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Ankit Balyan Murder Case: Shamli Police ने दो फरार आरोपियों पर इनाम बढ़ाकर किया 1 लाख रुपये

मुजफ्फरनगर (उप्र), चार सितंबर शामली पुलिस ने हरियाणवी गायक और यूट्यूबर अंकित बालियान की हत्या के मामले में अब भी फरार दो कथित शूटरों की तलाश तेज कर दी है, साथ ही उनकी गिरफ्तारी के लिए सूचना देने पर इनाम दोगुना कर एक लाख रुपये कर दिया है। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। शामली के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि दो वांछित आरोपियों, जिनकी पहचान हरियाणा के सत्यम और आर्यन के रूप में हुई है, पर पहले 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया गया था जिसे बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है।

सिंह ने कहा, ‘‘पुलिस दलों ने शेष दो आरोपियों की तलाश तेज कर दी है और विभिन्न स्थानों पर संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।’’ बालियान (32) की 26 अगस्त को शामली में एक जिम के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने पहले कहा था कि जब वह अपनी कार की ओर बढ़ रहे थे तो दो मोटरसाइकिल पर सवार चार हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। पुलिस ने कहा था कि 31 अगस्त को शामली में पुलिस के साथ मुठभेड़ में इस घटना के दो संदिग्ध शूटर मोहित (22) और सुमित (24) मारे गए थे।

उनके पास से तीन पिस्तौल और 26 कारतूस बरामद किए गए थे। इस हत्या को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने ‘‘पूर्व नियोजित साजिश’’ के रूप में वर्णित किया था। वहीं, जांचकर्ता गोगी गिरोह से जुड़े एक नेटवर्क की संदिग्ध संलिप्तता की जांच कर रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि पुलिस शेष आरोपियों का पता लगाने के लिए उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में छापेमारी कर रही है और हत्या से पहले और बाद में उनकी गतिविधियों की भी जांच कर रही है। गायक के परिवार ने मुठभेड़ में दो संदिग्धों के मारे जाने का स्वागत किया था, लेकिन मांग की थी कि शेष आरोपियों को भी ‘खत्म’ कर दिया जाए। केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने मुठभेड़ के बाद बालियान के परिवार से मुलाकात की थी और कानूनी और पुलिस व्यवस्था में विश्वास रखने का आग्रह किया था।

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी शोक संतप्त परिवार से बात की थी और अपनी पार्टी की ओर से समर्थन जताया था। पुलिस ने कहा कि हत्या और व्यापक साजिश की जांच जारी है।

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Tripura में पूर्व उग्रवादी संगठनों की 72 घंटे की Strike शुरू, यातायात ठप

अगरतला, चार सितंबर त्रिपुरा में हथियार डाल चुके तीन उग्रवादी संगठनों की छह सूत्री मांगों को लेकर शुक्रवार से शुरू हुई 72 घंटे की राज्यव्यापी हड़ताल के कारण सड़क और रेल यातायात बाधित हुआ। इन मांगों में उस त्रिपक्षीय समझौते को लागू करने की मांग भी शामिल है जिसके तहत इन संगठनों ने हथियार डाले थे। उग्रवादी संगठनों - नेशनल लिबरेशन फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (एनएलएफटी) (ओरिजिनल), एनएलएफटी (पीडी) और ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (एटीटीएफ)- ने केंद्र और राज्य सरकार के साथ 2024 में त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद हथियार डाल दिए थे।

इन संगठनों का हालांकि आरोप है कि उनकी मांगें अब तक पूरी नहीं की गई हैं। राज्य पुलिस के प्रवक्ता राजदीप देब ने कहा, ‘‘सड़क और रेल मार्ग अवरुद्ध किए जाने से सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। प्रदर्शनकारियों ने हताईकोतोर में असम-अगरतला राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरुद्ध कर दिया।

अतिरिक्त बलों को एहतियातन तैनात किया गया है।’’ यह नाकेबंदी ऐसे समय की गई है जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और टिपरा मोथा प्रमुख प्रद्योत किशोर देबबर्मा के बीच शुक्रवार को नयी दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है। टिपरा मोथा के महासचिव बृषकेतु देबबर्मा ने बृहस्पतिवार को कहा था कि यह बैठक 2024 में हुए त्रिपक्षीय समझौते के क्रियान्वयन पर चर्चा के लिए बुलाई गई है। उन्होंने दिल्ली रवाना होने से पहले कहा, ‘‘समझौते में मूल निवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा का जो वादा किया गया था, उसके बारे में जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, हम तब तक ग्राम समिति चुनावों के लिए किसी तरह का गठबंधन नहीं करेंगे।’’ हथियार डाल चुके इन तीनों उग्रवादी संगठनों ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों के उचित पुनर्वास की मांग को लेकर 12 जून 2026 को रेल और राष्ट्रीय राजमार्ग की नाकेबंदी शुरू की थी लेकिन राज्य सरकार द्वारा उनकी चिंताओं का समाधान करने का आश्वासन दिये जाने के बाद आंदोलन वापस ले लिया था।

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  Sports

BCCI का Cricket Expansion प्लान: Japan में पहली बार भिड़ेंगे दोनों देश, 75 साल की दोस्ती का ऐतिहासिक क्षण

भारत और जापान के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर क्रिकेट के मैदान पर एक ऐतिहासिक मुकाबला देखने को मिलेगा। बीसीसीआई ने घोषणा की है कि दोनों देशों की पुरुष क्रिकेट टीमें पहली बार अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में आमने-सामने उतरेंगी। यह एकमात्र बीस ओवर का अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 22 सितंबर को जापान के तोचिगी प्रांत स्थित सानो अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैदान में खेला जाएगा।

बता दें कि यह मुकाबला केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारत और जापान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण और कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के समारोह का हिस्सा है। दोनों देशों के बीच क्रिकेट का यह पहला अंतरराष्ट्रीय मुकाबला होने के कारण इसे खास माना जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह आयोजन खेल के माध्यम से दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाने की व्यापक पहल से जुड़ा है। भारत द्वारा वर्ष 2036 के ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी की महत्वाकांक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पहल को खेल सहयोग के नए दौर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

यह पहल भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान बने व्यापक सहयोग के विचार से आगे बढ़ी है। इसके तहत भारत और जापान खेल के क्षेत्र में आपसी संपर्क, खिलाड़ियों के आदान-प्रदान और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे। दोनों देशों के बीच खेल आधारित इस कार्यक्रम को “खेल 75” पहल की शुरुआती कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने इस फैसले को क्रिकेट के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया है। उनके अनुसार, भारतीय और जापानी पुरुष टीमों का जापान में विशेष मुकाबले के लिए एक साथ आना ऐतिहासिक क्षण है। इससे भारतीय टीम को एक नए क्रिकेट क्षेत्र में खेलने का मौका मिलेगा और जापान के साथ-साथ पूर्वी एशिया के अन्य हिस्सों में भी क्रिकेट को नए दर्शकों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।

देवजीत सैकिया ने कहा कि भारत और जापान के बीच मजबूत और लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंध हैं। ऐसे में दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर क्रिकेट का जुड़ना विशेष महत्व रखता है। उन्होंने इस मुकाबले को संभव बनाने में जापान क्रिकेट संघ के प्रयासों की भी सराहना की है।

गौरतलब है कि बीसीसीआई लंबे समय से क्रिकेट के विस्तार को पारंपरिक क्रिकेट देशों तक सीमित न रखने की बात करता रहा है। दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट संगठनों में शामिल होने के नाते भारतीय बोर्ड का मानना है कि खेल को नए देशों और नए दर्शकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उसकी है। बोर्ड ने संकेत दिया है कि वह आने वाले समय में जापान क्रिकेट संघ के साथ मिलकर वहां क्रिकेट को मजबूत करने के लिए काम करेगा।

जापान क्रिकेट संघ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नाओकी मियाजी ने भी भारतीय टीम के आगमन को अपने देश के क्रिकेट इतिहास का बड़ा अवसर बताया है। उनके अनुसार, मौजूदा विश्व विजेता भारतीय टीम का जापान आना जापानी क्रिकेट के लिए यादगार क्षण होगा। उन्होंने कहा कि यह मुकाबला स्थानीय लोगों को क्रिकेट को करीब से समझने और इस खेल से जुड़ने का अवसर देगा।

जापान में क्रिकेट अभी उतना लोकप्रिय नहीं है जितना बेसबॉल, फुटबॉल या अन्य खेल हैं, लेकिन वहां इस खेल को विकसित करने की कोशिश लगातार की जा रही है। भारतीय टीम की मौजूदगी से जापान में क्रिकेट को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग और क्रिकेट फैंस भी इस मुकाबले को देखने पहुंच सकते हैं।

कुल मिलाकर 22 सितंबर का यह मुकाबला केवल जीत और हार तक सीमित नहीं रहेगा। यह भारत और जापान के बीच 75 वर्षों की साझेदारी, दोस्ती और आपसी सहयोग का प्रतीक भी बनेगा। साथ ही यह क्रिकेट को नए देशों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है और दोनों देशों के खेल संबंधों के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही हैं।
Fri, 04 Sep 2026 19:54:00 +0530

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