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IND vs SL, दूसरा टेस्ट ड्रॉ: भारत का फॉलो-ऑन दांव पड़ा भारी, श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने पलटी बाजी; सीरीज 1-0 से जीती टीम इंडिया 

Highlights

  • दूसरा टेस्ट मैच ड्रॉ रहा
  • भारत ने सीरीज 1-0 से जीती
  • भारत ने 503/9 पर पहली पारी घोषित की
  • श्रीलंका पहली पारी में 290 रन पर ऑल आउट हुआ
  • भारत को 213 रन की पहली पारी की बढ़त मिली
  • श्रीलंका ने फॉलो-ऑन के बाद 429/9 बनाए
  • सोनल दिनुशा ने दूसरी पारी में नाबाद 133 रन बनाए
  • पासिंदु सूरियाबंदारा ने 92 रन की अहम पारी खेली
  • भारत जीत से सिर्फ एक विकेट दूर रहते हुए भी मैच नहीं जीत सका

भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच ड्रॉ हो गया। मैच में लंबे समय तक भारत का दबदबा रहा, लेकिन फॉलो-ऑन खेलने के बाद श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने जबरदस्त जुझारूपन दिखाया और भारत को जीत से रोक दिया। हालांकि, दूसरे टेस्ट के ड्रॉ होने के बावजूद भारत ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली।

भारत ने पहली पारी में बनाया विशाल स्कोर
भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अपनी पहली पारी 503/9 के स्कोर पर घोषित की। टीम के लिए देवदत्त पडिक्कल ने शानदार शतक लगाकर पारी को मजबूत आधार दिया। ऋषभ पंत ने भी तेजतर्रार अंदाज में 63 रन बनाए।

ध्रुव जुरेल ने नाबाद 115 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली और भारत को 500 रन के पार पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद भारत ने पारी घोषित कर श्रीलंका पर दबाव बढ़ा दिया।

पडिक्कल बने ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज़’

देवदत्त पडिक्कल  ने 3 पारियों में 328 रन, 109.33 का औसत और 2 शतक शामिल। दमदार बल्लेबाजी के लिए पडिक्कल को ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज़’ चुना गया। 

290 रन पर सिमटी श्रीलंका की पहली पारी
भारत के विशाल स्कोर के जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर समाप्त हुई। मेजबान टीम भारत से 213 रन पीछे रही। सोनल दिनुशा ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 103 रन बनाए, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला।

भारतीय गेंदबाजों ने नियमित अंतराल पर विकेट हासिल किए और श्रीलंका को पहली पारी में बड़े घाटे में धकेल दिया। 213 रन की बढ़त के बाद भारत ने श्रीलंका को फॉलो-ऑन देने का फैसला किया।

फॉलो-ऑन के बाद श्रीलंका की शानदार वापसी
फॉलो-ऑन खेलने उतरी श्रीलंका की टीम ने दूसरी पारी में पूरी तरह अलग अंदाज दिखाया। शुरुआती दबाव के बावजूद मेजबान बल्लेबाजों ने विकेट बचाए और धीरे-धीरे मैच को भारत की पकड़ से बाहर कर दिया।

सोनल दिनुशा ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी की और दूसरी पारी में नाबाद 133 रन बनाए। पासिंदु सूरियाबंदारा ने भी 92 रन की अहम पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों का डटकर सामना किया।

श्रीलंका ने दूसरी पारी में 429/9 का स्कोर खड़ा कर दिया। इसके साथ ही भारत के लिए मैच जीतने का रास्ता लगभग बंद हो गया और मुकाबला ड्रॉ की ओर बढ़ गया।

भारत को नहीं मिली जीत, सीरीज 1-0 से अपने नाम
भारत ने मैच के अधिकांश हिस्से में नियंत्रण बनाए रखा और पहली पारी में बड़ी बढ़त भी हासिल की, लेकिन श्रीलंका की दूसरी पारी में शानदार बल्लेबाजी ने उसकी जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

दूसरा टेस्ट ड्रॉ होने के साथ ही भारत ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1-0 से जीत ली। भारत के लिए सीरीज का सबसे बड़ा सकारात्मक पक्ष यह रहा कि उसने पहले टेस्ट में जीत दर्ज कर सीरीज में बढ़त बनाई और दूसरे मुकाबले में भी लंबे समय तक दबदबा कायम रखा।

वहीं, श्रीलंका के लिए दूसरी पारी का संघर्ष बड़ी राहत रहा। टीम ने फॉलो-ऑन के बाद 429/9 तक पहुंचकर मैच बचाया और सीरीज को बराबरी पर खत्म होने से रोका।

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CWG 2026 Review: सिर्फ 39 मेडल... फिर भी क्यों भारत का प्रदर्शन रहा शानदार? आंकड़ों से समझिए पूरी कहानी

CWG 2026 Review: अगर सिर्फ यही आंकड़े देखे जाएं तो लगेगा कि भारत का कॉमनवेल्थ अभियान उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। लेकिन ग्लासगो 2026 की असली कहानी इन तीन आंकड़ों से कहीं बड़ी है। जिन खेलों से भारत सबसे ज्यादा पदक जीतता था, वे इस बार कार्यक्रम में थे ही नहीं। खिलाड़ियों की संख्या भी लगभग आधी थी। इसके बावजूद भारतीय दल चौथे स्थान पर पहुंचा और कई नए खेलों में अपनी ताकत साबित की।

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन भारत के लिए कई मायनों में यादगार रहा। मेडल टैली में भारत ने 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य सहित कुल 39 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया। पहली नजर में यह प्रदर्शन बर्मिंघम 2022 के 61 पदकों की तुलना में कमजोर दिख सकता है। 1998 कुआलालंपुर के बाद यह पहला मौका भी है, जब भारत 50 पदकों का आंकड़ा नहीं छू सका।

लेकिन क्या सिर्फ 39 मेडल देखकर यह निष्कर्ष निकाल लेना सही होगा कि भारत का प्रदर्शन खराब रहा? इस सवाल का जवाब 'नहीं' है।

दरअसल, ग्लासगो 2026 को समझने के लिए सिर्फ मेडल टैली नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों को भी देखना होगा जिनमें भारतीय दल ने यह प्रदर्शन किया। खेलों की संख्या आधी हो चुकी थी, भारत के सबसे सफल खेल कार्यक्रम से बाहर थे और खिलाड़ियों की संख्या भी पिछले संस्करण की तुलना में काफी कम थी। इसके बावजूद भारत ने न सिर्फ चौथा स्थान हासिल किया, बल्कि कई नए खेलों में अपनी मजबूत मौजूदगी भी दर्ज कराई।

ग्लासगो 2026 आखिर अलग क्यों था?
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स आर्थिक कारणों से इतिहास के सबसे छोटे संस्करणों में शामिल रहे। इस बार सिर्फ 10 खेल आयोजित किए गए, जबकि बर्मिंघम 2022 में 19 खेल खेले गए थे। यानी लगभग आधा कार्यक्रम ही बचा था।

इसका सबसे बड़ा असर भारत पर पड़ा, क्योंकि जिन खेलों से भारत वर्षों से सबसे ज्यादा पदक जीतता आया है, वे इस बार शामिल ही नहीं थे।

भारत के मेडल बैंक ही कार्यक्रम से बाहर हो गए
ग्लासगो 2026 में शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और क्रिकेट को शामिल नहीं किया गया। ये वही खेल हैं, जिन्होंने पिछले दो दशकों में भारत की कॉमनवेल्थ सफलता की मजबूत नींव तैयार की।

यदि इतिहास पर नजर डालें तो-

  • शूटिंग : 135 ऐतिहासिक पदक
  • कुश्ती : 114
  • बैडमिंटन : 31
  • टेबल टेनिस : 28
  • हॉकी : 6

सिर्फ बर्मिंघम 2022 में इन खेलों से भारत ने 61 में से 30 पदक, जिनमें 13 गोल्ड शामिल थे। यानी भारत प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही अपने सबसे बड़े मेडल बैंक से वंचित हो चुका था।

फिर भी भारत चौथे स्थान तक कैसे पहुंचा?
यही इस अभियान की सबसे बड़ी कहानी है। जी हां, भारत ने उपलब्ध खेलों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी। परिणाम यह रहा कि 39 पदकों के साथ भारत ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और कनाडा के बाद चौथे स्थान पर रहा। मेजबान स्कॉटलैंड के भी 39 पदक थे, लेकिन अधिक रजत पदक होने के कारण भारत उससे आगे रहा।

मेडल संख्या भले कम रही, लेकिन प्रतिस्पर्धा के उपलब्ध अवसरों को देखते हुए यह प्रदर्शन कहीं अधिक प्रभावशाली माना जाएगा।

कम खिलाड़ी, ज्यादा असर
बर्मिंघम 2022 में भारत ने करीब 210 खिलाड़ियों का दल भेजा था, जबकि ग्लासगो 2026 में यह संख्या घटकर 123 रह गई। इनमें से 38 खिलाड़ी मेडल जीतकर लौटे। लगभग हर तीन खिलाड़ियों में से एक खिलाड़ी पोडियम तक पहुंचा।

सफलता दर लगभग 31 प्रतिशत रहा, जबकि बर्मिंघम में यह करीब 29 प्रतिशत था। दूसरे शब्दों में कहें तो भारतीय दल छोटा जरूर था, लेकिन उसका प्रभाव पहले से अधिक बड़ा रहा।

एक आंकड़ा जो पूरी कहानी बदल देता है
भारत ने इस बार शामिल 10 खेलों में 39 पदक जीते। यानी औसतन हर खेल में 3.9 पदक। कार्यक्रम छोटा होने के बावजूद यह अनुपात बताता है कि उपलब्ध अवसरों का भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतर इस्तेमाल किया।

बॉक्सिंग बनी भारत की नई ताकत
भारत के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से 7 अकेले बॉक्सिंग से आए। यानी हर दूसरा गोल्ड लगभग इसी खेल से मिला। 14 मुक्केबाजों के दल ने 10 पदक जीते। इनमें 7 स्वर्ण और  3 रजत शामिल रहे।

महिला मुक्केबाजों ने पांच स्वर्ण जीतकर भारतीय बॉक्सिंग की नई पीढ़ी का दम दिखाया। प्रीति पवार, जैस्मिन लंबोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घांघस और अरुंधति चौधरी ने गोल्ड जीते, जबकि पुरुष वर्ग में सचिन सिवाच और अंकुश पांगल ने स्वर्ण अपने नाम किया।

यह कॉमनवेल्थ इतिहास में बॉक्सिंग में भारत का सबसे प्रभावशाली अभियान माना जाएगा।

जूडो ने दिया सबसे बड़ा सरप्राइज
कॉमनवेल्थ इतिहास में पहली बार भारत ने जूडो में दो स्वर्ण पदक जीते। हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने इतिहास रचा। यामिनी मौर्य ने रजत और उन्नति शर्मा ने कांस्य जीतकर यह साबित किया कि भारत अब इस खेल में भी लगातार आगे बढ़ रहा है।

एथलेटिक्स अब सिर्फ नीरज चोपड़ा तक सीमित नहीं
लंबे समय तक भारतीय एथलेटिक्स की पहचान कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों तक सीमित रही। ग्लासगो 2026 में पहली बार तस्वीर बदली हुई दिखाई दी, जहां कई खिलाड़ियों ने अलग-अलग स्पर्धाओं में पदक जीतकर भारतीय एथलेटिक्स की बढ़ती गहराई का संकेत दिया।

नीरज चोपड़ा ने जैवलिन थ्रो में रजत पदक जीतकर वापसी की। गुलवीर सिंह एक ही कॉमनवेल्थ संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एथलीट बने।

तेजस्विन शंकर ने डेकाथलॉन में भारत का पहला कॉमनवेल्थ पदक दिलाया। दूसरी ओर सर्वेश कुशारे, मुरली श्रीशंकर, प्रवीण चित्रवेल, सीमा कालीरामना और यशवीर सिंह जैसे खिलाड़ियों ने भी यह संकेत दिया कि भारत ट्रैक एंड फील्ड में लगातार मजबूत हो रहा है।

पैरा स्पोर्ट्स अब बोनस नहीं, मेडल बैंक बन रहे हैं
ग्लासगो 2026 की सबसे सकारात्मक तस्वीर पैरा स्पोर्ट्स से सामने आई। भारत ने पैरा एथलेटिक्स में रिकॉर्ड सात पदक जीते।

शर्मिला धनखड़, दिलीप महादु गावित और सोमन राणा ने स्वर्ण जीतकर यह दिखाया कि भारतीय पैरा खिलाड़ी अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार दबदबा बना रहे हैं।

कुछ साल पहले तक जिन पदकों को बोनस माना जाता था, वे अब भारत की नियमित सफलता का हिस्सा बन चुके हैं।

मीराबाई चानू ने फिर साबित की अपनी बादशाहत
वेटलिफ्टिंग में भारत ने कुल आठ पदक जीते। सबसे बड़ी उपलब्धि रही मीराबाई चानू का लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक। उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि बड़े मंच पर उनसे बेहतर प्रदर्शन करना आसान नहीं है।

अगर शूटिंग और कुश्ती होती तो क्या तस्वीर बदल जाती?
इस सवाल का जवाब आंकड़े देते हैं। बर्मिंघम 2022 में जिन खेलों को इस बार बाहर रखा गया, उनसे भारत को 30 पदक मिले थे।

यानी यदि वे खेल भी कार्यक्रम का हिस्सा होते, तो भारत के 60 या उससे अधिक पदकों तक पहुंचने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था।

इसी वजह से सिर्फ 39 पदकों के आधार पर ग्लासगो अभियान को कमजोर कहना उचित नहीं होगा।

CWG 2026 के पांच सबसे बड़े स्टार

  • मीराबाई चानू - लगातार तीसरा कॉमनवेल्थ गोल्ड।
  • भारतीय बॉक्सिंग टीम - 10 पदक और 7 गोल्ड।
  • गुलवीर सिंह - एक संस्करण में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय ट्रैक एथलीट।
  • हर्ष सिंह और अस्मिता डे -  जूडो में ऐतिहासिक गोल्ड।
  • भारतीय पैरा एथलीट - रिकॉर्ड सात पदकों के साथ नया अध्याय।

एक नजर में भारत का प्रदर्शन

श्रेणी आंकड़ा
कुल पदक 39
गोल्ड 13
सिल्वर 17
ब्रॉन्ज 9
मेडल टैली चौथा स्थान
कुल खिलाड़ी 123
मेडल विजेता खिलाड़ी 38
सफलता दर 31%
सबसे सफल खेल बॉक्सिंग (10 मेडल)
वेटलिफ्टिंग  8 मेडल
एथलेटिक्स + पैरा 16 मेडल
जूडो 4 मेडल

इस प्रदर्शन से क्या संकेत मिले?
ग्लासगो 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय खेल अब केवल शूटिंग, कुश्ती या बैडमिंटन जैसे पारंपरिक खेलों पर निर्भर नहीं हैं। बॉक्सिंग, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा स्पोर्ट्स में बढ़ती गहराई बताती है कि भारत का मेडल आधार पहले की तुलना में अधिक व्यापक हो चुका है। यही बदलाव भविष्य के ओलंपिक और अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए सबसे सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।

अहमदाबाद में प्रस्तावित कॉमनवेल्थ गेम्स 2030
भारत के लिए यह प्रदर्शन इसलिए भी अहम है क्योंकि अगला कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 में अहमदाबाद में प्रस्तावित है। ऐसे में ग्लासगो में उभरी नई पीढ़ी घरेलू मैदान पर भारत की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकती है।

निष्कर्ष
ग्लासगो 2026 ने एक बात साफ कर दी  है कि भारत की खेल ताकत अब कुछ चुनिंदा खेलों तक सीमित नहीं रही। पारंपरिक मेडल बैंक कार्यक्रम से बाहर होने के बावजूद भारतीय दल ने चौथा स्थान हासिल किया और कई नए खेलों में अपनी पहचान बनाई। इसलिए 39 पदकों का यह अभियान केवल एक संख्या नहीं, बल्कि भारतीय खेलों की बदलती दिशा, बढ़ती गहराई और भविष्य की संभावनाओं का संकेत है। अगर यही रफ्तार बरकरार रही, तो अहमदाबाद 2030 में भारत अपने अब तक के सबसे सफल कॉमनवेल्थ अभियान की नींव रख सकता है।

FAQ
Q1. CWG 2026 में भारत ने कितने मेडल जीते?

भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज सहित कुल 39 मेडल जीते।

Q2. CWG 2026 में भारत का स्थान क्या रहा?
भारत मेडल टैली में चौथे स्थान पर रहा।

Q3. भारत के कम मेडल क्यों आए?
इस बार गेम्स में सिर्फ 10 खेल आयोजित हुए। शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और क्रिकेट जैसे भारत के मजबूत खेल कार्यक्रम में शामिल नहीं थे।

Q4. भारत का सबसे सफल खेल कौन सा रहा?
बॉक्सिंग भारत का सबसे सफल खेल रहा, जिसमें भारतीय मुक्केबाजों ने 10 मेडल जीते, जिनमें 7 गोल्ड शामिल हैं।

Q5. CWG 2026 में भारत के सबसे बड़े सकारात्मक पहलू क्या रहे?
बॉक्सिंग का दबदबा, जूडो में ऐतिहासिक सफलता, एथलेटिक्स और पैरा स्पोर्ट्स में रिकॉर्ड प्रदर्शन तथा कम खिलाड़ियों के बावजूद बेहतर मेडल सफलता दर भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियां रहीं।

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