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Mozambique Benga Mine विवाद: ICC के आंशिक फैसले पर Delhi High Court ने जारी किया नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया जिनमें मोज़ाम्बिक की बेंगा कोयला खदान से जुड़े माइनिंग-सर्विस कॉन्ट्रैक्ट के विवाद में इंटरनेशनल चैंबर ऑफ़ कॉमर्स (ICC) के आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल द्वारा दिए गए आंशिक फ़ैसले (पार्शियल अवार्ड) को चुनौती दी गई थी। जस्टिस सचिन दत्ता ने ब्लैक गोल्ड रिसोर्सेज़ प्राइवेट लिमिटेड (BGR) और ट्राइडेंट केमफ़ार लिमिटेड (TCL) द्वारा इस आंशिक फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। इस फ़ैसले में 2:1 के बहुमत से TCL को—जो कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने वाली पार्टी नहीं थी—BGR और मिनास डी बेंगा लिमिटडा (MBL) के बीच आर्बिट्रेशन में शामिल होने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए तीन हफ़्ते का समय दिया और मामले की सुनवाई के लिए 6 अक्टूबर, 2026 की तारीख तय की।

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ट्रिब्यूनल के प्रमुख प्रोफेसर सुंद्रा राजू थे, और उनके साथ सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस एल. नागेश्वर राव और डीके सिंह सह-मध्यस्थ (co-arbitrators) थे। 5 मई के अपने आंशिक फैसले में, प्रोफेसर राजू और जस्टिस राव ने बहुमत से यह माना कि TCL को मध्यस्थता में शामिल किया जा सकता है, जबकि सिंह ने इससे असहमति जताई। सुनवाई के दौरान, BGR की ओर से सीनियर एडवोकेट अमित सिबल ने एडवोकेट मयंक जैन, शांतनु अग्रवाल, मधुर जैन और अर्पित गोयल के साथ दलील दी कि माइनिंग-सर्विसेज कॉन्ट्रैक्ट और मध्यस्थता समझौता, दोनों ही मोज़ाम्बिक के कानून के तहत आते हैं।

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उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल लागू होने वाले कानून का फैसला किए बिना किसी ऐसे पक्ष को शामिल नहीं कर सकता था जिसने समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। BGR के अनुसार, ट्रिब्यूनल ने इस मामले में गलत तरीके से भारतीय कानून लागू किया, जबकि मूल कॉन्ट्रैक्ट मोज़ाम्बिक के कानून के तहत आता था। सिबल ने कहा, "हमने मोज़ाम्बिक के कानून का हवाला दिया और ट्रिब्यूनल ने एक शब्द में उसे खारिज कर दिया। BGR ने 'डिसऑर्थो S.A.S. बनाम मेरिल लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड' मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि मध्यस्थता क्लॉज़ आमतौर पर उसी कानून का पालन करता है जो मूल कॉन्ट्रैक्ट पर लागू होता है।TCL की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अभिमन्यु महाजन ने पक्षपात, जानकारी न देने और ICC की संस्थागत विफलता के आरोपों के आधार पर इस फैसले को अलग से चुनौती दी। महाजन ने प्रोफेसर राजू द्वारा दी गई जानकारी और ICC द्वारा उनकी नियुक्ति तथा बाद में उन्हें चुनौती दिए जाने के मामले को संभालने के तरीके पर सवाल उठाए। 

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Nepal Flood: अपनों की राख तक नहीं मिली! 4800 परिवारों पर अब टूट सकता है नया संकट

Nepal Flood Crisis: नेपाल में शवों को जलाने के बजाय दफनाया जा रहा है। जानिए 'मास ग्रेव्स' के पीछे की मजबूरी और 4800 लापता परिवारों का नया कानूनी संकट क्या आ सकता है।

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  Sports

ICC Women’s Champions Trophy 2027: भारत की मेजबानी में शुरू होगा महिला क्रिकेट का नया युग, Jay Shah ने दी मंजूरी

महिला क्रिकेट के लिए बड़ी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने बुधवार को घोषणा की कि पहली आईसीसी महिला चैंपियंस ट्रॉफी 2027 का आयोजन भारत में किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित टूर्नामेंट 14 से 28 फरवरी 2027 तक मुंबई और वडोदरा में खेला जाएगा। प्रतियोगिता का फाइनल 28 फरवरी को आयोजित होगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार मुंबई के क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया और वडोदरा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम को टूर्नामेंट के लिए चुना गया है। इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में दुनिया की छह मजबूत महिला क्रिकेट टीमें हिस्सा लेंगी। इनमें ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, भारत, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका शामिल हैं।

इन छह टीमों का चयन 6 जुलाई की निर्धारित योग्यता तिथि पर आईसीसी महिला टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम रैंकिंग में उनकी स्थिति के आधार पर हुआ है। सभी टीमें लीग चरण में एक-दूसरे के खिलाफ खेलेंगी। इसके बाद अंक तालिका में शीर्ष दो स्थान पर रहने वाली टीमें खिताबी मुकाबले में आमने-सामने होंगी।

बता दें कि महिला चैंपियंस ट्रॉफी का पहला संस्करण पहले श्रीलंका में आयोजित किया जाना था। हालांकि श्रीलंका क्रिकेट को आईसीसी के वार्षिक सम्मेलन में जुलाई में तय किए गए सुधारों को पूरा करना है। इसी वजह से आयोजन की मेजबानी बदलने का फैसला किया गया।

मेजबान देश के चयन के लिए आईसीसी ने बांग्लादेश, भारत और दक्षिण अफ्रीका के प्रस्तावों का मूल्यांकन किया। इसके लिए तय मेजबानी मानकों के आधार पर तीनों देशों की व्यवस्थाओं और क्षमताओं को परखा गया। इसके बाद भारत को नए मेजबान के रूप में चुने जाने की सिफारिश की गई। आईसीसी बोर्ड ने 2 सितंबर को इस फैसले को मंजूरी दे दी।

आईसीसी के अध्यक्ष जय शाह ने कहा कि महिला चैंपियंस ट्रॉफी 2027 महिला क्रिकेट के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत होगी। उनके अनुसार पहली बार होने वाला यह टूर्नामेंट दुनिया की शीर्ष टीमों को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी मंच देगा। साथ ही टीमों के लिए विश्व रैंकिंग में ऊपर पहुंचने और वैश्विक स्तर पर अपनी जगह मजबूत करने की प्रेरणा भी बढ़ेगी।

गौरतलब है कि आईसीसी महिला क्रिकेट में लगातार बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों की संख्या बढ़ाने पर जोर दे रहा है। हर साल एक प्रमुख महिला प्रतियोगिता आयोजित होने से खिलाड़ियों को नियमित रूप से उच्च स्तर के मुकाबले खेलने का अवसर मिलेगा। इससे महिला क्रिकेट की लोकप्रियता और दर्शकों की भागीदारी बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

भारत में होने वाले इस टूर्नामेंट का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यहां महिला क्रिकेट को लेकर दर्शकों की रुचि लगातार बढ़ी है। मुंबई और वडोदरा जैसे क्रिकेट केंद्रों में आयोजन से खिलाड़ियों को बड़े मंच पर खेलने का अनुभव मिलेगा।

आईसीसी ने कहा है कि टूर्नामेंट के टिकटों की बिक्री और सभी मुकाबलों का विस्तृत कार्यक्रम बाद में जारी किया जाएगा। फिलहाल छह टीमों के बीच होने वाली इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता को लेकर महिला क्रिकेट प्रशंसकों की नजरें फरवरी 2027 पर टिकी हुई हैं।
Wed, 02 Sep 2026 22:08:00 +0530

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