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सावन सोमवार और Nag Panchami का अद्भुत संयोग, महादेव को लगाएं Samak Chawal Barfi का भोग, नोट करें आसान रेसिपी

इस बार सावन का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का पर्व एक ही दिन में पड़ रही है। इस दिन साधक महादेव को प्रसन्न करने के लिए व्रत एवं पूजा-अर्चना करते हैं। सावन में फलाहार करने वाले भक्त भगवान शिव को भोग लगाने के लिए कुछ खास और अलग रेसिपी के तलाश में है, तो यह लेख आपके लिए है। 
इस बार मीठे के लिए आप सामक के चावल की बर्फी ट्राई कर सकते हैं। इसको बनाना काफी आसान है, बस आपको दूध और सामक के चावल का इस्तेमाल करना है। जो महिलाएं सोमवार का व्रत रख रही हैं, उनके लिए यह मिठाई बनाना बेहद आसान है। शाम के समय आप महादेव को भोग में यह मिठाई अर्पित कर सकते हैं। इसको कैसे बनाएं, आइए आपको बताते हैं।

सामक चावल की बर्फी के लिए सामग्री
-1 कप सामक के चावल
-1 कप
-2 कप दूध
-मावा- आधा कप
-आधा कप पिसी हुई चीनी
-2 बड़ा चम्मच देशी घी
-आधा चम्मच इलायची पाउडर
-बादाम से 8-10
-बारीक कटे हुए
-काजू- 8-10
-1 चम्मच पिस्ता और 5-6 धागे केसर

सामक चावल की बर्फी कैसे बनाएं?
 - सबसे पहले आप सामक के चावल को अच्छे से धो लें और 15-20 मिनट के लिए पानी में भिगो कर रख दें। इसके बाद आप पानी निकालकर चावल को मिक्सी में हल्का दरदरा पीस लें। ध्यान रहे कि चावल का पूरा पेस्ट न बनाना है, बस हल्का ही पीसन है।

 - अब आप एक गहरे तले की कड़ाही में 1 बड़ा चम्मच देसी घी गर्म करें। इसमें पिसे हुए सामक के चावल डालकर धीमी आंच पर 4 से 5 मिनट तक भून लें। चावल में से आपको हल्की खुशबू आने लगे तो इसमें दूध डाल दें।

 - दूध डालने के बाद सामक के चावल को लगातार चलाते हुए धीमी आंच पर पकाएं। जब चावल अच्छे गाढ़ा होने लगे, तो इसमें मावा डालकर अच्छे से मिला लें।

 - अब इसमें पिसी हुई चीनी या बूरा डालकर, लगातार इसे चलाते रहें। चीनी डालने के बाद मिश्रण थोड़ा पतला हो जाएगा, इसे आप स्लो आंच पर तब तक पकाएं जब तक यह दोबारा गाढ़ा होकर कड़ाही छोड़ने न लगे।

 - इसमें अब इलायची पाउडर, कटे हुए बादाम, काजू और पिस्ता मिलाना है। केसर है तो मिला लें। इन सभी चीजों को आप अच्छे से मिला लें और 2-3 मिनट तक पका लें।

 - अब एक थाली या ट्रे में थोड़ा-सा घी लगाकर चिकना कर लें। अब बर्फी के घोल को इसमें डालकर चम्मच की मदद से एक बराबर स्पेस में फैला दें। आखिर में ऊपर से कटे हुए पिस्ता और बादाम डालें।

 - बर्फी को आप पहले कमरे में ही पंखे की नीचे रखकर सेट होने दें। जिसके बाद मिश्रण अच्छी तरह जमा हुआ लगेगा, बाद में चाकू की मदद से मनचाहे आकार में काट लें और फ्रिज में रख दें।

- तैयार है आपकी सामक चावल की बर्फी। शाम के समय बर्फी का भोग भगवान शिव को लगाएं। 

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Operation Sindoor: किराना हिल्स पर कैसे पहुंचा भारतीय ड्रोन? पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान ने बताई वजह

नई दिल्ली: पिछले साल 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत का एक 'लोइटरिंग म्यूनिशन' (एक तरह का ड्रोन) पाकिस्तान के न्यूक्लियर हब माने जाने वाले किराना हिल्स तक पहुंच गया था। हालांकि, भारत ने किराना हिल्स को निशाना बनाकर हमला नहीं किया था। पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने अब बताया है कि यह ड्रोन वहां कैसे पहुंचा।

नई दिल्ली के विवेकानंद सेंटर में एक कार्यक्रम के दौरान जनरल चौहान ने कहा कि भारत ने सरगोधा और उसके आसपास पाकिस्तानी रडार की तलाश के लिए कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। इनमें से एक ड्रोन का ईंधन किराना हिल्स के पास खत्म हो गया और वह पहाड़ियों से टकरा गया।

जनरल चौहान ने कहा, "भारती ने सही कहा था कि हमने किराना हिल्स को टारगेट नहीं किया था।" उनका इशारा एयर मार्शल एके भारती (रिटायर्ड) की ओर था, जो 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारतीय वायुसेना के डायरेक्टर जनरल (एयर ऑपरेशन्स) थे।

रडार खोजने के लिए भेजा गया था ड्रोन
जनरल चौहान के मुताबिक, ऑपरेशन से पहले भारत ने सरगोधा और उसके आसपास रडार की तलाश के लिए कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। ऐसे ड्रोन एक तय समय तक हवा में रह सकते हैं।

उन्होंने बताया कि यह ड्रोन करीब दो घंटे तक हवा में घूम सकता है। अगर इस दौरान उसे कोई टारगेट नहीं मिलता, तो वह कहीं न कहीं जाकर गिर जाता है। संभव है कि इसी दौरान एक ड्रोन किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकरा गया हो।

यह लोइटरिंग म्यूनिशन संभवतः इजरायल में बना 'हारोप' ड्रोन था।

ऑपरेशन सिंदूर में क्यों चुना गया लोअर एयरस्पेस?
जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति पर भी बात की। उन्होंने बताया कि उरी हमले के बाद भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की और पुलवामा के बाद हवाई रास्ते से कार्रवाई की। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने तीसरा विकल्प चुना और लोअर एयरस्पेस का इस्तेमाल किया।

ANI के मुताबिक, जनरल चौहान ने कहा कि इस रणनीति का मकसद संघर्ष की सीमा को कम रखना था। इससे ऑपरेशन की सफलता के साथ-साथ अचानक हमले का फायदा भी मिल सकता था।

स्कार्दू पर हमले की मिली थी मंजूरी
जनरल चौहान ने यह भी बताया कि भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित स्कार्दू पर हमला करने की मंजूरी मिली थी। हालांकि, खराब मौसम के कारण यह मिशन रद्द करना पड़ा।

उन्होंने बताया कि वायुसेना प्रमुख ने उनसे सरगोधा पर हमला करने को लेकर पूछा था। उन्होंने हमले की मंजूरी देते हुए दो और टारगेट की पहचान करने को कहा था। इनमें से एक स्कार्दू था।

जनरल चौहान ने कहा कि स्कार्दू में मौसम खराब होने के बाद भारतीय वायुसेना ने अपना प्लान बदल दिया और भोलारी को टारगेट बनाया।

भोलारी पर हमला बना अहम कार्रवाई
10 मई के एयर ऑपरेशन में भोलारी हैंगर पर भारतीय वायुसेना का हमला ऑपरेशन सिंदूर की प्रमुख कार्रवाइयों में शामिल रहा। यह हमला भारतीय वायुसेना की गांधीनगर स्थित साउथ वेस्टर्न एयर कमांड ने किया था।

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Women's Asia Cup: बड़े उलटफेर से बच गया पाकिस्तान, थाईलैंड के खिलाफ गिरते-पड़ते जीता एशिया कप मैच

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