भारतीय जर्मनी में एएफडी के बढ़ते असर को लेकर क्या बोले [AfD Surge vs Migrants & Indians In Germany]
बुजुर्ग होती आबादी, कामकाजी लोगों की कमी, धुर-दक्षिणपंथी एएफडी पार्टी के लिए बढ़ता समर्थन और आप्रवासियों के प्रति बढ़ता संशय, ये जर्मनी के सैक्सनी-अनहाल्ट राज्य में आम भावनाएं हैं. यहां 6 सितंबर के चुनाव में जो होगा, वो आगे चलकर जर्मनी में बड़े बदलावों की शुरुआत कर सकता है. #dwhindi #saxonyanhalt #afd #indian An aging population, labor shortages, rising support for AfD, and growing anxiety among immigrants. Saxony-Anhalt has become the frontline of Germany's migration debate. What happens here could shape the future of Europe's largest economy. 00:00 Germany's Fast-Aging Population Problem 01:15 AfD's Migration Agenda Takes Center Stage 03:06 Economy, Labor Shortages and Foreign Workers 05:19 How Immigrants Experience Life in Saxony-Anhalt 08:05 Election Stakes and Germany's Political Future
राममंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरी को जानिए:17 साल की उम्र में पहली कथा की, इससे पहले कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी थी
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बुधवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ। ट्रस्ट ने स्वामी गोविंद देव गिरी को नया महासचिव नियुक्त किया है। इससे पहले वे ट्रस्ट में कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। चंपत राय के महासचिव पद से हटने के बाद ट्रस्ट में नई व्यवस्था बनाई जा रही है। इसी के तहत स्वामी गोविंद देव गिरी को महासचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। गोविंद देव गिरी महाराज केवल राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े संत नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और भगवद्गीता जैसे धर्मग्रंथों पर प्रवचन देते रहे हैं। 17 साल की उम्र में उन्होंने अपने गांव बेलापुर में पहली बार भगवद्गीता पर प्रवचन दिया था। इसके बाद देश-विदेश में उनके धार्मिक प्रवचनों का सिलसिला जारी रहा। राम मंदिर आंदोलन और मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना 11 दिन का उपवास स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज के हाथों से जूस ग्रहण कर समाप्त किया था। अब ट्रस्ट के महासचिव के रूप में उनके सामने मंदिर के प्रशासन, प्रबंधन और ट्रस्ट की गतिविधियों को आगे बढ़ाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। महाराष्ट्र के बेलापुर में जन्म, नाम था किशोरजी व्यास स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज का जन्म 25 जनवरी 1949 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर जिले के बेलापुर गांव में हुआ था। उनका मूल नाम किशोर मदनगोपाल व्यास था। बाद में वे आचार्य किशोरजी व्यास के नाम से भी प्रसिद्ध हुए। धार्मिक वातावरण वाले परिवार में पले-बढ़े गोविंद देव गिरी ने प्रारंभिक शिक्षा बेलापुर में ही हासिल की। इसके बाद वे स्वाध्याय परिवार के संस्थापक पांडुरंग शास्त्री आठवले द्वारा स्थापित तत्वज्ञान विद्यापीठ से जुड़े। यहां उन्होंने दर्शनशास्त्र की पढ़ाई की। आगे वे वाराणसी पहुंचे, जहां वेद, उपनिषद और भारतीय दर्शन का अध्ययन किया और वैदिक विद्वान डॉ. विश्वनाथजी देव के मार्गदर्शन में ‘दर्शनाचार्य’ की उपाधि प्राप्त की। 17 साल की उम्र में पहली कथा, फिर देश-विदेश में प्रवचन गोविंद देव गिरी महाराज की पहचान सबसे पहले एक धर्मग्रंथों के विद्वान और कथावाचक के रूप में बनी। उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में अपने गांव में श्रीमद्भागवत और भगवद्गीता पर प्रवचन शुरू किया। इसके बाद उन्होंने रामायण, महाभारत, भगवद्गीता, ज्ञानेश्वरी, दासबोध, योग वशिष्ठ, श्रीदेवी भागवत, शिव पुराण और हनुमान कथा जैसे विषयों पर प्रवचन किए। उनके प्रवचन भारत के अलावा विदेशों में भी हुए हैं। 2006 में लिया परमहंस संन्यास, नाम पड़ा गोविंद देव गिरी उनके जीवन का बड़ा बदलाव वर्ष 2006 में आया। 30 अप्रैल 2006 को हरिद्वार में गंगा तट पर उन्होंने परमहंस संन्यास की दीक्षा ली। यह दीक्षा स्वामी सत्यमित्रानंद गिरी से हुई थी और कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य स्वामी जयेन्द्र सरस्वती का आशीर्वाद भी उन्हें प्राप्त था। संन्यास लेने के बाद आचार्य किशोरजी व्यास का नाम औपचारिक रूप से स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज हो गया। वेदों के प्रचार के लिए बनाई संस्था गोविंद देव गिरी महाराज ने केवल प्रवचन तक अपनी गतिविधियां सीमित नहीं रखीं। उन्होंने वेदों के अध्ययन और प्रचार-प्रसार के लिए महर्षि वेदव्यास प्रतिष्ठान की स्थापना की। संस्था की स्थापना 21 फरवरी 1990 को आलंदी में की गई थी। इससे जुड़े विभिन्न वैदिक विद्यालयों के माध्यम से वेदों और वैदिक परंपरा के अध्ययन को बढ़ावा देने का काम किया गया। राम मंदिर ट्रस्ट में शुरुआत से महत्वपूर्ण भूमिका श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में गोविंद देव गिरी महाराज को शुरुआत से ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। वे ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष रहे और मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों की निगरानी में उनकी भूमिका रही। ट्रस्ट के सदस्य के रूप में वे मंदिर निर्माण और प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में भी शामिल रहे। जुलाई 2026 में राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और वित्तीय निगरानी पर सवाल उठे। उस दौरान गोविंद देव गिरी ने कहा था कि व्यवस्था में कमियां रही हैं और प्रशासनिक अनुशासन मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने चंपत राय का बचाव करते हुए उनकी नीयत पर सवाल नहीं उठाने की बात भी कही थी। प्राण प्रतिष्ठा में पीएम मोदी का उपवास तुड़वाया 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान गोविंद देव गिरी महाराज की भूमिका खास तौर पर चर्चा में रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राण प्रतिष्ठा से पहले 11 दिन का उपवास रखा था। समारोह के बाद उन्होंने स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज के हाथों से प्रसाद ग्रहण कर अपना उपवास समाप्त किया था। इस तस्वीर के बाद स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चित हुए। अब महासचिव के रूप में क्या होगी जिम्मेदारी? महासचिव का पद राम मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में बेहद महत्वपूर्ण है। ट्रस्ट के फैसलों को लागू कराने, विभिन्न समितियों के बीच समन्वय, मंदिर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं की निगरानी तथा ट्रस्ट की प्रशासनिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में महासचिव की भूमिका अहम होगी। चंपत राय के इस्तीफे के बाद कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। जुलाई 2026 की ट्रस्ट बैठक में स्थायी महासचिव की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय हुआ था। अब स्वामी गोविंद देव गिरी को यह जिम्मेदारी मिलने के साथ ट्रस्ट की नई प्रशासनिक टीम का स्वरूप स्पष्ट हो गया है। CEO के साथ मिलकर संभालेंगे नई व्यवस्था राम मंदिर ट्रस्ट ने इसी बैठक में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी नियुक्त किया है। यानी अब ट्रस्ट में धार्मिक और आध्यात्मिक नेतृत्व के साथ पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। एक तरफ CEO मंदिर और ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी संभालेंगे, वहीं महासचिव के रूप में स्वामी गोविंद देव गिरी ट्रस्ट की निर्णय प्रक्रिया और विभिन्न गतिविधियों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। ------------------------------- ये खबर भी पढ़िए- राममंदिर के पहले CEO बने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा: ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी कमान के लीडर थे; चंपत राय की जगह गोविंद देव गिरि महासचिव पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO होंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को इसका ऐलान किया। मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर में पश्चिमी वायु कमान को लीड किया और एयरफोर्स में 39 साल काम किया। पढ़ें पूरी खबर…
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