हरियाणा विधानसभा में अल्पसंख्यक आयोग सहित 11 महत्वपूर्ण विधेयक पारित
चंडीगढ़, एक सितंबर हरियाणा विधानसभा ने मंगलवार को मानसून सत्र के अंतिम दिन 11 महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए जिनमें राज्य अल्पसंख्यक आयोग के गठन से संबंधित विधेयक शामिल है। सदन ने संक्षिप्त मानसून सत्र के अंतिम दिन ‘हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग विधेयक, 2026’ को मंजूरी दी। विधेयक के तहत राज्य में अल्पसंख्यकों के संरक्षण के लिए संविधान में दिए गए प्रावधानों और सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए हरियाणा राज्य अल्पसंख्यक आयोग गठित करने का प्रस्ताव है।
विधेयक के अनुसार, आयोग अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधानों और कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के संबंध में सरकार को सिफारिशें भी देगा। विधेयक में कहा गया है कि वैधानिक दर्जा वाले आयोग के गठन से अल्पसंख्यक समुदायों में उसके कामकाज और प्रभावशीलता को लेकर विश्वास जागृत होगा। प्रस्तावित आयोग में एक अध्यक्ष और एक उपाध्यक्ष होंगे, जिन्हें सरकार नामित करेगी।
सदन ने जिन अन्य विधेयकों को मंजूरी दी उनमें हरियाणा स्थानीय लेखा परीक्षा विधेयक, 2026, हरियाणा निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026, हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026, हरियाणा राज्य फिजियोथेरेपी परिषद (निरसन) विधेयक, 2026 और हरियाणा कारोबार का अधिकार विधेयक, 2026 शामिल हैं।
जिनपिंग के सामने गिड़गिड़ाया पाकिस्तान, भारत से मांगा सिंधु का पानी! कहा- ‘पानी को हथियार न बनाएं’
Sindhu Jal Samjhauta: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के बिश्केक शिखर सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने का मुद्दा उठाया. उन्होंने मंच से कहा कि पानी किसी भी क्षेत्र की जीवन-रेखा है और इसका उपयोग कभी भी राजनीतिक दबाव बनाने या हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए.
भारत ने पहलगाम हमले में सिंधु जल संधि को किया था स्थागित
भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कूटनीतिक दंडात्मक कार्रवाई के तहत सिंधु जल संधि को स्थगित कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ पाकिस्तान ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता अदालत (PCA) का रुख किया. हालांकि अदालत ने भारत के फैसले को रद्द करने का आदेश दिया, लेकिन नई दिल्ली ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. भारत का स्पष्ट रूप से कहना है कि इस गैर-कानूनी तरीके से गठित संस्था को उसके संप्रभु निर्णयों पर बोलने या दखल देने का कोई अधिकार नहीं है.
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