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Manoj Jarange की Jalna में भूख हड़ताल पांचवें दिन भी जारी, डॉक्टरों ने स्वास्थ्य पर जताई चिंता

(फाइल फोटो के साथ) जालना (महाराष्ट्र), दो सितंबर मराठा आरक्षण के मुद्दे को लेकर कार्यकर्ता मनोज जरांगे की भूख हड़ताल बुधवार को पांचवें दिन भी जारी रही। इस बीच, चिकित्सकों ने उनके बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और जालना की जिलाधिकारी ने उनसे भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। जरांगे के स्वास्थ्य मानकों की जांच करने वाले एक चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि उनके रक्त शर्करा का स्तर गिर गया है।

चिकित्सक ने कहा कि प्रदर्शन स्थल पर मौजूद चिकित्सकों की एक टीम ने जरांगे से ‘इंट्रावेनस फ्लूइड’ (रक्त वाहिकाओं के जरिये दिया जाने वाला रासायनिक तरल पदार्थ) लेने का आग्रह किया, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। जरांगे ने 29 अगस्त को जालना जिले के अंतरवाली सराटी में अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी मांगों में मराठाओं के लिए आरक्षण और गजट रिकॉर्ड के आधार पर तुरंत कुनबी प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है।

इसके अलावा भी उन्होंने कई अन्य मांगें रखी हैं। उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और इसे मुंबई तक ले जाया जाएगा। जालना की जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने मंगलवार रात जरांगे से प्रदर्शन स्थल पर मुलाकात की।

यह मुलाकात उन्हें अनशन खत्म करने के लिए राजी करने की राज्य सरकार की कोशिशों के तहत हुई। बैठक के दौरान मित्तल ने मराठा आरक्षण को लेकर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। जरांगे ने हालांकि सवाल किया कि क्या वह सरकार का पक्ष रखने आई हैं।

उन्होंने मित्तल से इस मामले में हस्तक्षेप न करने का आग्रह करते हुए कहा कि उनकी मांगों से जुड़े फैसले राज्य स्तर पर लिए जाने हैं। जरांगे ने मित्तल से कहा कि वह उनका सम्मान करते हैं, लेकिन इस मुद्दे पर उनके स्पष्टीकरण को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने मित्तल से यह भी कहा कि आंदोलन के सिलसिले में वह दोबारा उनसे मिलने न आएं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बेवजह उन्हें उनके साथ बातचीत करने के लिए भेज रही है। जरांगे ने दावा किया है कि मराठाओं और कुनबियों के बीच वंशावली संबंध स्थापित करने वाले 58 लाख रिकॉर्ड मिले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस संख्या को कम करने की कोशिश कर रही है।

उनकी प्रमुख मांग है कि मराठा समुदाय के लोगों को कुनबी के रूप में मान्यता दी जाए और शिक्षा तथा सरकारी नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले आरक्षण का लाभ उन्हें भी दिया जाए। पिछले साल 29 अगस्त को आजाद मैदान में जरांगे के विरोध-प्रदर्शन के कारण यातायात अवरुद्ध हो गया था। राज्य सरकार द्वारा आठ में से छह मांगें मान लेने और कुनबी जाति प्रमाण-पत्र जारी करना शुरू करने के बाद दो सितंबर को यह प्रदर्शन वापस ले लिया गया था।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा कि सरकार संवैधानिक रूप से वैध और कानूनी तौर पर व्यावहारिक मांगों पर चर्चा करने के लिए तैयार है, लेकिन ऐसी मांगों पर नहीं जो उच्चतम न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करती हों। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार को कहा था कि ‘महायुति’ सरकार किसी अन्य वर्ग के साथ अन्याय किए बिना मराठा समुदाय को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। शिंदे ने कहा था कि कानून के दायरे में जो भी उचित और न्यायसंगत होगा,सरकार उसे उपलब्ध कराने के लिए सकारात्मक रुख रखती है।

उन्होंने जरांगे से ‘‘रचनात्मक रुख’’ अपनाने की अपील की।

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सिक्किम पर मंडराया GLOF का खतरा, 40 झीलें चिह्नित, 7 हाई रिस्क पर अलर्ट

नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने सिक्किम में 40 ऐसी ग्लेशियल झीलों की पहचान की है जिनसे बाढ़ का खतरा हो सकता है; इनमें से सात को ज़्यादा जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है। यह अलर्ट पड़ोसी देश नेपाल में ग्लेशियर से जुड़ी विनाशकारी बाढ़ के कुछ दिनों बाद जारी किया गया है, जिसमें 1,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई थी और हज़ारों लोग लापता हो गए थे। सिक्किम में पहचानी गई 40 खतरनाक झीलों में से 16 का वर्गीकरण किया गया है, जबकि 13 का वर्गीकरण अभी बाकी है। वर्गीकृत झीलों में से सात को ज़्यादा जोखिम वाला माना गया है। 
 

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अधिकारियों ने बताया कि ज़्यादा जोखिम वाली 16 झीलों में से 13 का विस्तृत वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया है, और इनमें से ज़्यादातर झीलें लगभग 17,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित हैं। सिक्किम के साइंस और टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी संदीप ताम्बे ने बताया कि इन असेसमेंट में झील की गहराई, पानी की मात्रा, मोरेन की स्थिरता और एवलांच (बर्फ़ खिसकने) व लैंडस्लाइड (भूस्खलन) से होने वाले खतरों की जांच की गई।
 

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सिक्किम ने सबसे ज़्यादा खतरे वाली कुछ झील प्रणालियों से होने वाले जोखिम को कम करने के लिए तीन बड़े उपाय सुझाए हैं। शाको चू (Shako Chu) में, जहाँ एक कमज़ोर टर्मिनल मोरेन के पीछे लगभग 27 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा है, अधिकारियों ने झील के जलस्तर को 20 से 40 मीटर तक कम करने के लिए सोलर-पावर्ड पंपों का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव दिया है। इस योजना से झील से लगभग 8 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी निकाला जाएगा, जिससे उस पानी की मात्रा कम हो जाएगी जो मोरेन के टूटने की स्थिति में नीचे की ओर बह सकता था।
 
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