नेपाल : इतनी भयानक बाढ़ में कैसे बचा ये मकान? मालिक ने सुनाई खौफनाक पलों की पूरी कहानी
बीते दिनों नेपाल में जो जल प्रलय आया, उसने रास्ते में पड़ने वाली हर एक चीज को बहाकर ले गया। पर इस विनाशकारी बाढ़ में भी एक मकान अपनी जगह पर टिका रहा। ये हरे रंग का मकान की फिलहाल पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। वहीं अब इस घर के मालिक ने उन डरावने पलों के बारे में बताया है
मोदी सरकार में ग्रामीण महिलाओं तक पहुंची बैंकिंग सुविधा, 50 हजार बैंक सखियां निभा रहीं अहम भूमिका
PM Jan Dhan Yojana: केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले एक दशक में ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं को आसानी से पहुंचाने की दिशा में कई अहम काम किए हैं. जिनमें जनधन खातों से लेकर बैंक सखियों की नियुक्ति करना भी शामिल है. जिससे अब ग्रामीण इलाकों में महिलाओं भी आसानी से बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठा रही हैं.
बैंकिंग सुविधाओं को आसान बनाने के लिए ग्राम पंचायतों में बैंक सखियों की नियुक्ति की गई है. वर्तमान में देशभर में 50,000 हजार से ज्यादा बैंक सखियां काम कर रही हैं. ये बैंक सखियां ग्रामीण समुदायों में वित्तीय समावेश को बढ़ावा देते हुए, महिलाओं को जरूरी बैंकिंग सेवाएं, लेन-देन में मदद और क्रेडिट की सुविधाएं देकर उनके और बैंकिंग सेवाओं के बीच की दूरी को कम कर रही हैं.
बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ीं देश की करोड़ों महिलाएं
बता दें कि पीएम मोदी ने अपने पहले कार्यकाल शुरुआत में ही 'प्रधानमंत्री जनधन योजना' शुरू की थी. इस योजना की शुरुआत 28 अगस्त 2014 को कई गई. प्रधानमंत्री जनधन योजना ने देशभर की करोड़ों महिलाओं को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का काम किया है. इससे उनकी आर्थिक आजादी मजबूत हुई. इसके साथ ही सरकारी आर्थिक सहायता भी सीधे उन तक आसानी से पहुंच रही है. ऐसे में ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाए बैंकिंग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं.
जनधन योजना के 12 साल पूरे
प्रधानमंत्री जनधन योजना के 28 अगस्त को 12 साल पूरे हो गए. इन सालों में देशभर की करोड़ों महिलाओं का बैंकों में जनधन खाता खुला है. जिससे सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे उनके खातों में पहुंचा है. इस योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को पैसों की बचत करने में अहम भूमिका निभाई है. इन महिलाओं को बैंकिंग सुविधाओं से लेकर कारोबार के लिए ऋण लेने तक की जानकारी देने में बैंक सखियां अहम भूमिका निभा रही हैं.
प्रधानमंत्री जनधन योजना ने देश की करोड़ों महिलाओं को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है। इससे उनकी आर्थिक आजादी मजबूत हुई और सरकारी आर्थिक सहायता सीधे उन तक पहुँचाना आसान हुआ।
— MyGov Hindi (@MyGovHindi) August 28, 2026
महिलाएँ अब बैंकिंग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। कैसे? आइए, जनधन योजना की 12वीं… pic.twitter.com/631B3iSgLv
आर्थिक स्वतंत्रता से मजबूत हुए महिलाओं के फैसले
प्रधानमंत्री जनधन योजना ने महिलाओं को अपने वित्तीय निर्णय खुद लेने की अधिक स्वतंत्रता दी है. बचत से लेकर भविष्य की बेहतर योजना बनाने तक, बैंकिंग ने महिलाओं को अपने पैसों पर अधिक नियंत्रण और आत्मनिर्भरता का अवसर दिया है
करोड़ों महिलाओं के नाम हुआ अपना बैंक खाता
बता दें कि वित्तीय स्वतंत्रता की शुरुआत वित्तीय पहुंच से होती है. प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत लगभग 33 करोड़ महिलाओं ने अपने नाम से बैंक खाते खोले हैं, जिससे उन्हें अपने पैसे और वित्तीय फैसलों पर अधिक नियंत्रण मिला है.
बैंकिंग से सशक्त हुईं करोड़ों महिलाएं
2014 में जहां देश में सिर्फ 43 प्रतिशत महिलाओं के पास बैंक खाता था, वहीं 2024 में यह बढ़कर 89 फीसदी हो गया. यह बदलाव महिलाओं की बढ़ती वित्तीय भागीदारी और आत्मनिर्भरता की मजबूत तस्वीर पेश करता है. 2014 से 2024 के बीच महिलाओं के बैंक खाता स्वामित्व में 43% से 89% तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जबकि पुरुषों में यह 62 फीसदी से 88 प्रतिशत हुआ है. यह बदलाव वित्तीय समावेशन की दिशा में भारत की बड़ी उपलब्धि और महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी को दर्शाता है.
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संकट के समय महिलाओं तक पहुंची सीधी आर्थिक मदद
प्रधानमंत्री जनधन योजना का ही कमाल है कि कोरोना जैसे संकट के दौरान 20 करोड़ से अधिक महिला जनधन खाताधारकों को DBT के माध्यम से सीधे आर्थिक मदद मिली. इससे जरूरत के समय मदद तेजी से उन तक पहुंच सकी.
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