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चित्रकूट में तीन दिन में दूसरी बाढ़:गर्भवती बोली- सब बर्बाद हो गया, जो मिल जा रहा वही खा रहे; छतों पर लोग फंसे

चित्रकूट में मलबे की मिट्टी अभी धुल भी नहीं पाई थी कि 1 सितंबर को फिर बाढ़ आ गई। तीन दिन में दूसरी बार आई बाढ़ ने चित्रकूट में लोगों की बची-खुची गृहस्थी भी लील ली। 29 अगस्त की बाढ़ के निशान लोग मिटा भी नहीं पाए थे कि दोबारा पानी ने घरों और दुकानों को अपनी चपेट में ले लिया। दैनिक भास्कर की टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंची और लोगों के बीच रहकर हालात देखे। 10 तस्वीरों में देखें बाढ़ के हालात… पुराने बस स्टैंड के पास किराए के कमरे में रहने वाली 7 माह की गर्भवती किरण रुंधे गले से कहती हैं- कुछ भी नहीं बचा, सब बर्बाद हो गया। अचानक पानी आ गया तो बाल-बच्चों को लेकर जान बचाने के लिए घर में ताला लगाकर भागे। मेरा बच्चा दूसरी तरफ था। वह तैरकर पड़ोसी की छत पर पहुंचा, तब उसकी जान बची। यह देखकर हम रोते रहे। अब कुछ नहीं कर सकते, जहां जो मिल रहा है, वही खाकर जी रहे हैं चित्रकूट में बाढ़ प्रभावित हर घर की कहानी कमोवेश ऐसी ही है। कहीं लोग घरों में जमा सिल्ट साफ कर रहे हैं तो कहीं दुकानदार खराब सामान बाहर निकाल रहे हैं। किसी को कर्ज चुकाने की चिंता है तो किसी को अगली बारिश और फिर बाढ़ का डर। तीन दिन में दूसरी बार बाढ़, 500 दुकानें डूबीं सोमवार देर रात से शुरू हुई तेज बारिश मंगलवार सुबह 9 बजे तक जारी रही। पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश के चलते मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, नदी का जलस्तर हर घंटे एक मीटर बढ़ रहा था। सुबह करीब 6 बजे तक रामघाट और राघव प्रयाग घाट किनारे की लगभग 500 दुकानें जलमग्न हो गईं। देखते ही देखते रामघाट और पुरानी लंका तिराहे से कामतानाथ जाने वाली सड़क और सियाराम कुटीर तक नावें चलने लगीं। दुकानें, मकान, मठ और मंदिर पानी में डूब गए। लोगों ने छतों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। सुबह लोग ठीक से सोकर उठ भी नहीं पाए थे कि बाढ़ आ गई। दुकानदार अपना सामान नहीं बचा सके। घरों में रखा गृहस्थी का सामान भी पानी में डूब गया। सुबह 10 बजे के बाद बारिश थमी तो बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने लगा। दोपहर बाद सड़कों से पानी उतर गया, लेकिन घाट जलमग्न रहे। पानी उतरा तो लोग अपने घर और दुकानें समेटने लगे पानी उतरने के साथ ही घरों में महिलाएं और बच्चे गृहस्थी के सामान पर जमी परत साफ करने में जुट गए। दूसरी ओर व्यापारी दुकानें खोलकर अपनी बर्बादी देखते रहे। लोग बाढ़ के भरे पानी से पानी की बोतलें और सामान धोते रहे। जो सामान खराब हो गया, उसे अलग किया जाने लगा। लेकिन लोग अभी नुकसान समेट ही रहे थे कि शाम को फिर बारिश शुरू हो गई। शाम 7 बजे से एक बार फिर बारिश का दौर शुरू हो गया। उजड़ी गृहस्थी और सिल्ट से भरे घरों में अंधेरे के बीच लोगों को दोबारा बाढ़ का डर सताने लगा। बाढ़ग्रस्त इलाकों में पिछले तीन दिनों से बिजली सप्लाई भी बंद है। ऐसे में बारिश शुरू होते ही लोगों की चिंता और बढ़ गई। छतों पर फंसे लोग, नाव से पहुंचाई जा रही राहत दैनिक भास्कर की टीम ने पुरानी लंका तिराहे और रामघाट का नाव से जायजा लिया। यहां बाढ़ का भयावह मंजर नजर आया। दुकानें पूरी तरह जलमग्न थीं। होटलों की एक मंजिल और घर पूरी तरह डूबे हुए थे। घरों और आश्रमों की छतों पर लोग फंसे हुए थे। जिला प्रशासन के वालेंटियर्स नाव से खाने के पैकेट बांट रहे थे। जो लोग तीन मंजिल पर फंसे थे, उन्हें फेंककर राहत सामग्री पहुंचाई जा रही थी। पुरानी लंका में घर की छत पर परिवार के साथ आसरा लिए विनय गुप्ता ने बताया कि आपदा की इस घड़ी में प्रशासन की तरफ से खाने-पीने का सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन बाढ़ के कारण जीवन बहुत अस्त-व्यस्त हो रहा है। विनय कहते हैं, "अब तो बस यह लग रहा है कि बारिश रुक जाए तो राहत मिल जाए।" पार्षद के घर में भी पानी पहुंचा चित्रकूट के पुराने बस स्टैंड क्षेत्र की हालत भी बेहद खराब है। यहां वार्ड पार्षद रवि माला सिंह के घर पहुंची दैनिक भास्कर की टीम ने देखा कि पूरा परिवार बाढ़ के निशान मिटाने में जुटा था। सोफा सेट, वॉशिंग मशीन समेत घर के छोटे-बड़े सामान को व्यवस्थित किया जा रहा था। पार्षद खुद भी बाढ़ की विभीषिका से जूझ रही थीं। उन्होंने बाढ़ से अपने परिवार को हुए नुकसान की पीड़ा बताई, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंता वार्ड में फंसे उन लोगों को लेकर थी, जिनकी वह चाहकर भी मदद नहीं कर पा रही थीं। पार्षद ने बताया कि 29 अगस्त की बाढ़ के बाद प्रशासन आया था, लेकिन वह चित्रकूट की मुख्य सड़कों की सफाई में जुटा है। मोहल्लों और गलियों में आज भी घुटने तक सिल्ट जमा है। लोग घरों में कैद हैं। उन्होंने आपदा में सरकारी प्रबंधन के तरीके पर नाराजगी जताई। व्यापारी का करोबार चौपट चित्रकूट के ही एक तिवारी परिवार ने अपनी व्यथा बताई। परिवार ने 6 महीने पहले लोन लेकर फर्नीचर का व्यापार शुरू किया था। बाढ़ में पूरा कारोबार तबाह हो गया। अब परिवार के सामने बैंक का कर्ज चुकाने की चिंता है। जनरल स्टोर दुकान का सामान फेंकना पड़ा एमपीटी होटल चौराहे पर जनरल स्टोर चलाने वाले रामजी अपनी दुकान में रखे सामान की सफाई कर रहे थे। दैनिक भास्कर की टीम जब वहां पहुंची तो फ्रिज और पानी की बोतलों पर बाढ़ की मिट्टी जमी थी। वे उन्हें साफ कर रहे थे। रामजी ने बताया कि अगर अब फिर बाढ़ आई तो लोग कई साल तक इससे उबर नहीं पाएंगे। हर साल बाढ़ के कारण काफी नुकसान हो रहा है। मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए उन्होंने बताया कि अब दुकान में कम सामान रखेंगे, ताकि दोबारा बाढ़ आने पर नुकसान कम हो। चित्रकूट में इस समय पानी उतरने के साथ जिंदगी को फिर से व्यवस्थित करने की कोशिश चल रही है। लेकिन घरों में जमी सिल्ट, बर्बाद सामान, बंद बिजली और दोबारा बारिश का डर लोगों को यह भरोसा नहीं दे पा रहा कि मुश्किल खत्म हो गई है। सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेंद्र सिंह भी राहत शिविर में बाढ़ पीड़ितो से मिलने पहुंचे और स्थिति का जायजा भी लिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। सदगुरु ट्रस्ट देगा 51 लाख की मदद चित्रकूट के सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट ने बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए 51 लाख रुपए देने का संकल्प लिया है। सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक डॉ. इलेश जैन ने बताया कि 29 अगस्त से ट्रस्ट की टीम प्रभावित लोगों तक भोजन और कपड़े पहुंचा रही है। 51 लाख रुपए की सहायता की जानकारी जिला प्रशासन को भी दे दी गई है। स्थानीय संगठन भी मदद के लिए आगे आ रहे बाढ़ की स्थिति में जिला प्रशासन के साथ मठ-मंदिर और समाजसेवी संगठन भी प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। चित्रकूट में प्रशासन ने 6 राहत शिविर बनाए हैं। वहीं संतोषी अखाड़ा ने अपने स्कूल को आश्रय स्थल में बदल दिया है, जहां करीब 250 लोग रह रहे हैं। यहां लोगों को नाश्ता और दोनों समय भोजन दिया जा रहा है। इसके अलावा सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट, विश्व हिंदू परिषद, विंध्य विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संजय तीर्थवानी और सेवा संकल्प की टीम भी प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी और कपड़े पहुंचाने में जुटी है। आश्रय स्थल में रह रहे प्रिंस गुप्ता ने बताया कि 29 अगस्त की बाढ़ के बाद से वह परिवार के साथ संतोषी अखाड़ा में रह रहे हैं। उनकी जरूरतों की पूरी व्यवस्था आश्रम की ओर से की जा रही है।

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जबलपुर समेत MP के 22 जिलों में आज भारी बारिश:स्ट्रॉन्ग सिस्टम सक्रिय; कल से भोपाल, ग्वालियर-उज्जैन पहुंचेगा; सतना में स्कूल-कॉलेज की छुट्टी

मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में स्ट्रॉन्ग मानसूनी सिस्टम सक्रिय है। इस वजह से कई जिलों में बाढ़ आ गई है। सतना में हालात सबसे ज्यादा बिगड़े हुए हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। मंगलवार को रामघाट में करीब 400 दुकानें और 20-25 होटल डूब गए। भारी बारिश को देखते हुए सतना में सभी स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ियों की 2 और 3 सितंबर को छुट्‌टी घोषित की गई है। अगले दो दिन तक सतना, चित्रकूट में भारी बारिश की चेतावनी है। ऐसे में हालात सुधरने की संभावना कम है। IMD (मौसम केंद्र) भोपाल के अनुसार, मंगलवार को सीधी, पन्ना, कटनी, उमरिया, डिंडौरी, मंडला और सिवनी में अति भारी बारिश का अलर्ट है। अगले 24 घंटे में यहां 4 इंच से ज्यादा पानी गिर सकता है। विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम, सागर, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर, जबलपुर, छतरपुर, सतना, रीवा, मऊगंज, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर और बालाघाट में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। वहीं, भोपाल, सीहोर, राजगढ़, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, पांढुर्णा, मैहर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश हो सकती है। देखिए, मंगलवार को बारिश और बाढ़ से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. इसलिए तेज बारिश का दौर मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) एक्टिव है। वहीं, दक्षिणी हिस्से से एक ट्रफ भी गुजर रही है। ऊपरी हिस्से में मानसून ट्रफ सक्रिय है। इस वजह से प्रदेश में बारिश का दौर बना हुआ है। अगले तीन दिन तक सिस्टम और भी मजबूत होगा। कल से पश्चिमी हिस्से में पहुंचेगा सिस्टम मौसम विशेषज्ञों की माने तो 2 सितंबर को पूरा पूर्वी हिस्सा तेज बारिश से तरबतर रहेगा। भोपाल व नर्मदापुरम संभाग के कुछ जिलों में तेज बारिश होगी। 3 सितंबर को सिस्टम आगे बढ़ेगा। भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, नर्मदापुरम, रीवा और जबलपुर संभाग में असर दिखाई देगा। 4 सितंबर को पश्चिमी हिस्से में सिस्टम का ज्यादा असर रहेगा। इस वजह से भोपाल, उज्जैन, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में तेज बारिश होगी। 5 सितंबर को भी इन्हीं संभाग में भारी बारिश का दौर बना रहेगा। डैमों में 70 प्रतिशत से ज्यादा पानी आया लगातार बारिश की वजह से प्रदेश के डैमों की स्थिति सुधरी है। अधिकांश डैम में 70 प्रतिशत तक पानी आ गया है। कुछ डैम के गेट तो खोल दिए गए हैं। इंदौर और उज्जैन संभाग के डैमों की स्थिति ठीक नहीं है। भोपाल के बड़ा तालाब में पानी का लेवल 1666.50 फीट तक पहुंच गया है। अब यह सिर्फ 0.30 फीट ही खाली है। बड़ा तालाब फुल भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खुलेंगे। यहां से छोड़ा जाने वाला पानी कलियासोत डैम में पहुंचेगा और इसमें भी पानी का लेवल बढ़ जाएगा। अब तक 27.8 इंच बारिश IMD (मौसम केंद्र) की माने तो प्रदेश में अब तक 707.1 मिमी यानी, 27.8 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 31.2 इंच (791.7 मिमी) की तुलना में 3.1 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 11 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 5% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 16% बारिश कम हुई है। 40 जिलों में 2% से 55% तक कम बारिश प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 5% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छतरपुर, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सिवनी, टीकमगढ़, डिंडौरी, निवाड़ी में 2% से 55% तक कम बारिश हुई है। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, दतिया, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में औसत से 1% से 53% कम पानी गिरा है। 15 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, निवाड़ी, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मैप से समझें, 4 दिन ऐसा रहेगा मौसम जून के बाद जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश मौसम विभाग के अनुसार, जून में 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआती दिनों में तेज बारिश होने से यह बढ़ गया। इसके बाद मानसून दो बार ब्रेक हुआ और कई दिन तक बारिश नहीं हुई। आखिरी सप्ताह में फिर से स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव हो गया। बावजूद इसके 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि, जुलाई और फिर अगस्त का भी फुल हो गया, लेकिन जून की भरपाई नहीं हो पाई। यही वजह से अब तक भी प्रदेश में 11 प्रतिशत कम पानी गिरा है। प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। अब जानिए, एमपी के 5 बड़े शहरों में बारिश का रिकॉर्ड… भोपाल में 4 साल से कोटे से ज्यादा बारिश भोपाल में सितंबर महीने की औसत बारिश 7 इंच है, लेकिन पिछले 5 साल से कोटे से ज्यादा पानी बरस रहा है। ओवरऑल रिकॉर्ड की बात करें तो साल 1961 में पूरे सितंबर माह में 30 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड 2 सितंबर 1947 को बना था। इस महीने औसत 8 से 10 दिन बारिश होती है। वहीं, दिन में तापमान 31.3 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। इंदौर में सितंबर में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश इंदौर में सितंबर महीने में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश हो चुकी है। यह ओवरऑल रिकॉर्ड साल 1954 में बना था। वहीं, 20 सितंबर 1987 को 24 घंटे में पौने 7 इंच पानी गिर चुका है। इस महीने इंदौर में औसत 8 दिन बारिश होती है, लेकिन इस बार 15 या इससे अधिक दिन तक बारिश हो सकती है। ग्वालियर में वर्ष 1990 में गिरा था 25 इंच पानी ग्वालियर में सितंबर 1990 में 647 मिमी यानी साढ़े 25 इंच बारिश हुई थी। यह सितंबर में मासिक बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 7 सितंबर 1988 को 24 घंटे में साढ़े 12 इंच बारिश हुई थी। सितंबर में ग्वालियर की औसत बारिश करीब 6 इंच है, लेकिन पिछले चार साल से इससे अधिक बारिश हो रही है। ग्वालियर में इस बार अगस्त में ही बारिश का कोटा पूरा हो गया। ऐसे में सितंबर में जितनी भी बारिश होगी, वह बोनस की तरह ही रहेगी। जबलपुर में 24 घंटे में साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड सितंबर महीने में जबलपुर में भी मानसून जमकर बरसता है। 20 सितंबर 1926 को जबलपुर में 24 घंटे के अंदर साढ़े 8 इंच बारिश का रिकॉर्ड है। वहीं, पूरे महीने में 32 इंच बारिश साल 1926 को हो चुकी है। यहां महीने में औसत 10 दिन बारिश होती है। वहीं, सामान्य बारिश साढ़े 8 इंच है। पिछले 3 साल से सामान्य से ज्यादा पानी गिर रहा है। उज्जैन में 1981 में पूरे मानसून का कोटा हो गया था फुल उज्जैन की सामान्य बारिश 34.81 इंच है, लेकिन वर्ष 1961 में सितंबर की बारिश ने ही पूरे सीजन की बारिश का कोटा फुल कर दिया था। इस महीने 1089 मिमी यानी करीब 43 इंच पानी गिरा था। वहीं, 24 घंटे में सर्वाधिक साढ़े 5 इंच बारिश का रिकॉर्ड 27 सितंबर 1961 को बना था। सितंबर महीने में उज्जैन की सामान्य बारिश पौने 7 इंच है, लेकिन पिछले दो साल से 12 इंच से ज्यादा बारिश हो रही है। इस महीने औसत 7 दिन बारिश होती है।

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