सितंबर का महीना व्रत-त्योहारों से भरा हुआ है। इस महीने में कई खास और मुख्य त्योहार आने वाले हैं। असल में इस माह की शुरुआत श्री कृ्ष्ण जन्माष्टमी से होने वाली है। सितंबर में हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी और पद्मा एकादशी का व्रत भी रखा जाएगा।
महीने के आखिरी में पितृपक्ष की शुरुआत होगी। हिंदू धर्म में व्रत-त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इन व्रत-त्योहारों की तिथि को आप जल्दी से नोट कर लें। आइए आपको बताते हैं सितंबर महीने में पड़ने वाले व्रत और त्योहार की लिस्ट।
सितंबर व्रत-त्योहारों की लिस्ट
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी- 4 सितंबर, शुक्रवार
अजा एकादशी- 7 सितंबर, सोमवार
कुशाग्रहणी/पिठोरी अमावस्या- 10 सितंबर, गुरुवार
हरतालिका तीज- 14 सितंबर, सोमवार
कलंक चतुर्थी- 14 सितंबर, सोमवार
गणेश चतुर्थी- 14 सितंबर, सोमवार
श्रीमहालक्ष्मी व्रत शुरू - 18 सितंबर, शुक्रवार
राधाष्टमी- 19 सितंबर, शनिवार
पद्मा एकादशी- 22 सितंबर, मंगलवार
वामन जयंती - 23 सितंबर, बुधवार
अनंत चतुर्दशी व्रत- 25 सितंबर, शुक्रवार
प्रोष्ठपदी पूर्णिमा श्राद्ध- 26 सितंबर, शनिवार
पितृपक्ष आरंभ- 27 सितंबर, रविवार
श्री कृष्ण जन्माष्टमी
इस बार 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाई जाएगी। हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण ने द्वापर युग में माता देवकी और पिता नंदन के घर अवतार लिया था। इस दिन बाल गोपाल की पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है।
अजा एकादशी
हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा और व्रत किया जाता है। इस महीने में अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जाएगा।
पिठोरी अमावस्या
भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पितरों का तर्पण किया जाता है। वहीं, पूजा के लिए कुश इकट्ठा किया जाता है और सालभर पूजा में इन्हें ही प्रयोग करते हैं। इसलिए इसको कुशाग्रहणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस साल यह तिथि 10 सितंबर, गुरुवार को है।
हरतालिका तीज
हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। भाद्रपद मास की तृतीय तिथि को हरतालिका तीज का व्रत किया जाता है। इस बार यह तिथि 14 सितंबर 2026, सोमवार को पड़ रही है। महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत के रखने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
गणेश चतुर्थी
सितंबर का महीना त्योहारों के लिहाज से बेहद खास माना जा रहा है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश चतुर्थी का त्योहार शुरु होगा और यह पर्व 10 दिन तक चलेगा। इस साल गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026, सोमवार को है। यह त्योहार गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी के दिन तक, भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
कलंक चतुर्थी
इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि को कलंक चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन शुरुआत से लेकर चतुर्थी तिथि की समाप्ति तक चंद्र दर्शन को पुराणों में वर्जित माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अगर आप ने कलंक चतुर्थी पर चंद्रमा के दर्शन कर लिए, तो मिथ्या कलंक यानी झूठे आरोप लगने की आशंका रहती हैं। इस साल कलंक चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को है।
महालक्ष्मी व्रत आरंभ
भाद्रपद माह में श्रीमहालक्ष्मी व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी लक्ष्मी का व्रत और पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही आपके अटके हुए सारे कार्य पूर्ण होते हैं। महालक्ष्मी का व्रत 18 सितंबर 2026, शुक्रवार से शुरु होने जा रहा है, जो पूरे 16 दिनों तक रहने वाला है।
राधाष्टमी
सितंबर महीने में राधाष्टमी का व्रत भी रखा जाएगा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधाष्टमी का व्रत किया जाएगा। माना जाता है कि इस दिन राधा-रानी का प्राकट्य हुआ था। इस दिन विधि-विधान से राधा-रानी की पूजा की जाती है। राधाष्टमी 19 सितंबर, शनिवार को मनाई जाएगी।
पद्मा एकादशी
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पद्मा एकादशी मनाई जाएगी। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत रुप से पूजा की जाएगी और व्रत रखने से शुभ फलों की प्राप्ति होगी। इस बार पद्मा एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार मनाई जाएगी।
वामन जयंती
हिंदू धर्म में वामन जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। इस भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को वामन जयंती मनाई जाएगी। इस बार यह तिथि 23 सितंबर, बुधवार के दिन पड़ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन श्रवण नक्षत्र के अभिजीत मुहूर्त में श्रीहरि का वामन अवतार में प्रकाट्य हुआ था। वामन जयंती पर भगवान विष्णु की विधिवत रुप से पूजा-अर्चना की जाती है।
अनंत चतुर्दशी
अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होता है। इस बार अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त बप्पा की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उन्हें विदा करते हैं। मान्यता के अनुसार, गणेश चतुर्थी पर गणेशजी को विराजमान करने के बाद उन्हेंडेढ़, ढाई, पांच, सात या फिर 11 दिनों तक घरों में विराजमान किया जाता है। वहीं, इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु के अनंत स्वरुप की पूजा की जाती है। इस दिन 14 गांठों वाला रेशमी अनंत सूत्र कलाई पर बाधा जाता है, जो 14 लोकों और भगवान विष्णु की रक्षा का प्रतीक है।
प्रोष्ठपदी पूर्णिमा
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि प्रोष्ठपदी पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन पितरों की पूजा, तर्पण, श्राद्ध आदि कार्य किए शुरु हो जाते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल प्रोष्ठपदी पूर्णिमा 26 सितंबर, शनिवार को पड़ रही है।
पितृपक्ष आरंभ
इस साल पितृपक्ष यानी श्राद्ध का शुरुआत 27 सितंबर, रविवार से हो रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दौरान पितृ धरती पर आते हैं, अपने परिवारजनों से पास आते हैं। ऐसे में उनके नाम से श्राद्ध, तर्पण आदि कार्य कराने से परिवार पर पितरों की कृपा बनीं रहती है। इसके साथ ही सुख-शांति के संयोग बने रहते हैं।
Continue reading on the app
कई बार लाख प्रयासों के बाद भी किसी भी काम में सफलता नहीं मिलती है। कई बार शादी होने में इतना देर होने लगती है कि उसका सही कारण नहीं समझ पाते हैं। माना जाता है कि कुंडली के 5 तत्वों में से जब वायु और अग्नि तत्व ज्यादा होता है, तो शादी में देर होती है। इसके अलावा मंगल दोष भी विवाह में समस्याएं पैदा कर सकता है।
लेकिन सावन के महीने में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा से कई बिगड़े काम बन जाते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको कुछ ज्योतिषीय उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो आप सावन के महीने में आजमा सकती हैं।
शिवलिंग पर चढ़ाएं जल
सावन के सोमवार को अगर आप शिवलिंग पर जल के साथ कच्चा दूध मिलाकर चढ़ाते हैं। इससे आपके जीवन में कई प्रभाव दिख सकते हैं।
भोलेनाथ को सावन में जल चढ़ाना एक प्रभावी उपाय होता है। इससे जातक की सभी मनोकमाएं पूरी होती हैं। लेकिन अगर शादी में किसी तरह की रुकावट आ रही है। तो सावन के हर सोमवार को शिवलिंग पर जल जरूर चढ़ाना चाहिए। इस उपाय को करने से सुयोग्य और शादी के जल्द योग बनेंगे।
सावन सोमवार का व्रत करें
माना जाता है कि अगर आप सावन के सोमवार के सभी व्रत को विधि-विधान से करेंगी। तो शादी में आने वाली समस्याओं का अंत होता है और इन परेशानियों से बाहर निकलने में मदद मिलेगी।
अगर शादी की बात बनते-बनते बिगड़ जाती है। तो सावन का उपाय आपके लिए लाभकारी हो सकता है। सावन के पहले सोमवार से 16 सोमवार का व्रत करें। इससे जीवन की सभी समस्याएं दूर होती हैं और जल्द ही शादी के योग भी बनते हैं।
माता पार्वती को अर्पित करें श्रृंगार की चीजें
सावन के सोमवार को मां पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करना चाहिए। इससे भी जल्दी शादी के योग बनते हैं। साथ ही इस उपाय को करने से जीवन में शादी को लेकर आने वाली परेशानियां दूर होती हैं।
इस उपाय को करने से सुयोग्य जीवनसाथी मिलता है। सावन का महीना भगवान शिव और मां पार्वती को समर्पित होता है। इसलिए मां पार्वती की पूजा करना विशेष फलदायी होता है।
शिव-पार्वती को चढ़ाएं एक ही माला
अगर आप भी इस सावन भगवान शिव और मां पार्वती को संयुक्त रूप से एक ही माला अर्पित करते हैं, तो जल्द शादी के योग बनते हैं। यह माला गेंदे के फूल के होने चाहिए। इस उपाय से जल्दी शादी के योग बनते हैं।
Continue reading on the app