ब्रिक्स सम्मेलन की रिहर्सल के चलते दिल्ली में आज कई रास्ते रहेंगे बंद, ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइजरी
नयी दिल्ली, एक सितंबर दिल्ली यातायात पुलिस ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 से पहले वाहनों के काफिले की रिहर्सल को लेकर यातायात परामर्श जारी किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि दो सितंबर को राष्ट्रीय राजधानी की कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रतिबंध और मार्ग परिवर्तन लागू रहेंगे। उन्होंने बताया कि रिहर्सल सुबह 10 बजे से अपराह्न तीन बजे तक होगा।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित किया जाएगा। यातायात पुलिस के परामर्श में कहा गया है कि रिहर्सल के दौरान 22 स्थानों पर यातायात का मार्ग परिवर्तन किया जाएगा और 35 से अधिक सड़कों पर यातायात का संचालन नियंत्रित रहेगा। वाहन चालकों वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
परामर्श के अनुसार, जिन प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की आशंका है उनमें सरदार पटेल मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, तीन मूर्ति मार्ग, अकबर रोड, तीस जनवरी मार्ग, राजेश पायलट मार्ग, सुब्रमण्यम भारती मार्ग, मथुरा रोड, मोतीलाल नेहरू मार्ग, डॉ. जाकिर हुसैन मार्ग, ब्रिगेडियर होशियार सिंह मार्ग, अफ्रीका एवेन्यू रोड, सत्य मार्ग, शांति पथ, जनपथ, अशोक रोड, बाराखंभा रोड, टॉल्स्टॉय मार्ग, रंजीत सिंह फ्लाईओवर, नीति मार्ग, पंचशील मार्ग, कमाल अतातुर्क मार्ग, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम रोड और प्रेस एन्क्लेव रोड शामिल हैं। यातायात पुलिस ने कई मार्ग परिवर्तन स्थालों की पहचान की है। इनमें डॉ. दिनेश नंदिनी डालमिया चौक, राम चरण अग्रवाल चौक (आईटीओ), मीर दर्द चौक, कस्तूरबा गांधी मार्ग-आउटर सर्किल, जनपथ-कनॉट प्लेस, पटेल चौक, आरएमएल अस्पताल गोलचक्कर, धौला कुआं फ्लाईओवर, मोती बाग फ्लाईओवर, लोधी रोड और मंदिर हाउस शामिल हैं, जहां आवश्यकतानुसार यातायात का मार्ग परिवर्तन किया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहेंगी, जबकि वीआईपी आवाजाही के दौरान बसों का मार्ग बदला जा सकता है। टैक्सी और ऑटो-रिक्शा को निर्धारित स्थानों को छोड़कर सड़कों के किनारे खड़ा करने की अनुमति नहीं होगी।
मध्य प्रदेश में टीईटी अनिवार्यता से 1.50 लाख शिक्षक प्रभावित, कांग्रेस ने मांगा विधानसभा का विशेष सत्र
भोपाल, एक सितंबर मध्यप्रदेश में विपक्षी कांग्रेस ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने से करीब 1.50 लाख कार्यरत शिक्षकों के प्रभावित होने का दावा करते हुए इस मुद्दे पर चर्चा के लिए विधानसभा का एकदिवसीय विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री मोहन यादव को मंगलवार को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर उनका ध्यान आकर्षित किया है। सिंघार ने पत्र में कहा कि प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता के कारण उनकी सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों को लेकर गंभीर एवं विषम स्थिति उत्पन्न हो गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘इस पूरे मामले से प्रदेश के करीब 1.50 लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं।’’ सिंघार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के एक सितंबर 2025 और 29 मई 2026 के फैसलों के परिप्रेक्ष्य में टीईटी का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि टीईटी पास करना सभी नए शिक्षकों और पहले से सेवा में कार्यरत उन शिक्षकों के लिए अनिवार्य होगा, जो पदोन्नति चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई शिक्षक नई नियुक्ति या पदोन्नति चाहता है तो टीईटी उत्तीर्ण किए बिना उसका दावा स्वीकार्य नहीं होगा।
सिंघार ने इन फैसलों का हवाला देते हुए कहा, ‘‘ऐसे में प्रदेश सरकार को शिक्षकों के भविष्य और उनके परिवारों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।’’ नेता प्रतिपक्ष ने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा द्वारा 25 अगस्त 2026 को पारित प्रस्ताव का भी उल्लेख किया। इसमें 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से छूट देने तथा उनके सेवा एवं पदोन्नति संबंधी हितों के संरक्षण का प्रस्ताव पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि जब अन्य राज्य अपने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए विधानसभा के माध्यम से पहल कर सकते हैं, तो मध्यप्रदेश सरकार को भी शिक्षकों की समस्या का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकालने के लिए आगे आना चाहिए।
सिंघार ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि शिक्षकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए मध्यप्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र शीघ्र बुलाया जाए, ताकि टीईटी से संबंधित समस्या पर व्यापक चर्चा हो सके और प्रदेश के करीब 1.50 लाख प्रभावित शिक्षकों तथा उनके परिवारों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक निर्णय लिया जा सके।
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