पाकिस्तान की ओर से की गयी ‘तस्वीरबाजी’ पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भड़क उठे हैं। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की फैमिली फोटो से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को क्रॉप किए जाने को लेकर शिंदे ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने दो टूक कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ इस तरह के खेल खेलने की कोशिश न करे। शिंदे ने तीखे अंदाज में कहा कि पाकिस्तान ने भले ही तस्वीर से मोदी को हटा दिया हो, लेकिन अगर मोदी चाहें तो पाकिस्तान को ही दुनिया की तस्वीर से हटा सकते हैं।
दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के कार्यालय की ओर से SCO सम्मेलन की फैमिली फोटो का एक संपादित संस्करण साझा किया गया, जिसमें शरीफ को केंद्र में दिखाया गया और कई नेताओं को तस्वीर से बाहर कर दिया गया। मूल तस्वीर 26वें SCO शिखर सम्मेलन के एक सत्र से पहले ली गई थी, जिसमें सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष एक साथ खड़े नजर आए थे।
इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए शिंदे ने कहा, “पाकिस्तान ने जो किया, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पाकिस्तान हमेशा से ऐसी हरकतें करता रहा है। लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा कि उन्होंने मोदी जी की तस्वीर हटा दी, मगर अगर मोदी जी चाहें तो पाकिस्तान को दुनिया की तस्वीर से हटा सकते हैं।”
शिंदे ने पाकिस्तान को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि पहलगाम में आतंकियों ने देश के लोगों और बहनों के साथ जघन्य अपराध किया और उनके सिंदूर को मिटाने की कोशिश की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया। शिंदे ने कहा, भारतीय सेना ने 11 एयरबेस कैंपों को भी नष्ट किया और पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया।
उन्होंने कहा कि देश को अपनी सेना और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर गर्व है। ऐसे में पाकिस्तान को भारत के साथ किसी भी तरह के ‘खेल’ खेलने से पहले गंभीरता से सोचना चाहिए। शिंदे ने यह भी साफ किया कि किसी तस्वीर से मोदी को हटाने भर से उनकी लोकप्रियता या अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने कहा, “तस्वीर से प्रधानमंत्री मोदी को हटाने की ऐसी कोशिश उन्हें 140 करोड़ भारतीयों के दिलों से नहीं मिटा सकती। मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं।”
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2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के पूर्व नेता आसिम वकार 2 सितंबर को लखनऊ में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अजय राय की मौजूदगी में कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। वकार ने AIMIM की आलोचना करते हुए कहा कि हालांकि पार्टी ऊपरी नेतृत्व के स्तर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का विरोध करती दिखती थी, लेकिन असल में उसका मुकाबला कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों से था।
वकार ने कहा कि भारत में देश से प्यार करने वाले सभी लोगों का मकसद BJP को सत्ता से हटाना और एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाना है। हालांकि, जब मैं AIMIM के साथ था, तो ऊपरी नेतृत्व को देखकर ऐसा लगता था कि हम BJP से लड़ रहे हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही थी; असल लड़ाई कांग्रेस और विपक्ष के खिलाफ लड़ी जा रही थी। उन्होंने कहा कि उन्हें यह तरीका मंज़ूर नहीं था, इसलिए उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का फ़ैसला किया। वकार ने बंगाल के नेता हुमायूं कबीर का भी ज़िक्र किया, जिन पर उन्होंने बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाया था। उन्होंने एक स्टिंग ऑपरेशन का हवाला दिया जिसमें आरोप लगाया गया था कि कबीर को 1,100 करोड़ रुपये मिले थे।
वकार ने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनेगी, तो हम जांच करेंगे कि यह पैसा किसने दिया और कहाँ गया। वकार AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता रह चुके थे और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक जाना-माना चेहरा थे। उनके पार्टी छोड़ने से AIMIM और उसके नेता असदुद्दीन ओवैसी को झटका लगा है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में अपना प्रभाव फिर से बढ़ाना चाहती है और 2027 के चुनावों में जीत हासिल करना चाहती है। 2022 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस ने 399 सीटों पर चुनाव लड़ा और सिर्फ़ दो सीटें जीतीं, जबकि AIMIM कोई भी सीट नहीं जीत पाई। AIMIM मुस्लिम वोटों को एकजुट करने और 2025 के बिहार चुनावों में अपने प्रदर्शन को दोहराने की कोशिश कर रही है।
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