बंगाल का यूनिफार्म सिविल कोड बिल होगा सबसे अलग, विवाह के 13 कानूनों की जगह बनेगा एक कानून
पश्चिम बंगाल में यूनिफार्म सिविल कोड (यूसीसी) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए हैं. राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है, जो 13 अलग-अलग विवाह कानूनों की जगह एक समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करेगी.
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Insurance Hike: थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस होगा महंगा? साल के अंत तक बदल सकती हैं प्रीमियम दरें
Insurance Hike: ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच वाहन मालिकों के खर्च में एक और बढ़ोतरी हो सकती है। मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के प्रीमियम की दरों में बदलाव की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंचने की बात सामने आई है। सूत्रों के मुताबिक, नई दरों को इस साल के अंत तक अधिसूचित किया जा सकता है। इससे पहले मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरों में साल 2022 में बदलाव किया गया था। बीमा कंपनियां लंबे समय से आईआरडीएआई के सामने प्रीमियम बढ़ाने की मांग रख रही हैं। कंपनियों का कहना है कि मौजूदा दरों पर बढ़ते क्लेम और अन्य खर्चों को संभालना लगातार मुश्किल हो रहा है।
करीब 24.77 करोड़ वाहन मालिकों पर पड़ सकता है असर
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस में बदलाव का असर देश में बड़ी संख्या में वाहन मालिकों पर पड़ सकता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 24.77 करोड़ वाहन इसके दायरे में आ सकते हैं। ऐसे में अगर नई दरों में बढ़ोतरी की जाती है तो इसका प्रभाव बड़े स्तर पर दिखाई दे सकता है।
हालांकि, दरें तय करते समय यह कोशिश की जाएगी कि बीमा कंपनियों के बढ़ते खर्च और क्लेम के दबाव को ध्यान में रखा जाए, लेकिन वाहन मालिकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी बहुत ज्यादा न बढ़े।
बीमा कंपनियां क्यों चाहती हैं प्रीमियम में बढ़ोतरी?
बीमा कंपनियों के मुताबिक मोटर इंश्योरेंस कारोबार में क्लेम का खर्च लगातार बढ़ रहा है। सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मुआवजे, कानूनी लागत और दावों की औसत राशि में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों का खर्च पहले की तुलना में काफी ज्यादा हो गया है।
इसी वजह से कंपनियों को मौजूदा प्रीमियम दरों पर अंडरराइटिंग लॉस का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में कंपनियां प्रीमियम की समीक्षा कर दरों में संशोधन की मांग कर रही हैं।
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस का प्रीमियम क्यों बढ़ सकता है?
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस में वाहन मालिक की गलती से किसी तीसरे व्यक्ति को होने वाली चोट, नुकसान या अन्य कानूनी देनदारी को कवर किया जाता है। सड़क दुर्घटनाओं के मामलों में मुआवजे और कानूनी खर्च में बढ़ोतरी का सीधा असर बीमा कंपनियों की लागत पर पड़ता है।
इसी बढ़ते खर्च को देखते हुए कंपनियां प्रीमियम दरों में बदलाव चाहती हैं। हालांकि, नई दरें तय करते समय बीमा कंपनियों की वित्तीय स्थिति और वाहन मालिकों की वहन क्षमता, दोनों को ध्यान में रखना जरूरी होगा।
2022 में हुआ था पिछला बदलाव
मोटर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरों में इससे पहले 2022 में बदलाव किया गया था। अब नई समीक्षा के बाद अगर प्रीमियम बढ़ाया जाता है तो कार, दोपहिया और अन्य श्रेणियों के वाहन मालिकों को पहले की तुलना में ज्यादा बीमा प्रीमियम देना पड़ सकता है।
हालांकि, अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए प्रीमियम में कितना बदलाव होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसका अंतिम फैसला नई दरें अधिसूचित होने के बाद ही सामने आएगा।
वाहन मालिकों पर क्या पड़ेगा असर?
अगर थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की दरें बढ़ती हैं तो वाहन मालिकों की सालाना बीमा लागत बढ़ जाएगी। इसका असर कारों के साथ-साथ दोपहिया वाहनों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल प्रीमियम दरों की समीक्षा अंतिम चरण में होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में वाहन मालिकों की नजर अब साल के अंत तक आने वाली नई दरों पर रहेगी। नई दरें लागू होने के बाद ही यह साफ होगा कि किस वाहन श्रेणी के लिए प्रीमियम में कितनी बढ़ोतरी की गई है।
(मंजू कुमारी)
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