यक्ति के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहे हैं जो किसी बड़े संघर्ष में फंसा हुआ है, न कि एक ऐसे उग्रवादी नेता के तौर पर जिसके संगठन ने 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में दहशत फैलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

विश्लेषक और कॉलमनिस्ट अमाना बेगम अंसारी ने X पर लिखा, "मेरे लिए यह बिल्कुल साफ़ है कि हलफ़नामा डैमेज कंट्रोल (नुकसान की भरपाई) की कोशिश कर रहा है।"

अंसारी ने लिखा, "मलिक ज़बरदस्ती, अनुचित प्रक्रिया, 1994 के बाद अपनी अहिंसक राजनीतिक भूमिका, भारतीय अधिकारियों के साथ संपर्क और कश्मीर के व्यापक संघर्ष को इस तरह से उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे वह बिना पछतावे वाले आतंकवादी के बजाय एक बड़े संघर्ष में फंसे राजनीतिक व्यक्ति के तौर पर दिखें।"

विश्लेषकों का कहना है कि मलिक खुद को ज़बरदस्ती और अनुचित जांच और मुक़दमे का शिकार बता रहे हैं, साथ ही खुद को फांसी के फंदे के करीब खड़े व्यक्ति के तौर पर पेश कर रहे हैं। अपनी पाकिस्तानी पत्नी मुशाल हुसैन मलिक से शादी खत्म करने का उनका फ़ैसला भी इसी व्यापक नैरेटिव का हिस्सा है, जिसमें वह खुद को एक ऐसे बदकिस्मत व्यक्ति के तौर पर दिखा रहे हैं जिनकी लंबी जेल की सज़ा की व्यक्तिगत कीमत उनके परिवार को चुकानी पड़ी है।

यासीन मलिक को पहले ही आतंकी आरोपों में दोषी ठहराया जा चुका है, और जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने 737 पन्नों की चार्जशीट तैयार की है।

जैसा कि राज्य बीजेपी प्रवक्ता दानिश भट्ट ने X पर एक पोस्ट में कहा, "यासीन मलिक के पास सरला भट मामले में चुनौती देने के लिए कुछ भी नहीं है। यह J&K पुलिस की SIA द्वारा दायर एक पुख्ता 737 पन्नों की चार्जशीट है। पिछली सरकारें 36 वर्षों तक सरला भट को न्याय दिलाने में विफल रहीं। बीजेपी सरकार ने आखिरकार यह सुनिश्चित किया है कि मामला आगे बढ़े। न्याय होगा।"

आखिरकार, अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों के आधार पर सरला भट मामले में मलिक की दोषीता तय करना अदालतों का काम है। अपनी परिस्थितियों के बारे में उनके दावे चाहे जो भी हों, खुद को पीड़ित के तौर पर पेश करने और अपनी पाकिस्तानी पत्नी को तलाक देने का उनका फ़ैसला अपने आप में उन पर लगे आरोपों का जवाब नहीं देता है, और इससे मामले के खत्म होने की संभावना भी कम है।

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Singapore के Parkway Cancer Centre में 20 प्रतिशत बढ़े भारतीय मरीज

(सुदीप्तो चौधरी) कोलकाता, चार सितंबर सिंगापुर स्थित एक कैंसर उपचार केंद्र में 2025 में भारत से आने वाले मरीजों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इनमें से ज्यादातर मरीज बीमारी के ज्यादा बढ़ने के चरण में इलाज के लिए पहुंचे, जब उन्हें पूरी तरह ठीक करने के उपचार के विकल्प काफी सीमित रह गए थे। पार्कवे कैंसर सेंटर के चिकित्सा निदेशक और वरिष्ठ कैंसर विशेषज्ञ डॉ. आंग पेंग तियाम ने कहा कि भारत में उपलब्ध उपचार के विकल्प समाप्त हो जाने के बाद कई मरीज विदेश का रुख करते हैं।

उन्होंने कहा, “कई मामलों में भारत में डॉक्टर मरीज के लिए जो संभव था, वह कर चुके होते हैं। मरीज अक्सर इस उम्मीद में वहां आते हैं कि कोई दूसरी चिकित्सा टीम कोई दूसरा उपचार सुझा सकती है।” वैश्विक स्वास्थ्य सेवा प्रदाता ‘आईएचएच हेल्थकेयर’ के तहत संचालित पार्कवे कैंसर सेंटर कैंसर के प्रति जागरूकता, उसकी रोकथाम, पहचान और उपचार के बारे में जानकारी देने के लिए दिल्ली में ‘कैनहोप’ कार्यालय संचालित करता है। पार्कवे कैंसर सेंटर ने पिछले साल भारत में ऐसे और कार्यालय खोलने की इच्छा जताई थी।

डॉ. तियाम ने ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा कि पार्कवे कैंसर सेंटर आने वाले करीब 60 से 70 प्रतिशत भारतीय मरीजों में कैंसर बढ़ी हुई अवस्था में होता है या उपचार का कोई असर नहीं हो रहा होता है। वहीं करीब 30 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिनके ठीक होने की संभावना रहती है। उन्होंने कहा, “2025 में भारत हमारे सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल रहा और यहां से आने वाले मरीजों की संख्या सालाना आधार पर करीब 20 प्रतिशत बढ़ी।” उन्होंने कहा, “कैंसर के इलाज में सबसे महत्वपूर्ण बात सही पहचान करना है जिसमे ऊतक की जांच से बीमारी की सटीक पहचान, कैंसर की अवस्था का सही निर्धारण और आणविक प्रोफाइलिंग शामिल है।” उन्होंने कहा कि पार्कवे कैंसर सेंटर में भारत से अलग-अलग अवस्थाओं के मरीज आते हैं।

इनमें कैंसर होने की आशंका वाले मरीजों से लेकर ऐसे मरीज भी शामिल हैं, जो पहले ही कई तरह के उपचार करा चुके हैं। उन्होंने कहा, “हमारे पास हर तरह के मरीज आते हैं। कुछ मरीज बीमारी की शुरुआती अवस्था में आते हैं, जबकि कुछ उपचार विफल होने के बाद बेहद गंभीर स्थिति में पहुंचते हैं और इस उम्मीद में आते हैं कि शायद अब भी उनके लिए कोई उपचार उपलब्ध हो।” डॉ. तियाम ने कहा कि भारत में उपलब्ध उपचार के विकल्प समाप्त होने के बाद कई मरीज विदेश जाते हैं।

उन्होंने कहा कि कई मामलों में भारत में डॉक्टर मरीज के लिए जो संभव होता है, वह कर चुके होते हैं और मरीज यह सोच कर सिंगापुर आते हैं कि शायद दूसरी चिकित्सा टीम के पास कोई अन्य उपचार हो। इलाज में आने वाले खर्च के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कैंसर का उपचार हर मरीज की बीमारी के अनुसार अलग-अलग होता है। उन्होंने कहा, “कैंसर का इलाज अलग-अलग होता है और इसकी लागत में काफी अंतर हो सकता है।

अनुमान बताना बहुत मुश्किल है, क्योंकि हर मरीज की बीमारी अलग होती है।” उन्होंने कहा कि दुनिया भर में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं। इसके पीछे बढ़ती उम्र वाली आबादी, जागरूकता में वृद्धि और बेहतर जांच जैसे कारण हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सामने कैंसर के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए पर्याप्त स्वास्थ्य ढांचे की कमी एक चुनौती है।

उन्होंने कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान पर जोर देते हुए कहा कि तंबाकू और सुपारी के इस्तेमाल के दुष्प्रभावों के बारे में अधिक जागरुकता तथा अधिक जोखिम वाले लोगों के लिए कम मात्रा में विकिरण वाली सीटी जांच जैसे कार्यक्रम कैंसर के मामलों को कम करने और उपचार के परिणाम बेहतर करने में मदद कर सकते हैं।

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