Explainer: 952 रनों का वो 'अमर रिकॉर्ड', जिसे तोड़ने के लिए टेस्ट क्रिकेट को लेना होगा दोबारा जन्म! सामने था भारत
टेस्ट क्रिकेट आज के वक्त में काफी बदल गया है, क्योंकि इस पर टी20 क्रिकेट का भी असर हो रहा है. इसी के कारण आज के टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज पहली ही गेंद से आक्रामक बल्लेबाजी करते हैं और मैच को जल्दी खत्म करते हैं. आज के आधुनिक क्रिकेट में बल्लेबाज पहली गेंद से डिफेंस करना नहीं सोचते हैं, बल्कि वे बड़े-बड़े शॉट्स लगाने और रिवर्स स्वीप या रैंप शॉट खेलने से भी नहीं हिचकते हैं. लेकिन, आज के टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज कितनी भी आक्रामक बल्लेबाजी करें और रन बनाएं, एक ऐसा रिकॉर्ड है जिसे टूटने के लिए टेस्ट क्रिकेट को फिर से जन्म लेना पड़ सकता है. सन 1997 में कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में एक ऐसा इतिहास रचा गया था, जिसे आज भी टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा और लगभग 'असंभव' लगने वाला रिकॉर्ड माना जाता है. भारत के खिलाफ श्रीलंका क्रिकेट टीम द्वारा बनाए गए 6 विकेट पर 952 रनों के स्कोर को आज करीब तीन दशक होने वाले हैं, लेकिन कोई भी टीम इस आंकड़े के आस-पास भी नहीं पहुंच सकी है. क्या श्रीलंका का यह महा-रिकॉर्ड कभी टूट पाएगा, और अगर हां, तो इसके लिए किस तरह की परिस्थितियां जिम्मेदार होंगी? चलिए इस आर्टिकल में जानते हैं.
'बैजबॉल' से बहुत पहले रचा गया था कोलंबो का वो 952 रनों का वर्ल्ड रिकॉर्ड
अगस्त 1997 में भारत के खिलाफ खेले गए उस मुकाबले में श्रीलंका का एकमात्र उद्देश्य भारतीय गेंदबाजों को थकाना और एक बड़ा स्कोर खड़ा करना था. पहली पारी में भारत के 537 रनों के विशाल स्कोर का पीछा करते हुए सनथ जयसूर्या (340 रन) और रोशन महानामा (225 रन) ने ऐतिहासिक साझेदारी की थी. उस समय न तो 'बैजबॉल' जैसी किसी आक्रामक मानसिकता का वजूद था और न ही टीमें रिजल्ट को लेकर बैचेन होती थीं. श्रीलंका ने बेहद धीमी और उबाऊ, लेकिन मजबूत बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया था. कोलंबो के प्रेमदास स्टेडियम की उस पिच पर नतीजा निकलना नामुमकिन था, इसलिए श्रीलंकाई टीम ने परिणाम की चिंता किए बिना सिर्फ रन बनाने पर ध्यान केंद्रित किया. आज के दौर में ऐसी धीमी और रक्षात्मक बल्लेबाजी की जमकर आलोचना हो सकती है, लेकिन उस युग के क्रिकेट में यह एक रणनीतिक और ऐतिहासिक उपलब्धि थी.
आधुनिक क्रिकेट में 952 रनों का रिकॉर्ड टूटने के मार्ग में बड़ी चुनौतियां
आज के टेस्ट क्रिकेट का माहौल 1997 के दौर से पूरी तरह अलग हो चुका है. अब टेस्ट क्रिकेट में श्रीलंका का यह रिकॉर्ड न टूटने के पीछे कई मुख्य कारण हैं, जिनमें सबसे बड़ी वजह आज के दौर में धीमी बल्लेबाजी की होने वाली तीखी आलोचना है. आज अगर कोई टीम सिर्फ रिकॉर्ड बनाने के लिए दिनों-दिन बल्लेबाजी करती रहे और मैच को ड्रॉ की तरफ ले जाए, तो क्रिकेट विशेषज्ञ और फैंस उसकी कड़ी निंदा करते हैं. इसके अलावा वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के आने के बाद से टीमों की सोच अब सिर्फ जीतने पर होती है. यानी कैसे भी मैच का रिजल्ट निकले.
यही वजह है कि कप्तान अब रनों के रिकॉर्ड के बजाय मैच जीतने के लिए जल्द से जल्द पारी घोषित करने पर ध्यान देते हैं. साथ ही, अब पिचों का मिजाज भी काफी बदल गया है. आधुनिक दौर में आईसीसी और पिच क्यूरेटर ऐसी पिचें बनाने की कोशिश करते हैं जो गेंदबाजों और बल्लेबाजों दोनों को समान रूप से मदद करें ताकि मैच का परिणाम 4 या 5 दिनों के भीतर निकल सके, जिसके कारण पूरी तरह सपाट या 'हाईवे' जैसी पिचें अब बहुत कम देखने को मिलती हैं.
मुल्तान की पिच पर टूट सकता है ये रिकॉर्ड
अगर भविष्य में कभी 952 रनों का यह रिकॉर्ड टूटता है, तो इसकी संभावना प्रेमदासा जैसी परिस्थितियों में नहीं, बल्कि मुल्तान टेस्ट 2024 जैसी स्थिति में ही बन सकती है. अक्टूबर 2024 में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच मुल्तान में खेले गए उस ऐतिहासिक मैच ने यह दिखा दिया कि आधुनिक क्रिकेट में विशाल स्कोर कैसे बनते हैं और उनके परिणाम कैसे निकलते हैं.
मुल्तान में खेले गए उस मैच में पाकिस्तान ने पहली बल्लेबाजी करते हुए 556 रनों का बड़ा स्कोर खड़ा किया था. इसके जवाब में इंग्लैंड ने अपनी 'बैजबॉल' शैली में खेलते हुए 150 ओवरों में 5.48 की रन रेट से 7 विकेट पर 823 रन बना डाले और पारी घोषित कर दी थी. इंग्लैंड ने इस महा-स्कोर के दम पर न सिर्फ मैच को ड्रॉ होने से बचाया, बल्कि पाकिस्तान को एक पारी और 47 रनों से शिकस्त भी दी. इससे यह पता चलता है कि 952 रनों का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए किसी भी टीम को मुल्तान जैसी ही स्क्रिप्ट लिखनी होगी.
इसमें कोई शक नहीं है कि इंग्लैंड जैसी धाकड़ टीमें किसी कमजोर गेंदबाजी के सामने मुल्तान जैसा कारनामा कभी भी दोबारा कर सकती हैं. लेकिन, सच तो यह है कि ऐसा मौका बार-बार नहीं आता. क्रिकेट के इतिहास में ऐसी बिल्कुल सपाट पिच, कमजोर गेंदबाजी और बिना किसी डर के की जाने वाली बल्लेबाजी का मेल कभी-कभार ही देखने को मिलता है. इसलिए, जब तक टेस्ट क्रिकेट की पिचें पूरी तरह से बल्लेबाजों के लिए मददगार नहीं बन जातीं, तब तक श्रीलंका का 952 रनों का यह विशाल रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित है. कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम का वो इतिहास आज भी एक ऐसा पहाड़ है, जिसे पार करना आज की किसी भी टीम के लिए माउंट एवरेस्ट चढ़ने जैसा मुश्किल काम है.
यह भी पढ़ें: 'विराट में कंगारुओं जैसी भूख, रोहित अमूल्य धरोहर...,' भारतीय दिग्गजों के मुरीद हुए महान फील्डर जॉन्टी रोड्स
Akhilesh Yadav on Reservation: 'आरक्षण था, है और रहेगा', सहारनपुर पहुंचे अखिलेश यादव ने खोला पार्टी का एजेंडा
Akhilesh Yadav on Reservation: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सहारनपुर के अपने अहम दौरे के दौरान जनता और कार्यकर्ताओं के बीच आगामी राजनीति की दिशा तय कर दी. उन्होंने साफ कहा कि आने वाले समय में पार्टी का चुनावी घोषणापत्र किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि जमीन पर मौजूद जनता और क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को समझकर तैयार किया जाएगा. उन्होंने सामाजिक न्याय, आरक्षण, खेती-किसानी और युवाओं के भविष्य को लेकर पार्टी की प्राथमिकताओं को सामने रखा.
आरक्षण और सामाजिक न्याय पर दो टूक रुख
अखिलेश यादव ने आरक्षण के मसले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि आरक्षण व्यवस्था कोई नई व्यवस्था नहीं है. आरक्षण पहले भी था, आज भी पूरी मजबूती से है और आगे भी लगातार रहेगा. उन्होंने सामाजिक संतुलन के लिए जातीय जनगणना को बेहद जरूरी बताया. उनका कहना था कि जब तक आबादी के सही आंकड़े सामने नहीं आएंगे, तब तक हर वर्ग को उसकी संख्या के अनुसार पूरा हक और सम्मान मिलना संभव नहीं है. उन्होंने दोहराया कि उनकी पार्टी इस बात पर बिल्कुल स्पष्ट है कि जिसकी जितनी आबादी हो, उसे उतनी ही हिस्सेदारी और अधिकार मिलना चाहिए.
गन्ना किसानों की खुशहाली से जुड़ेगा क्षेत्र का विकास
सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र की रीढ़ गन्ना किसान हैं. अखिलेश यादव ने इस बात को रेखांकित करते हुए कहा कि जब तक खेत में पसीना बहाने वाले किसान की जेब में पैसा नहीं पहुंचेगा, तब तक तरक्की की बात अधूरी रहेगी. उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी फसल का उचित और लाभकारी मूल्य तय समय सीमा के भीतर मिलना चाहिए. इसके साथ ही खेती की लागत कम करने के लिए उन्नत किस्म के बीज, सस्ती कृषि दवाइयां और आधुनिक तकनीक की पहुंच गांव-गांव तक होनी चाहिए. गन्ने से बनने वाले इथेनॉल और चीनी मिलों के कारोबार पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उद्योग और किसान दोनों के बीच संतुलन होना चाहिए. उद्योगों के मुनाफे के साथ-साथ किसान को भी उसकी उपज का उचित लाभ मिलना जरूरी है.
हुनरमंद कारीगरों को नई पहचान की दरकार
सहारनपुर का नाम पूरी दुनिया में लकड़ी की नक्काशी और बेहतरीन हस्तशिल्प के लिए जाना जाता है. सपा अध्यक्ष ने यहां के हुनरमंद कारीगरों की समस्याओं को उठाते हुए कहा कि इन मेहनतकश लोगों को आज आधुनिक प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बेहतर बुनियादी ढांचे की जरूरत है. उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी ठोस योजनाएं लानी चाहिए जिससे यहां बने लकड़ी के उत्पाद सीधे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बड़े बाजारों तक पहुंच सकें. इससे न केवल कारीगरों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि सहारनपुर के पारंपरिक उद्योग को भी एक नई उड़ान मिलेगी.
नल-जल योजना और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर उठाए सवाल
सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर सवाल उठाते हुए अखिलेश यादव ने नल-जल योजना की कार्यशैली पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि जमीन पर देखने में आता है कि कहीं पाइपलाइन बिछा दी गई तो पानी की टंकी नहीं है, और जहां टंकी बन गई वहां पानी का स्थायी स्रोत ही मौजूद नहीं है. उन्होंने कहा कि केवल ढांचा खड़ा कर देने से लोगों की प्यास नहीं बुझती. पानी की आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक योजना और पानी निकासी का सही प्रबंध होना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने एक्सप्रेसवे और सड़कों के रखरखाव पर बात करते हुए कहा कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए. बड़े प्रोजेक्ट्स के बनने के बाद उनकी लगातार निगरानी होनी चाहिए ताकि आम जनता को सुरक्षित सफर मिल सके.
युवाओं के लिए खेल मैदान और सेना में स्थायी नौकरी की मांग
सहारनपुर के युवाओं में खेल और सेना के प्रति जबरदस्त उत्साह रहता है. इस बात को ध्यान में रखते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इस इलाके में आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम बनाए जाने की सख्त जरूरत है, ताकि ग्रामीण प्रतिभाओं को सही मंच मिल सके. रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने पार्टी का रुख दोहराते हुए कहा कि सेना में चार साल की अग्निवीर योजना युवाओं के भविष्य के साथ न्याय नहीं करती. युवाओं को सेना में पक्की और स्थायी नौकरी मिलनी चाहिए ताकि उनका और देश का भविष्य सुरक्षित रहे. उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी युवाओं के खेल, शिक्षा और रोजगार के अवसरों को सबसे ऊपर रखेगी.
आगामी चुनावी तैयारी और जनसंपर्क अभियान
दौरे के अंत में अखिलेश यादव ने संगठन को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को लेकर कार्यकर्ताओं को दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि चुनाव करीब आने पर पार्टी बड़े स्तर पर जनता के बीच जाएगी और जनहित के मुद्दों को पूरी ताकत से उठाएगी. गठबंधन को लेकर उन्होंने साफ किया कि जो पुरानी व्यवस्था और तालमेल है, उसी के आधार पर आगे कदम बढ़ाए जाएंगे. पूरे दौरे का सार यही रहा कि समाजवादी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों, कामगारों, युवाओं और दबे-कुचले वर्गों को एकजुट करके स्थानीय विकास को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बनाना चाहती है.
यह भी पढ़ें: यूपी चुनाव के लिए कांग्रेस-सपा के बीच गठबंधन लगभग तय, अखिलेश से पहले से ज्यादा सीटों की हो सकती है डिमांड
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation







