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Stage 4 Lung Cancer: फेफड़ों के कैंसर की स्टेज 4 में क्या होता है? ICMR ने बताया शरीर पर होने वाला डैमेज

Lung Cancer Stage 4: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने बताया फेफड़ों का कैंसर होने पर शरीर में कैसे लक्षण दिखते हैं और फेफड़ों की कैंसर की चौथी स्टेज तक आने पर फेफड़ों को कितना नुकसान हो चुका होता है.

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Punjab Elections 2027: अमृतसर में AAP मजबूत या अकाली दल?

Punjab Elections 2027: स्वर्ण मंदिर का शहर सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि पंजाब की सियासत की सबसे बड़ी लैबोरेटरी भी है. यहां की एक-एक सीट किसी सरकार की तकदीर तय कर सकती है. 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जानिए अमृतसर जिले का पूरा चुनावी और सामाजिक तानाबाना.

अमृतसर जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?

अमृतसर जिले में कुल 11 विधानसभा सीटें आती हैं. इनमें अजनाला, राजा सांसी, मजीठा, जंडियाला (एससी), अमृतसर उत्तर, अमृतसर पश्चिम (एससी), अमृतसर सेंट्रल, अमृतसर पूर्व, अमृतसर दक्षिण, अटारी (एससी) और बाबा बकाला (एससी) शामिल हैं. बता दें इनमें से 4 सीटें अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित हैं बाकी 7 सीटें जनरल कैटेगरी में आती हैं.

2011 जनगणना के मुताबिक जिले की आबादी कितनी है?

2011 की जनगणना के अनुसार अमृतसर जिले की कुल जनसंख्या 24 लाख 90 हजार 656 है. इसमें पुरुषों की संख्या 13 लाख 18 हजार 408 और महिलाओं की संख्या 11 लाख 72 हजार 248 दर्ज की गई थी. जिले का लिंगानुपात प्रति हजार पुरुषों पर 889 महिलाओं का है जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है. साक्षरता दर करीब 76 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें पुरुष साक्षरता महिलाओं से करीब 8 फीसदी ज्यादा है.

किस धर्म के कितने लोग रहते हैं? 

जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि अमृतसर जिले में सिख समुदाय बहुसंख्यक है. यहां करीब 69 फीसदी आबादी सिख धर्म को मानने वाली है, जबकि हिंदू आबादी लगभग 28 फीसदी है. वहीं, अन्य धर्मों की बात करें तो ईसाई समुदाय की हिस्सेदारी करीब 2 फीसदी है, जबकि मुस्लिम आबादी बेहद कम, आधे फीसदी के आसपास सिमट गई है. बंटवारे से पहले यहां मुस्लिम आबादी की अच्छी-खासी मौजूदगी थी लेकिन 1947 के बाद यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई. इसके अलावा अनुसूचित जाति की आबादी जिले में करीब 31 फीसदी है जो पंजाब के औसत से भी ज्यादा मानी जाती है. राजनीतिक जानकार कहते हैं कि यही वजह है कि इस जिले की एक-तिहाई से ज्यादा सीटें दलित वोट बैंक से सीधे प्रभावित होती हैं.

2022 में अमृतसर की सभी सीटों पर किसका दबदबा रहा?

2022 के विधानसभा चुनाव में पूरे पंजाब की तरह अमृतसर जिले में भी आम आदमी पार्टी की लहर देखने को मिली थी. जिले की 11 में से 10 सीटें AAP की झोली में गईं थीं और सिर्फ एक सीट पर अकाली दल टिक पाया था.

हर सीट का अलग-अलग हिसाब-किताब...

अजनाला सीट पर क्या रहा हाल?

चुनाव आयोग के डेटा के मुतातबक अजनाला जनरल सीट है. 2022 में यहां से AAP के कुलदीप सिंह धालीवाल ने जीत दर्ज की थी. उन्हें 43,555 वोट (35.9 फीसदी) मिले थे जबकि दूसरे नंबर पर अकाली दल के अमरपाल सिंह बोनी अजनाला रहे जिन्हें कुल 35,712 वोट मिले थे. जानकारी के अनुसार इससे पहले 2017 में यह सीट कांग्रेस के पास थी. उस समय  हरप्रताप सिंह ने अकाली उम्मीदवार को करीब 18,700 वोटों से हराया था.

राजा सांसी सीट का समीकरण क्या कहता है?

राजा सांसी भी जनरल सीट है. यहां 2022 में कांग्रेस के सुखबिंदर सिंह सरकारिया ने जीत दर्ज की थी. उन्हें 46,872 वोट (35.4 फीसदी) मिले थे जबकि अकाली दल के वीर सिंह लोपोके को 41,398 वोट मिले थे. 2017 में भी सरकारिया ने इसी सीट पर जीत हासिल की थी.

मजीठा सीट पर बादल परिवार का किला अब भी कायम क्यों है?

मजीठा जिले की इकलौती ऐसी सीट है, जहां पिछले दो चुनावों से आंधी के बावजूद अकाली दल का झंडा नहीं गिरा है. इसे वीवीआईपी सीट भी मान सकते हैं. साल 2022 की बात करें तो यहां से गनिव कौर मजीठिया ने जीत दर्ज की थी जो पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की पत्नी हैं. उन्हें 57,027 वोट (47 फीसदी) मिले और इस सीट से चुनाव मैदान में उतरे AAP के सुखजिंदर राज सिंह लल्ली को करीब 26 हजार वोट प्राप्त हुए थे. बता  दें 2017 में यहां खुद बिक्रम सिंह मजीठिया करीब 54 फीसदी वोट लेकर जीते थे.

जंडियाला (एससी) सीट में किसकी जीत हुई?

जंडियाला अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है. यहां 2022 में AAP के हरभजन सिंह ईटीओ ने जीत हासिल की. उन्हें 59,724 वोट (46.7 फीसदी) मिले जबकि कांग्रेस के सुखविंदर सिंह डैनी बंडाला को 34,341 वोट मिले थे. 2017 में इसी सीट से डैनी बंडाला जीते थे. 

अमृतसर उत्तर में किसने बाजी मारी?

अमृतसर उत्तर सीट से 2022 में AAP के कुंवर विजय प्रताप सिंह विजयी रहे थे. बता दें वह पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं और बरगाड़ी बेअदबी मामले के कारण वह काफी चर्चा में रहे थे. चुनाव आयोग के मुताबिक उन्हें 58,133 वोट (47.3 फीसदी) मिले थे. उनके बाद दूसरे स्थान पर अकाली दल के अनिल जोशी रहे जिन्हें 29,815 वोट मिले थे। इस सीट पर जीत का करीब अंतर 28 हजार से ज्यादा वोटों का रहा था. 2017 में इस सीट से कांग्रेस के सुनील दत्ती जीते थे. 

अमृतसर पश्चिम (एससी) में मार्जिन ने सबको चौंकाया

अमृतसर पश्चिम आरक्षित सीट है. खास बात ये है कि प्रदेश की इस सीट पर ही 2022 में जिले की सबसे बड़ा जीत का अंतर दर्ज किया गया था. बता दें यहां AAP के डॉ. जसबीर सिंह संधू को 69,251 वोट (करीब 59 फीसदी) मिले थे. दूसरे नंबर पर कांग्रेस के राज कुमार वेरका को सिर्फ 25,338 वोट से संतोष करना पड़ा था. वहीं, 2017 की बात करें तो उस समय वेरका इस सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. 

अमृतसर सेंट्रल सीट पर क्या ट्रेंड रहा?

अमृतसर सेंट्रल जनरल सीट है. 2022 में यहां से AAP के अजय गुप्ता जीते थे. उन्हें 40,837 वोट (47.2 फीसदी) मिले थे, जबकि कांग्रेस के दिग्गज नेता ओम प्रकाश सोनी 26,811 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे. 2017 में सोनी खुद इसी सीट से जीते थे. 

अमृतसर पूर्व सीट पर सिद्धू की हार की कहानी क्या है?

अमृतसर पूर्व सीट सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहने वाली सीटों में शुमार होती है. 2022 में यहां से AAP की नवोदित उम्मीदवार जीवन ज्योत कौर ने कांग्रेस के कद्दावर नेता नवजोत सिंह सिद्धू को मात दी थी. डेटा पर गौर करें तो यहां जीवन ज्योत कौर को 39,679 वोट (37 फीसदी) मिले, जबकि सिद्धू 32,929 वोटों पर सिमट गए थे। 2017 में सिद्धू ने इसी सीट पर 43 फीसदी के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी.

अमृतसर दक्षिण सीट का हाल कैसा रहा?

अमृतसर दक्षिण जनरल सीट से 2022 में AAP के इंदरबीर सिंह निज्जर विजयी हुए थे. उन्हें 53,053 वोट (50.4 फीसदी) मिले थे, जो जिले में सबसे ज्यादा वोट शेयर हासिल करने वाली जीतों में शामिल है. दूसरे नंबर पर अकाली दल के तलबीर सिंह गिल रहे, जिन्हें सिर्फ 25,550 वोट मिले थे. 2017 में निज्जर खुद यहां से हार गए थे, तब कांग्रेस के इंदरबीर सिंह बोलारिया ने बाजी मारी थी.

अटारी (एससी) सीट पर क्या रुझान रहा?

अटारी अनुसूचित जाति आरक्षित सीट है, जो भारत-पाकिस्तान सीमा से सटी होने के कारण रणनीतिक रूप से भी अहम मानी जाती है. 2022 में यहां AAP के जसविंदर सिंह ने जीत दर्ज की थी, उन्हें 56,798 वोट (44.8 फीसदी) मिले थे. वहीं, अकाली दल के गुलजार सिंह रानिके 37,004 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे थे. 2017 में यह सीट कांग्रेस के पास थी.

बाबा बकाला (एससी) सीट पर कौन जीता?

बाबा बकाला भी आरक्षित सीट है. यहां से 2022 में AAP के दलबीर सिंह टोंग विजयी रहे थे. उन्हें 52,468 वोट (40.3 फीसदी) मिले थे. उनके बाद कांग्रेस के संतोख सिंह भलाईपुर 32,916 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे. 2017 में दलबीर सिंह टोंग खुद यह सीट हार गए थे, तब कांग्रेस के संतोख सिंह ने बाजी मारी थी.

अभी अमृतसर जिले में किस पार्टी का दबदबा है?

फिलहाल अमृतसर जिले की 11 में से 10 सीटों पर आम आदमी पार्टी काबिज है. सिर्फ मजीठा सीट अकाली दल के पास बची है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कांग्रेस, जो 2017 में 10 सीटें जीतकर जिले की सबसे बड़ी ताकत थी, 2022 में यहां से पूरी तरह साफ हो गई. चुनाव विश्लेषकों के अनुसार अमृतसर के मतदाता किसी एक पार्टी के प्रति स्थायी वफादारी नहीं दिखाते हैं. बल्कि हर पांच साल में सत्ता विरोधी लहर के साथ जिले में बड़ा उलटफेर देखने को मिलता है. 

2027 चुनाव में किसे चुनौती मिल सकती है?

2017 में कांग्रेस की सुनामी और 2022 में AAP की आंधी, दोनों ही बार जिले की जनता ने लगभग एकतरफा फैसला दिया है. अगर यही पैटर्न  2027 में दोहराया गया तो मौजूदा सत्ताधारी AAP के लिए यह जिला परीक्षा की तरह साबित हो सकता है. दूसरी तरफ मजीठा सीट के आंकड़े बताते हैं कि पारिवारिक और जातीय समीकरण वाली सीटों पर लहर का असर उतना गहरा नहीं होता. ऐसे में आने वाले चुनाव में अकाली दल अपनी इस इकलौती सीट को बचाने के साथ-साथ अन्य सीटों पर भी वापसी की कोशिश करेगा, जबकि कांग्रेस के लिए जिले में अपना जनाधार दोबारा खड़ा करना सबसे बड़ी चुनौती होगी.

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