होर्मुज स्ट्रेट का नाम ट्रंप स्ट्रेट करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति के आइडिया पर व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया, कही ये बात
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी है. दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ लगातार भड़काऊ बयान और धमकियां दे रहे हैं. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार को सुझाव दिया था कि होर्मुज स्ट्रेट का नाम बदलकर ट्रंप स्ट्रेट रख दिया जाए. ट्रंप के सुझाव पर अब व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया सामने आई है. खास बात है कि अमेरिका और ईरान के बीच, परमाणु शक्ति को लेकर संघर्ष शुरू हुआ था, जो धीर-धीरे होर्मुज स्ट्रेट पर केंद्रित हो गया है.
व्हाइट हाउस ने की ट्रंप की पैरवी
एक दिन पहले, ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल नेटवर्क पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने कहा कि अब जब होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका के कंट्रोल में है तो क्या हमें होर्मुज स्ट्रेट का नाम बदलकर ट्रंप स्ट्रेट कर देना चाहिए. इससे अमेरिका की तरह ही होर्मुज स्ट्रेट भी काफी ज्यादा हॉट हो जाएगा. ट्रंप के इस सुझाव पर व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया सामने आई है. व्हाइट हाउस ने कहा कि यह सुनने में काफी ज्यादा अच्छा लग रहा है.
होर्मुज स्ट्रेट में माइंस से टकराए जहाज
दो दिन पहले, होर्मुज स्ट्रेट में एक सुपर टैंकर दो समुद्री माइंस से टकरा गया है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स के अनुसार, माइंस से टकराने का बाद टैंकर में भीषण आग लग गई. वह पूरी तरह से रुक गया. ईरान ने जहाज का नाम और चालक दल की संख्या नहीं बताई. IRGC ने कहा कि टैंकर बिना अनुमति वाले समुद्री रास्ते से गुजर रहा था. ईरान ने निर्देश दिए कि होर्मुज स्ट्रेट में अपने तय सुरक्षा नियमों का पालन करें. अगर जहाज ईरानी नियमों का पालन नहीं करेंगे तो उन जहाजों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
अमेरिका का ईरान पर हमला
अमेरिकी सेना ने रविवार को होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाया. अमेरिका का कहना है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जवान होर्मुज स्ट्रेट में रॉकेट और समुद्री माइंस लॉन्च करने की तैयारी कर रहे थे. ईरानी मीडिया ने हमले में कई सारे सैनिकों और नागरिकों के मरने की बात की.
ईरान ने दिया मुंहतोड़ जवाब
अमेरिका के हमले का ईरान ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया. ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिका को दो एयरबेसों पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया. ईरानी मीडिया के अनुसार, मिसाइलों को अमेरिका एयरबेस के तकनीकी और मेंटेनेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और लड़ाकू विमानों की तैनाती वाले क्षेत्रों को निशाना बनाकर मारा गया. स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जॉर्डन के एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी मिसाइलों को रोककर हवा में ही मार गिराया.
ट्रंप ने कनाडा की झील का नाम भी बदला
हाल में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा की लेक ओंटारियो का नाम बदल दिया है. उन्होंने इस लेक का नाम लेक अमेरिका करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिया है. ट्रंप के इस आदेश के अनुसार, 30 दिनों में इस प्रक्रिया को पूरा किा जाएगा और अमेरिका के सरकारी नक्शों और रिकॉर्ड में नए नाम का इस्तेमाल किया जाएगा. ट्रंप ने अपने इस फैसलों की तुलना मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर अमेरिका की खाड़ी करने की थी. उन्होंने मजाक करते हुए कहा कि अमेरिका के पास अब एक खाड़ी है और एक झील है. उन्होंने कहा कि अब वे प्रशांत और अटलांटिक महासागर का नाम भी बदवल सकते हैं.
कनाडाई प्रधानमंत्री ने ट्रंप के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका लेक का नाम बदल रहा है, हम यह बात जानते हैं. लेकिन कनाडाई भी अच्छे से जानते हैं कि इसका नाम लेक ओंटारियो ही है. पहले भी यह अमेरिका का था और अब भी यह अमेरिका का ही है. इस झील को कनाडा लेक ओंटारियो ही बुलाएगा. बता दें, लेक ओंटारियो अमेरिका और कनाडा के बीच स्थित पांच बड़ी झीलों में से एक है. इसके एक तरफ न्यूयॉर्क और दूसरी तरफ कनाडा का ओंटारियो प्रांत है.
'बार काउंसिल का काम नहीं लॉ स्टूडेंट्स को अनुशासित करना', NALSAR विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को एक बार फिर कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने साफ किया कि वकीलों की रेगुलेटरी बॉडी के पास लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्रों को अनुशासित करने का कोई कानूनी अधिकार या काम नहीं है, और वह लॉ यूनिवर्सिटीज को यह नहीं बता सकती कि उन्हें छात्रों के व्यवहार से कैसे निपटना चाहिए.
दरअसल, हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करने के BCI के निर्देशों को रद्द करते हुए, चीफ़ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये बात कही. कोर्ट ने कहा कि लॉ के छात्रों पर अनुशासनात्मक नियंत्रण पूरी तरह से उस यूनिवर्सिटी या शिक्षण संस्थान का होता है जहां वे एनरोल्ड हैं.
'BCI नहीं कर सकता लॉ स्टूडेंट्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई'
इसके साथ ही जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना वाली बेंच ने माना कि एडवोकेट्स एक्ट, 1961, जिसके तहत BCI का गठन हुआ है, उसे छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की कोई स्पष्ट या निहित शक्ति नहीं देता है. हालांकि काउंसिल कानून और लागू नियमों के अनुसार कानूनी शिक्षा के मानक तय कर सकती है और उन्हें लागू कर सकती है, लेकिन "वह किसी लॉ स्टूडेंट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं कर सकती."
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने NALSAR के छात्रों के खिलाफ बीसीआई के 13 अगस्त के कम्युनिकेशन और उसके बाद जारी सभी बदले हुए कम्युनिकेशन को "अधिकार-क्षेत्र से बाहर" (बिना अधिकार के) घोषित कर दिया. साथ ही, बेंच ने अपना पिछला अंतरिम आदेश भी पक्का कर दिया, जिसमें BCI और राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या आपराधिक कार्रवाई करने से रोका गया था.
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