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फर्टिलिटी के लिए क्यों जरूरी है जिंक? महिलाओं और पुरुषों दोनों को जाननी चाहिए ये बात

किसी भी कपल के लिए पैरेंट बनना उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने जैसा है। लेकिन बहुत से कपल्स चाहकर भी पैरेंट नहीं बन पाते हैं। जब बात फर्टिलिटी यानी प्रजनन क्षमता की आती है, तो आमतौर पर फोलिक एसिड, आयरन, विटामिन डी और ओमेगा-3 जैसे पोषक तत्वों की चर्चा ज्यादा होती है। लेकिन एक छोटा सा मिनरल ऐसा भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए जिंक।

जिंक शरीर में बहुत कम मात्रा में चाहिए होता है, लेकिन इसका काम काफी बड़ा है। यह शरीर में कई एंजाइम और प्रोटीन के काम में शामिल होता है और डीएनए बनाने से लेकर कोशिकाओं की वृद्धि और सामान्य विकास तक में भूमिका निभाता है। यहां तक कि प्रजनन स्वास्थ्य में भी जिंक का महत्व देखा गया है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर जिंक और फर्टिलिटी के बीच क्या संबंध है- 

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जिंक फर्टिलिटी के लिए इतना जरूरी क्यों है?

अधिकतर लोगों को यह पता ही नहीं होता है कि जिंक फर्टिलिटी के लिए इतना जरूरी क्यों है? दरअसल, हमारे शरीर में प्रजनन से जुड़ी कई प्रक्रियाओं में जिंक की भूमिका होती है। महिलाओं में यह अंडाणु के विकास और परिपक्वता से जुड़ी प्रक्रियाओं में शामिल होता है। इतना ही नहीं, शोध में यह भी पाया गया है कि अंडाणु के सामान्य विकास और निषेचन की प्रक्रिया के लिए पर्याप्त जिंक जरूरी है।

वहीं, पुरुषों के मामले में जिंक शुक्राणुओं के बनने और उनकी गुणवत्ता से जुड़ी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। जिंक की कमी को खराब शुक्राणु गुणवत्ता और शुक्राणु निर्माण में गड़बड़ी से जोड़ा गया है।

महिलाओं के लिए जिंक कैसे महत्वपूर्ण हो सकता है?

महिलाओं में अंडाणु के विकास और परिपक्व होने की प्रक्रिया में जिंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शोध से पता चलता है कि पर्याप्त जिंक उपलब्ध न होने पर अंडाणु की परिपक्वता प्रभावित हो सकती है। निषेचन के बाद शुरुआती भ्रूण के विकास में भी जिंक की भूमिका होती है। इसलिए अगर कोई महिला गर्भधारण की योजना बना रही है, तो केवल कैलोरी या वजन पर ध्यान देने के बजाय पूरा पोषण लेना भी जरूरी है।

पुरुषों के लिए जिंक कैसे महत्वपूर्ण हो सकता है?

पुरुषों में जिंक का संबंध शुक्राणुओं से है। शुक्राणु बनने की प्रक्रिया को शुक्राणुजनन कहा जाता है और इसमें जिंक की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। कुछ अध्ययनों में कम जिंक स्तर को शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति और आकार जैसे मानकों में गड़बड़ी से जोड़ा गया है। जिंक शरीर की ऑक्सीडेटिव तनाव से निपटने वाली प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है। ज्यादा ऑक्सीडेटिव तनाव शुक्राणुओं को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए पर्याप्त पोषण पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य का एक हिस्सा है।   

शाकाहारी लोग जिंक कहां से लें?

अगर आप शाकाहारी हैं तो भी जिंक की जरूरत पूरी करने के लिए सिर्फ गोलियों पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है। आप अपने खाने में कुछ चीजों जैसे कद्दू के बीज, तिल, मूंगफली, काजू, चना, राजमा, मसूर दाल, मूंग दाल व सोयाबीन आदि को शामिल कर सकते हैं। हालंाकि, यह ध्यान रखें कि दालों और साबुत अनाज में मौजूद फाइटेट जिंक के अवशोषण को कम कर सकते हैं। इसलिए दालों और अनाज को भिगोना, अंकुरित करना और अच्छी तरह पकाना बहुत जरूरी है।  

रोज कितना जिंक चाहिए?

वयस्क पुरुषों के लिए जिंक की सामान्य अनुशंसित मात्रा लगभग 11 मिलीग्राम प्रतिदिन और वयस्क महिलाओं के लिए 8 मिलीग्राम प्रतिदिन है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान जरूरत बढ़ जाती है। हालांकि, जिंक सप्लीमेंट लेने से पहले एक बार डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

- मिताली जैन

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ऑफिस के तनाव और Burnout से बचना है तो अपनाएं Pomodoro Technique, टाइम मैनेजमेंट का ये है सबसे कारगर तरीका

भागदौड़ भरी जिंदगी में ऑफिस वर्क, डेडलाइन और घर की जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बिठाना हर किसी के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। अक्सर काम के दबाव में कई बार इंसान मानसिक रुप से थकान और तनाव महसूस करने लगता है। इस तरह का तनाव धीरे-धीरे व्यक्ति को बर्नआउट का शिकार बना देता है। इस स्थिति में जब दिमाग थक जाता है, तो वह किसी भी काम को ध्यान से नहीं कर पाता और हर छोटी-छोटी बात पर चिड़चिड़ा हो जाता है। अगर आप भी इसी प्रकार से मानसिक तनाव का समाना कर रही हैं, तो इससे निपटने और फोकस वापस पाने के लिए 25 मिनट Pomodoro तकनीक को ट्राई कर सकती हैं। आइए आपको बताते हैं, आखिर यह क्या है।

आखिर क्या है पोमोडोरो तकनीक और यह तनाव कैसे घटाता है?
पोमोडोरा तकनीक एक प्रकार से टाइम मैनेजमेंट का एक अनोखा तरीका है, जिसे इटली के फ्रांसिस्को सिरिला ने बनाया था। इसको इटैलियन भाषा में 'पोमोडोरो' का अर्थ टमाटर होता है। इस तकनीक का सीधा तरीका यह है कि आप अपने काम को 25-25 मिनट के छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट सकते हैं।

पोमोडोरो तकनीक अपनाने के 5 आसान स्टेप्स
 - सबसे पहले आप जो-जो कार्य पूरा करना चाहती हैं, उन्हें एक कागज पर लिख लें।

 - फिर फोन या घड़ी में 25 मिनट का अलार्म सेट कर लें।

 - अगले 25 मिनट तक केवल उसी एक काम पर ध्यान दें। इस दौरान फोन देखने या दूसरा काम करने बचना काफी जरुरी है।

 - जब टाइमर बजे, काम रोक दें और 5 मिनट का ब्रेक लें।

 -  वहीं, आपका 25-25 मिनट के 4 सेशन पूरे हो जाएं, तो इसके बाद 15 से 30 मिनट का एक बड़ा ब्रेक लें।

बर्नआउट से बचाने में पोमोडोरो तकनीक के फायदे
 - प्रत्येक 25 मिनट के बाद मिलने वाला 5 मिनट का ब्रेक आपके दिमाग को शांत रखेगा और आप रिफ्रेश फील करेंगे।

 - लगातार काम न करने के कारण शाम तक भारी थकान या सिरदर्द महसूस नहीं होता।

 - इसके साथ ही ऑफिस और घर के कामों के बीच एक बेहतर संतुलन बना रहेगा, जिससे मानसिक तनाव कम होगा।

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