श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बेहद नजदीक आ चुका है। इस दिन साधक भगवान कृष्ण को श्रृंगार करते, प्रिय भोग बनाते हैं, मंदिर को सुंदर सजाते हैं, व्रत रखते हैं और भगवान की झांकी को सजाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान कृष्ण का स्वरुप बेहद ही मनमोहक है। बांसुरी धारण किए, मोर मुकुट सजाए और अपनी लीलाओं से भक्तों का मन हरते भगवान कृष्ण को भक्त कई नामों से पुकारते हैं। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और इसी दिन से भक्त उनका जन्मोत्सव का बेहद धूमधाम से मनाते हैं। इस साल 4 सितंबर को श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जाएगा। इस खास दिन पर भक्त घर के मंदिर में लड्डू गोपाल या श्री कृष्ण की प्रतिमा का श्रृंगार करते हैं। आइए आपको बताते हैं किन चीजों का खास महत्व है और किन चीजों के बिना उनके श्रृंगार को अधूरा माना जाता है।
मोर मुकुट
मान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण के श्रृंगार में मोर मुकुट का खास महत्व माना जाता है। वैसे इसके पीछे कई धार्मिक कथाएं भी जुड़ी हैं, जो इस बात का भी प्रतीक है कि श्रीकृष्ण सभी जीवों से एक समान भाव से प्यार करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मोरपंख को सुंदरता, सकारात्मकता और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। मोर पंख को राधा-रानी और श्री कृष्ण के सच्चे प्रेम के प्रतीक के रुप में भी देख सकते हैं।
बांसुरी
गौरतलब है कि बांसुरी सिर्फ श्रीकृष्ण के श्रृंगार का एक हिस्सा नहीं है, बल्कि उनके जीवन से बहुत खास तरीके से जुड़ी है। धार्मिक कथाओं में उनकी बांसुरी को मुरली, वेणु या वंशिका कहा गया है और बांसुरी बजाने की वजह से उन्हें मुरलीधर कहा जाता है। उनकी बांसुरी की मधुर धुन से संबंधित अनेक कथाएं और लोक परंपराओं में मिलती हैं। भक्तों के लिए बांसुरी प्रेम, मधुरता और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है।
वैजयंती माला
भगवान श्रीकृष्ण के गले में हमेशा वैजयंती माला सुशोभित रहती है और उनके श्रृंगार का मुख्य हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसके बिना श्रीकृष्ण का श्रृंगार और उनकी पूजा अधूरा मानी जाती है। वैसे यह माला भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को भी अति प्रिय है।
पीतांबर
यदि आप भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार कर रहे हैं, तो पीतांबर यानी पीले रंग के वस्त्र पहन सकते हैं। वैसे तो कन्हा जी को किसी भी रंग के कपड़े अर्पित कर सकते हैं, लेकिन ज्यादातर उन्हें पीतांबर, यानी पीले रंग वस्त्र धारण किए देखा जा सकता है। इसलिए उन्हें 'पीतांबरधारी' भी कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में पीले रंग का ज्ञान, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा से संबंधित माना जाता है।
आभूषण
श्रीकृष्ण के बाल गोपाल स्वरुप का श्रृंगार करते समय भक्तजन उन्हें मोर मुकुट और बांसुरी के साथ ही कुंडल, हार, बाजूबंद, कंगन, पायल और कमरबंध जैसे आभूषण भी पहनाते हैं। आप भी इन आभूषण को जरुर पहनाएं।
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राधा-कृष्ण को सौहार्द, प्रेम, भक्ति और आपसी समझ का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि बहुत से लोग अपने घरों में राधा-कृष्ण की मूर्ति या तस्वीर रखते हैं। वास्तु शास्त्र में भी राधा-कृष्ण के स्वरूप को घर के लिए शुभ माना जाता है। लेकिन तस्वीर को लगाने की दिशा और स्थान को लेकर कुछ बातें बहुत प्रचलित हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि घर में राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने के वास्तु नियम क्या हैं।
ईशान कोण है शुभ दिशा
वास्तु शास्त्र के मुताबिक राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने के लिए उत्तर पूर्व दिशा यानी की ईशान कोण को सबसे शुभ माना जाता है। इस दिशा को पूजा-पाठ और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए विशेष मानी जाती है।
अगर घर में पूजा स्थान ईशान कोण में है, तो वहां पर राधा-कृष्ण की तस्वीर रखी जा सकती है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में शांति, आध्यात्मिक और सकारात्मक वातावरण बना रहता है।
पूर्व दिशा में लगाएं
अगर उत्तर-पूर्व दिशा में तस्वीर लगाना संभव नहीं है, तो पूर्व दिशा में राधा-कृष्ण की तस्वीर को लगाना चाहिए। वास्तु शास्त्र के मुताबिक पूर्व दिशा का संबंध प्रकाश और नई ऊर्जा से माना जाता है।
ऐसी जगह पर राधा-कृष्ण की तस्वीर को लगाना चाहिए, जहां पर घर के सदस्य उनके आसानी से दर्शन कर सकें। वहीं आसपास का स्थान साफ होना चाहिए।
बेडरूम में तस्वीर लगाने की क्या है मान्यता
राधा-कृष्ण को प्रेम और आपसी समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस वजह से कुछ वास्तु मान्यताओं में बेडरूम में भी राधा-कृष्ण की तस्वीर लगाने की सलाह दी जाती है।
मान्यता है कि बेडरूम की पश्चिम दिशा वाली दीवार पर इस तस्वीर को लगाने से पति-पत्नी के बीच प्रेम और आपसी समझ बढ़ती है। लेकिन इसको धार्मिक रूप से जरूरी नहीं माना जाना चाहिए।
दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम दिशा में न लगाएं
वास्तु के मुताबिक राधा-कृष्ण की तस्वीर को दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं लगाना चाहिए। कुछ धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इससे रिश्ते में निगेटिव असर हो सकता है। लेकिन इन बातों को वास्तु की मान्यताओं के रूप में देखना चाहिए।
तस्वीर में राधा जी
कुछ परंपराओं के मुताबिक चित्र में राधा जी को भगवान कृष्ण के बाएं ओर दिखाना शुभ माना जाता है। इसलिए तस्वीर खरीदते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
तस्वीर को जमीन पर न रखें
राधा-कृष्ण की तस्वीर को सीधे जमीन या फर्श पर नहीं रखना चाहिए। इसको दीवार पर उचित ऊंचाई पर लगाना बेहतर है। तस्वीर को आंखों के स्तर के आसपास या इससे थोड़ी ऊंचाई पर हो, तो दर्शन करना काफी सहज होता है।
साफ-सफाई का रखें विशेष ध्यान
घर में जहां पर राधा-कृष्ण की तस्वीर लगी हो, वहां पर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। तस्वीर के आसपास धूल, कबाड़ या अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। पूजा या धार्मिक चित्रों के स्थान को साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए।
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