दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को क्षत्रिय करणी सेना को तुरंत राहत देने से इनकार कर दिया। सेना ने 6 सितंबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति मांगी थी, जिसे पुलिस ने ठुकरा दिया था। कोर्ट ने कहा कि वह पुलिस अधिकारियों की बात सुने बिना अनुमति नहीं दे सकता। जस्टिस अमित महाजन ने मौखिक रूप से कहा इस तारीख में ऐसा क्या खास है? आप तारीख बदल भी सकते हैं। अगर पुलिस किसी खास तारीख पर सहमत नहीं है, तो आप तारीख बदल सकते हैं। इसमें क्या बड़ी बात है? मैं अब क्या कर सकता हूँ? मैं उनकी बात सुने बिना आपको अनुमति नहीं दे सकता। यह मामला मूल रूप से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने सूचीबद्ध था। हालाँकि, बेंच के छुट्टी पर होने के कारण, याचिका पर जस्टिस महाजन ने सुनवाई की।
याचिकाकर्ता के वकील ने मामले की गंभीरता बताते हुए कहा कि प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन 6 सितंबर को होना था। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस की गैर-मौजूदगी में कोई आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि पुलिस ने ही प्रदर्शन की इजाज़त देने से इनकार किया था और उसी फैसले को चुनौती दी गई है। कोर्ट ने कहा कि इस विवाद में पुलिस एक ज़रूरी पक्ष है और सुझाव दिया कि याचिकाकर्ता किसी और तारीख पर विरोध प्रदर्शन करने पर विचार कर सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की, आप विरोध प्रदर्शन की तारीख बदल लें। ठीक है... तारीख इतनी ज़रूरी क्यों है?" जब याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि संगठन विरोध प्रदर्शन की तारीख बदलने पर विचार कर सकता है, तो कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले को सोमवार को रोस्टर बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए। यह याचिका क्षत्रिय करणी सेना के प्रमुख डॉ. राज शेखावत ने दायर की है, जिसमें जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाज़त न देने वाले दिल्ली पुलिस के 28 अगस्त के फैसले को चुनौती दी गई है।
याचिका के अनुसार, प्रस्तावित प्रदर्शन का मकसद आरक्षण नीतियों और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नियमों को लेकर चिंता जताना था। याचिकाकर्ता ने बताया कि 27 अगस्त को अनुमति के लिए एक आवेदन दिया गया था। संगठन ने अधिकारियों द्वारा लगाए जा सकने वाले सभी कानूनी निर्देशों और उचित शर्तों का पालन करने का भरोसा दिया था। हालांकि, अगले ही दिन अनुरोध खारिज कर दिया गया। याचिका के मुताबिक, अनुमति न देने के कारणों में BRICS समिट-2026 की चल रही तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और कानून-व्यवस्था व ट्रैफिक से जुड़ी चिंताओं का हवाला दिया गया था।
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