UP Election 2027: सहारनपुर की 7 विधानसभा सीटों का समझें पूरा सियासी गणित, 2027 से पहले जानें कहां किसका दबदबा
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव 2027 में होना तय है. जिसके मद्देनजर प्रदेश में अभी से जिलों-जिलों में सियासी सरगर्मी बढ़नी शुरू हो गई हैं. राज्य में शामली-मुजफ्फरनगर से सटा सहारनपुर जिला प्रदेश में खास महत्व रखता है. राजनीतिक जानकारों की मानें तो यहां हर बार का चुनाव जातीय और धार्मिक समीकरणों की वजह से दिलचस्प बना रहता है. यहां न सिर्फ बीजेपी, सपा और बसपा के बीच सीधी टक्कर देखने को मिलती रही है, बल्कि कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय भी बनता आया है.
जानकारी के मुताबिक यह जिला दो लोकसभा क्षेत्रों में बंटा है जो पहली है सहारनपुर और दूसरी कैराना. कैराना काफी फेमस लोकसभा है यहां हर चुनाव में जातिय मसले हावी रहें हैं. जिले की सातों विधानसभा सीटों की बात करें तो यहां सियासी दिशा भी अलग-अलग मुद्दों से प्रभावित होती है. आइए आपको सातों सीटों के चुनावी इतिहास, जातीय बनावट और मौजूदा हालात विस्तार से बताते हैं.
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— BJP Uttar Pradesh (@BJP4UP) September 1, 2026
जनसंख्या और सामाजिक ताना-बाना, जानिए जिले की जमीनी तस्वीर
जनगणना 2011 के अनुसार सहारनपुर जिले की कुल आबादी करीब 34 लाख 66 हजार है. यहां प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं का अनुपात 887 दर्ज हुआ था, जो प्रदेश के औसत से थोड़ा कम माना जाता है. जिले में साक्षरता दर औसत 71 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जबकि जिले की करीब 31 प्रतिशत आबादी शहरों में और बाकी गांवों में रहती है.
जिले की लगभग हर सीट पर मुस्लिम वोट निर्णायक
धर्म के लिहाज से देखें तो जिले में हिंदू आबादी करीब 57 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी करीब 43 प्रतिशत है जो प्रदेश के औसत से कहीं ज्यादा है. यही वजह है कि जिले की लगभग हर सीट पर मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाता है. अनुसूचित जाति की आबादी का हिस्सा भी यहां करीब 22 प्रतिशत बताया जाता है जो दलित वोट को भी बराबर अहमियत देता है.
जिले में कुल सात विधानसभा सीटें, जिनमें से एक आरक्षित
सात में से ये एक सीट है अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित
सहारनपुर जिले के अंतर्गत कुल सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जो हैं बेहट, नकुड़, सहारनपुर नगर, सहारनपुर (देहात), देवबंद, रामपुर मनिहारान और गंगोह. बता दें इनमें से बेहट, नकुड़, सहारनपुर नगर, सहारनपुर देहात, रामपुर मनिहारान और देवबंद सहारनपुर लोकसभा सीट का हिस्सा हैं. जबकि गंगोह कैराना लोकसभा सीट के दायरे में आता है. यहां ये बताना जरूरी है कि रामपुर मनिहारान सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, बाकी छह सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं. बता दें परिसीमन के बाद यह सीट 2008 में वजूद में आई थी.
2022 के नतीजों में बीजेपी को 5, सपा को मिली थीं 2 सीटें
पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2022 में सहारनपुर जिले की सातों सीटों पर मतदान दूसरे चरण में 14 फरवरी को हुआ था और नतीजे 10 मार्च को जारी हुए थे. चुनाव आयोग के डेटा के मुताबिक यहां कुल मिलाकर बीजेपी ने पांच सीटों पर कब्जा जमाया जबकि सपा दो सीटों तक सिमट गई थी. बसपा और कांग्रेस दोनों का खाता जिले में नहीं खुल सका था. आइए आपको सातों सीटों के बारे में ब्रीफ जानकारी देते हैं.
#WATCH #सहारनपुर पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने SBI कॉलोनी स्थित इष्टसिद्धि मंदिर के अंदर पूजा अर्चना की...@samajwadiparty @mediacellsp #up #Saharanpur pic.twitter.com/0MEOwMFBXr
— AMIT KUMAR (@Amitjournalist7) September 2, 2026
बेहट की बात करें तो यहां सपा के उमर अली खान ने भाजपा प्रत्याशी नरेश सैनी को करीब 37,880 वोटों से पछाड़ा था. दिलचस्प बात ये थी कि नरेश सैनी 2017 में कांग्रेस से जीते थे और जनवरी 2022 में BJP में शामिल हुए थे.
नकुड़ सीट पर भाजपा के मुकेश चौधरी ने सपा प्रत्याशी डॉ. धर्म सिंह सैनी को हराया था. धर्म सिंह सैनी इस सीट से पहले भी कई बार जीत चुके हैं और यहां की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चेहरा माने जाते हैं.
सहारनपुर नगर सीट पर भाजपा के राजीव गुंबर ने सपा के मौजूदा विधायक संजय गर्ग को 7,434 वोटों से शिकस्त दी थी. इस सीट पर पंजाबी और वैश्य समुदाय का वोट लंबे समय से निर्णायक माने जाते रहे हैं.
सहारनपुर (देहात) सीट की बात करें तो यहां सपा के आशु मलिक ने भाजपा प्रत्याशी जगपाल सिंह को 30,745 वोटों से हराया था. जगपाल सिंह इससे पहले बसपा के टिकट पर लड़ चुके थे, मगर इस बार भाजपा के सिंबल पर मैदान में उतरे थे.
देवबंद की सीट दारुल उलूम के लिए मशहूर है. इस सीट पर भाजपा के बृजेश सिंह रावत लगातार दूसरी बार जीते और सपा प्रत्याशी कार्तिकेय राणा को हराया था. बता दें बृजेश सिंह ने कार्तिकेय राणा को 7,104 वोटों से हराया था.
गंगोह: कीरत सिंह ने 2022 में इंद्रसेन को 23,449 वोटों से हराया था। 2019 में भी कीरत सिंह उपचुनाव जीत चुके थे. वह उपचुनाव तत्कालीन विधायक प्रदीप चौधरी के कैराना से सांसद बनने के बाद हुआ था.
रामपुर मनिहारान (सुरक्षित) पर भाजपा के देवेंद्र निम ने बसपा के रविंद्र कुमार मोल्हू को करीब 20 हजार वोटों से हराया था. यह सीट कभी बसपा का गढ़ मानी जाती थी.
#WATCH Shahjahanpur: On the Uttar Pradesh Outsourced Services Corporation, state minister Suresh Kumar Khanna says, "The entire day today is dedicated solely to the interests of outsourcing employees. The Chief Minister has taken major reform steps on a large scale in every… pic.twitter.com/fzNB2qsA6i
— ANI UP/Uttarakhand (@ANINewsUP) September 2, 2026
जानें पुराना इतिहास... किसका कब रहा दबदबा
अगर पीछे मुड़कर देखें तो सहारनपुर की राजनीति में किसी एक पार्टी का स्थायी वर्चस्व कभी नहीं रहा है. 2017 में देवबंद और गंगोह जैसी सीटों पर भाजपा मजबूत हुई थी जबकि सहारनपुर देहात सीट कांग्रेस के मसूद अख्तर के पास गई थी और सहारनपुर नगर में सपा ने जगह बनाई थी. रामपुर मनिहारान सीट की कहानी और भी दिलचस्प है. यहां 2007 और 2012 में बसपा का परचम लहराया था फिर यहां 2017 से भाजपा का कब्जा है.
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नकुड़ सीट वीआईपी सीटों में से एक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सहारनपुर जिले की नकुड़ सीट परंपरागत रूप से वीआईपी सीटों में गिनी जाती रही है, जहां धर्म सिंह सैनी और इमरान मसूद के बीच कई बार सीधी टक्कर देखने को मिली थी. राजनीतिक गलियारों में ये कहा जाता है कि 2012 से पहले बसपा का प्रभाव ज्यादा था, जबकि 2017 और 2022 में इस सीट पर भाजपा का ग्राफ ऊपर गया. वहीं, सपा ने बीच-बीच में कुछ सीटों पर सेंध लगाई थी.
अब क्या हैं मौजूदा हालात? 2027 के विधानसभा चुनाव में क्या होने की उम्मीद?
जानकारी के मुताबिक 2024 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर सीट से कांग्रेस के इमरान मसूद जीते थे, जो सपा-कांग्रेस गठबंधन के तहत लड़े थे. इस जीत ने जिले की विधानसभा सीटों पर भी सपा-कांग्रेस गठबंधन का हौसला बढ़ाया है. रामपुर मनिहारान सीट पर तो हाल के विश्लेषण बताते हैं कि 2022 में भाजपा की जीत का अंतर जहां 20 हजार से ज्यादा था वहीं, 2024 के लोकसभा नतीजों में यह फासला काफी घट गया था जिससे सपा-कांग्रेस गठबंधन यहां मजबूत होता दिख रहा है.
भाजपा, सपा और बसपा हर पार्टी कर रही जीत का दावा
दूसरी तरफ भाजपा, सपा और बसपा तीनों ही 2027 को लेकर लखनऊ में बूथ स्तर की बैठकें कर चुकी हैं और संगठन को नए सिरे से खड़ा करने में जुटी हैं. सहारनपुर जैसे मुस्लिम-बहुल जिले में गठबंधन की राजनीति और पीडीए यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक रणनीति अगले चुनाव में बड़ी भूमिका निभा सकती है.
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— Aam Aadmi Party- Uttar Pradesh (@AAPUttarPradesh) September 2, 2026
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जातीय समीकरण: किस सीट पर किसका दबदबा
- बेहट में मुस्लिम मतदाता सबसे ज्यादा हैं. इसके बाद सैनी और अनुसूचित जाति के वोटर निर्णायक हैं.
- नकुड़ की बात करें तो यहां मुस्लिम, सैनी, दलित और गुर्जर मतदाताओं का संतुलन ही यहां नतीजे तय करता है.
- सहारनपुर नगर में तो मुस्लिम आबादी सबसे ज्यादा है, इसके बाद पंजाबी और वैश्य समाज अहम रोल प्ले करता है.
- सहारनपुर देहात में दलित और मुस्लिम वोटरों के साथ सैनी समाज भी असरदार प्रभाव रखता है.
- देवबंद में मुस्लिम और राजपूत मतदाता जीत का अंतर तय करते हैं.
- रामपुर मनिहारान (सुरक्षित) सीट है यहां अनुसूचित जाति सबसे बड़ा समूह है, इसके बाद मुस्लिम और गुर्जर वोटरों की संख्या आती है.
- गंगोह में मुस्लिम मतदाताओं के साथ अनुसूचित जाति और सैनी समाज त्रिकोणीय मुकाबला बनता है.
आज सम्भल में जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित संवाद बैठक में शामिल होकर पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों एवं समर्पित कांग्रेस साथियों से आत्मीय संवाद किया।
— Sanjeev Kumar Arya (@Sanjeevaryamla) September 2, 2026
अब समय है कि सत्ता से सवाल पूछे जाएं—
जनता को रोजगार कब मिलेगा?
महंगाई से राहत कब मिलेगी?
किसानों की आय और अधिकारों की… pic.twitter.com/rHtoIdb62D
FAQ
सवाल: सहारनपुर जिले में कुल कितनी विधानसभा सीटें हैं?
जवाब: सहारनपुर जिले में कुल सात विधानसभा सीटें हैं, जिनके नाम हैं बेहट, नकुड़, सहारनपुर नगर, सहारनपुर देहात, देवबंद, रामपुर मनिहारान और गंगोह.
सवाल: सहारनपुर जिले की कौन-सी सीट आरक्षित है?
जवाब: रामपुर मनिहारान सीट अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित है, बाकी सभी छह सीटें सामान्य श्रेणी में आती हैं.
सवाल: 2022 चुनाव में सहारनपुर जिले में किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं?
जवाब: भाजपा को पांच सीटें (नकुड़, सहारनपुर नगर, देवबंद, रामपुर मनिहारान, गंगोह) और सपा को दो सीटें (बेहट, सहारनपुर देहात) मिली थीं. बसपा और कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली.
सवाल: सहारनपुर जिले की आबादी में मुस्लिम और हिंदू समुदाय का हिस्सा कितना है?
जवाब: जनगणना 2011 के अनुसार जिले में हिंदू आबादी करीब 57 प्रतिशत और मुस्लिम आबादी तकरीब करीब 43 प्रतिशत है.
सवाल: जिले में किस पार्टी का ऐतिहासिक तौर पर दबदबा रहा है?
जवाब: कोई एक पार्टी लंबे समय तक हावी नहीं रही. 2012 से पहले बसपा मजबूत मानी जाती थी, 2017 और 2022 में भाजपा ने बढ़त बनाई, जबकि सपा-कांग्रेस गठबंधन 2024 के बाद कुछ सीटों पर मजबूत होता दिख रहा है.
सवाल: 2027 के चुनाव के लिए फिलहाल राजनीतिक माहौल कैसा है?
जवाब: यहां तीनों प्रमुख दल भाजपा, सपा और बसपा अपनी जीत का दावा करते नजर आ रही हैं. तीनों संगठन मजबूत करने और बूथ स्तर की तैयारी में जुट गए हैं. सहारनपुर लोकसभा सीट पर 2024 में सपा-कांग्रेस गठबंधन की जीत के बाद जिले की कुछ सीटों पर सत्तारूढ़ दल के लिए मुकाबला पहले से कठिन माना जा रहा है.
|
AC No. |
लोकसभा क्षेत्र |
विधानसभा क्षेत्र |
Voters (Lacs) |
|
1 |
सहारनपुर |
बेहट |
3.47 |
|
2 |
कैराना |
नकुड |
3.35 |
|
3 |
सहारनपुर |
सहारनपुर नगर |
3.87 |
|
4 |
सहारनपुर |
सहारनपुर देहात |
3.39 |
|
5 |
सहारनपुर |
देवबन्द |
3.15 |
|
6 |
सहारनपुर |
रामपुर मनिहारान (SC) |
2.99 |
|
7 |
कैराना |
गंगोह |
3.44 |
|
TOTAL |
23.7 |
2012: में BSP का दबदबा रहा—7 में से 4 सीटें BSP के खाते में गईं.
2017: तस्वीर पूरी तरह बदली और BJP सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी, 4 सीटें जीतीं.
2022: BJP ने अपना प्रदर्शन और मजबूत किया और 5 सीटें जीत लीं, जबकि SP ने 2 सीटें हासिल कीं.
2012: से 2022 के बीच जिले में BSP से BJP की ओर बड़ा राजनीतिक बदलाव दिखाई देता है.
2012 के बाद 2014 में सहारनपुर नगर सीट पर उपचुनाव हुआ था, जिसमें BJP के राजीव गुम्बर जीते थे.
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