चंडीगढ़, दो सितंबर हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने बुधवार को राज्य में जन्म के समय लिंगानुपात में ‘‘लगातार गिरावट’’ को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर तीखा हमला बोला। सिंह ने कहा कि जिस हरियाणा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2015 में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत की थी, आज उसी राज्य में पैदा होने वाली लड़कियों की संख्या लगातार घट रही है, जो सरकार के दावों की वास्तविकता उजागर करती है। सिंह ने कहा कि हाल में संपन्न विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार द्वारा पेश किए गए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं।
हरियाणा में जून 2026 तक जन्म के समय लिंगानुपात (एसआरबी) 900 दर्ज किया गया है, जबकि पूरे 2025 और 2019 में यह 923 था। कांग्रेस नेता सिंह ने एक बयान में कहा, ‘‘हरियाणा में जन्म के समय लिंगानुपात 2025 में 923 था, लेकिन जून 2026 तक घटकर केवल 900 रह गया—महज छह महीने में 23 अंकों की गिरावट। इसका मतलब है कि 1,000 लड़कों पर लड़कियों की संख्या 23 कम हो गई है।
यह करीब आठ वर्षों में राज्य में दर्ज सबसे निचला स्तर है।’’
उन्होंने कहा कि सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के नाम पर कार्यक्रम आयोजित कर रही है और विज्ञापन जारी कर रही है, लेकिन पैदा होने वाली लड़कियों का अनुपात जमीनी स्तर पर लगातार घट रहा है। उन्होंने कहा कि यह महज आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों और निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता का स्पष्ट संकेत है। सिंह ने कहा कि जिलेवार आंकड़े भी चिंता का कारण हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘चरखी दादरी में लिंगानुपात 913 से घटकर 829 हो गया।’’
उन्होंने कहा कि अंबाला में यह अनुपात 2019 के 959 से घटकर जून 2026 तक 884 हो गया। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में यह 910 से घटकर 871, रेवाड़ी में 919 से घटकर 891, झज्जर में 914 से घटकर 871, जींद में 938 से घटकर 878, पानीपत में 939 से घटकर 880, कैथल में 919 से घटकर 903 और यमुनानगर में 936 से घटकर 895 हो गया। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत, करनाल में 945, पलवल में 930, फरीदाबाद में 920, नूंह में 918 और फतेहाबाद में 917 का लिंगानुपात तुलनात्मक रूप से बेहतर रहा।
सरकार के अनुसार, कन्या भ्रूण हत्या रोकने और लिंगानुपात में सुधार के लिए गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) (पीसीपीएनडीटी) अधिनियम तथा चिकित्सा गर्भपात अधिनियम के तहत 1,422 मामले दर्ज किए गए हैं। ‘बेटी के साथ सेल्फी’, ‘प्यारी बेटी न्यूजलेटर’ और फिल्म महोत्सव जैसी जागरूकता पहल भी आयोजित की जा रही हैं।
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महिला क्रिकेट के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बुधवार को घोषणा की कि पहली आईसीसी महिला चैंपियंस ट्रॉफी 2027 का आयोजन भारत में किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 14 से 28 फरवरी 2027 तक मुंबई और वडोदरा में खेला जाएगा। प्रतियोगिता का फाइनल 28 फरवरी को आयोजित होगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार मुंबई के क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया और वडोदरा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को टूर्नामेंट के लिए चुना गया है। इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में दुनिया की छह मजबूत महिला क्रिकेट टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका शामिल हैं।
इन छह टीमों का चयन 6 जुलाई की निर्धारित योग्यता तिथि पर आईसीसी महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम रैंकिंग में उनकी स्थिति के आधार पर हुआ है। सभी टीमें लीग चरण में एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगी। इसके बाद अंक तालिका में शीर्ष दो स्थान पर रहने वाली टीमें खिताबी मुकाबले में आमने-सामने होंगी।
बता दें कि महिला चैंपियंस ट्रॉफी का पहला संस्करण पहले श्रीलंका में आयोजित किया जाना था। हालांकि श्रीलंका क्रिकेट को आईसीसी के वार्षिक सम्मेलन में जुलाई में तय किए गए सुधारों को पूरा करना है। इसी वजह से आयोजन की मेजबानी बदलने का फैसला किया गया।
मेजबान देश के चयन के लिए आईसीसी ने बांग्लादेश, भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्तावों का मूल्यांकन किया। इसके लिए तय मेजबानी मानकों के आधार पर तीनों देशों की व्यवस्थाओं और क्षमताओं को परखा गया। इसके बाद भारत को नए मेजबान के रूप में चुने जाने की सिफारिश की गई। आईसीसी बोर्ड ने 2 सितंबर को इस फैसले को मंजूरी दे दी।
आईसीसी के अध्यक्ष जय शाह ने कहा कि महिला चैंपियंस ट्रॉफी 2027 महिला क्रिकेट के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। उनके अनुसार पहली बार होने वाला यह टूर्नामेंट दुनिया की शीर्ष टीमों को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी मंच देगा। साथ ही टीमों के लिए विश्व रैंकिंग में ऊपर पहुंचने और वैश्विक स्तर पर अपनी जगह मजबूत करने की प्रेरणा भी बढ़ेगी।
गौरतलब है कि आईसीसी महिला क्रिकेट में लगातार बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हर साल एक प्रमुख महिला प्रतियोगिता आयोजित होने से खिलाड़ियों को नियमित रूप से उच्च स्तर के मुकाबले खेलने का अवसर मिलेगा। इससे महिला क्रिकेट की लोकप्रियता और दर्शकों की भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
भारत में होने वाले इस टूर्नामेंट का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां महिला क्रिकेट को लेकर दर्शकों की रुचि लगातार बढ़ी है। मुंबई और वडोदरा जैसे क्रिकेट केंद्रों में आयोजन से खिलाड़ियों को बड़े मंच पर खेलने का अनुभव मिलेगा।
आईसीसी ने कहा है कि टूर्नामेंट के टिकटों की बिक्री और सभी मुकाबलों का विस्तृत कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा। फिलहाल छह टीमों के बीच होने वाली इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता को लेकर महिला क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें फरवरी 2027 पर टिकी हुई हैं।
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